मंदसौर-उज्जैन में बीमा धोखाधड़ी: मृतकों के फर्जी क्लेम से 8 करोड़ ठगे, एजेंट, नॉमिनी और सरपंच सब मिले हुए थे
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- मंदसौर और उज्जैन में बीमा फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया।
- ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस (ICICI Prudential Life Insurance) के साथ करीब 8 करोड़ की धोखाधड़ी हुई।
- मृत और गंभीर बीमार लोगों के नाम पर फर्जी बीमा पॉलिसी ली गई।
- एजेंट, नॉमिनी और सरकारी लोकसेवकों ने मिलकर फर्जी दस्तावेज बनाए।
- आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW- Economic Offences Wing) भोपाल ने अपराध दर्ज किया।
मृतकों के नाम पर बीमा, 8 करोड़ का खेल
मध्यप्रदेश के मंदसौर और उज्जैन जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां बीमा एजेंटों, पॉलिसीधारकों के नॉमिनी और सरकारी कर्मचारियों ने मिलकर एक बड़ा फर्जीवाड़ा किया। इन लोगों ने ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को करीब 8 करोड़ रुपए का चूना लगाने की कोशिश की।
तरीका यह था कि जो लोग पहले से गंभीर बीमारी से पीड़ित थे या जिनकी मृत्यु हो चुकी थी, उनके नाम पर बीमा पॉलिसी ली गई। फिर उन्हीं के नाम पर क्लेम दाखिल किए गए।
कैसे हुआ पूरा खेल?
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) भोपाल ने शिकायत के आधार पर 3 सितंबर 2025 को इस मामले की जांच शुरू की। जांच में पाया गया कि कुल 27 बीमा पॉलिसियों की जांच की गई। इनमें से 19 पॉलिसियों में एजेंटों और पॉलिसीधारकों ने वे तथ्य छुपाए, जो यह बताते थे कि बीमित व्यक्ति पहले से गंभीर रूप से बीमार था।
बाकी 8 पॉलिसियों में तो और भी बड़ा फर्जीवाड़ा था। इन पॉलिसियों में मर चुके लोगों को जिंदा दिखाकर उनके नाम पर पॉलिसी ली गई। फिर उन्हीं के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाकर बीमा कंपनी में क्लेम किया गया।
सरपंच से लेकर सचिव तक सब शामिल
इस पूरे खेल में सिर्फ बीमा एजेंट और नॉमिनी ही नहीं, बल्कि सरकारी लोकसेवक भी शामिल पाए गए। उज्जैन जिले की ग्राम पंचायत आलाखेड़ा तहसील महीदपुर के सरपंच जसवंत सिंह, सचिव राजकुमार देवड़ा और सहायक सचिव राधेश्याम गुर्जर पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर की। ग्राम पंचायत पालखंदा तहसील उज्जैन के सचिव मेंबर चौधरी और ग्राम पंचायत धुरेरी तहसील बड़नगर के सचिव लाखन सिंह चौहान पर भी यही आरोप हैं। इन लोकसेवकों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेजों को वैध बनाने में मदद की।
कौन-कौन हैं आरोपी?
आरोपियों की सूची काफी लंबी है। एजेंटों में मेघा डोंगारवर, ऋषि पाल, झोपर इंश्योरेंस ब्रोकर्स प्रा.लिमि., जशोदाबेन शर्मा, महेशचंद्र, मुकेश साधवानी, सुनिता, जितेंद्र खिंची, महेंद्र परिहार, अंजलि जैन, प्रहलाद चौहान, मेघा कोठारी, रवि राठौर और प्रहलाद पाटीदार के नाम शामिल हैं।
नॉमिनी में रामकन्या नवरंग, सरे कुंवर, गोकुल सिंह, अनिल, रेखा बाई, मुकेश सिंह चौहान, राधा मालवीय, गोपाल, प्रभा पाटीदार, अनिल भाटी, दिलीप गावरिया, विनोद, कैलाश हिरवे, शीतल, श्यामदास बैरागी, मुन्नी यादव, सुरेश जुझारे, मंजुदेवी राव, राधा देवी, सरफराज अहमद, सुधीर राठौर और ज्योति बाई के नाम हैं। इसके अलावा 19 पॉलिसियों में जिन एजेंट और पॉलिसीधारकों ने बीमारी छिपाई उनमें शरद, श्रीराम पाटीदार, दिनेश भाटी, महिपाल, रमेशचंद्र धाकड़, रोशन, सुमेर सिंह, विनोद कुमार बैरागी, कैलाश यादव, मुकेश जुझारे, गोसिया खातून, शंकरलाल राठौर और विशाल भाटी शामिल हैं।
किन धाराओं में दर्ज हुआ अपराध?
EOW ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC- Indian Penal Code) की धारा 417, 420/511, 467, 468, 471, 120(बी) के तहत मामला दर्ज किया है। साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7(ग) और 12 (संशोधन अधिनियम 2018) के तहत भी अपराध पंजीबद्ध किया गया है। यह मामला सिर्फ बीमा फर्जीवाड़ानहीं है। इसमें सरकारी दस्तावेजों की जालसाजी और पद का दुरुपयोग भी शामिल है, जो इसे और गंभीर बनाता है।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह मामला सिर्फ एक बीमा कंपनी के साथ हुई धोखाधड़ी नहीं है। यह दिखाता है कि किस तरह सरकारी कर्मचारी, बीमा एजेंट और आम नागरिक मिलकर सिस्टम को ठग सकते हैं। जब सरपंच और पंचायत सचिव जैसे लोकसेवक फर्जी दस्तावेज बनाने में मदद करते हैं, तो यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत मिले नागरिकों के भरोसे और न्याय के अधिकार का उल्लंघन है। बीमा उद्योग पर आम लोगों का भरोसा तभी बनता है जब इस तरह के फर्जीवाड़े पर कड़ी कार्रवाई हो। EOW का यह कदम डिजिटल और सामाजिक नैतिकता के नजरिए से भी जरूरी संदेश देता है कि मृत व्यक्तियों की पहचान का दुरुपयोग कानूनी रूप से गंभीर अपराध है। यह खबर नागरिकों को सतर्क करती है और सरकारी जवाबदेही की मांग को मजबूत करती है।
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