आईएएस संतोष वर्मा केस: ब्राह्मण बेटियों पर टिप्पणी मामले में कोर्ट सख्त, पुलिस की सुस्ती पर सवाल
इस मामले में अधिवक्ता शैलेंद्र द्विवेदी ने कोर्ट में एक शिकायत (ias santosh verma case) दायर की थी। इस पर अब तक कई बार सुनवाई हो चुकी है। लेकिन चार पेशियों के बाद भी पुलिस ने कोई रिपोर्ट नहीं दी है। इस पर कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर से नाराजगी जताते हुए अब तक की कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट (status report) मांगी है।
आईएएस अवॉर्ड खतरे में
दूसरी ओर, अधिवक्ता प्रवीण रावल के मुताबिक, राज्य सरकार ने वर्मा को दिया गया आईएएस अवॉर्ड वापस लेने का प्रस्ताव केंद्र को भेज दिया है। वर्मा पर आरोप है कि उन्होंने गलत तरीके से एक आपराधिक केस को हल करवा लिया था, जिसके बाद उन्हें ये अवॉर्ड मिला। इसके अलावा, वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से जमानत भी मिल चुकी है। अब राज्य सरकार केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद उनका अवॉर्ड वापस ले सकती है।
पुलिस की सुस्ती पर अदालत ने उठाए सवाल
Indore Court ने इस मामले में पुलिस की सुस्ती पर सवाल उठाया है। वर्मा के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों के बावजूद पुलिस ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अदालत ने संकेत दिए हैं कि अगर पुलिस इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई नहीं करती, तो इसकी जवाबदेही तय की जाएगी। यह फैसला मध्य प्रदेश पुलिस के कार्यों पर एक महत्वपूर्ण सवाल उठाता है, खासकर जब मामला एक बड़े प्रशासनिक अधिकारी से जुड़ा हो।
क्या था ब्राह्मण बेटी वाला आईएएस संतोष वर्मा का बयान ?
अजाक्स (Ajjaks Madhya Pradesh) संगठन के प्रांतीय अधिवेशन के दौरान IAS अफसर संतोष वर्मा (ias santosh verma bayan) को संगठन का नया प्रांताध्यक्ष चुना गया था।
इस दौरान अपने भाषण में संतोष वर्मा ( IAS संतोष वर्मा विवादित बयान) ने कहा था कि,जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं देता या उससे संबंध नहीं बनता, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए।
अजाक्स अध्यक्ष संतोष वर्मा यह भी कहा कि समाज में आरक्षण (Reservation ) तब तक रहेगा, जब तक रोटी-बेटी का व्यवहार समान नहीं होता।
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