कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी थी अवैध हिरासत, HC ने दिए भोपाल पुलिस कमिश्नर को कार्रवाई के आदेश

Neel Tiwari | May 12, 2026, 21:11 IST
Photograph: (the sootr)
हाई कोर्ट ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को अवैध हिरासत माना है। कोर्ट ने भोपाल पुलिस कमिश्नर को सख्त कार्रवाई और रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।

News in short

  • हाईकोर्ट ने कहा - मामला प्रथम दृष्टया अवैध हिरासत का प्रतीत होता है
  • बंदियों के बयान सीलबंद लिफाफे में कोर्ट में पेश किए गए
  • भोपाल पुलिस कमिश्नर को कार्रवाई कर रिपोर्ट देने के आदेश
  • राजस्थान और एमपी सरकार ने अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा
  • मामले की अगली सुनवाई अब 18 जून 2026 को होगी

Intro

कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े तीन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी मामले में मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस की पोल हाईकोर्ट में खुल गई है। कोर्ट ने बंदियों के बयानों का अवलोकन करने के बाद प्रथम दृष्टया इसे अवैध हिरासत का मामला माना है और भोपाल पुलिस कमिश्नर को BNSS के तहत शिकायत मानकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।



News in detail

कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की हिरासत को हाईकोर्ट ने बताया अवैध

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर मुख्य पीठ में मंगलवार 12 मई 2026 को कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े तीन कार्यकर्ताओं बिलाल खान, इनाम अहमद और निखिल प्रजापति की गिरफ्तारी मामले में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने बंदियों के दर्ज बयानों का अवलोकन करने के बाद टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया यह मामला “अवैध हिरासत” (Illegal Detention) का प्रतीत होता है। कोर्ट की यह टिप्पणी पूरे मामले में बड़ा मोड़ मानी जा रही है।



कोर्ट में पेश हुए दोनों राज्यों के पुलिस अधिकारी

सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस के कई अधिकारी अदालत में मौजूद रहे। मध्य प्रदेश की ओर से साइबर क्राइम भोपाल के उपनिरीक्षक प्रमोद कुमार शर्मा उपस्थित हुए। वहीं राजस्थान पुलिस की ओर से एसीपी बलराम चौधरी (अशोकनगर), सीआई/एसएचओ संतरा मीणा (ज्योति नगर, जयपुर), सीआई सज्जन सिंह (पुलिस आयुक्त कार्यालय, जयपुर), कांस्टेबल सियाराम और कांस्टेबल रविंद्र सिंह अदालत में पेश हुए।



बंदियों के बयान सीलबंद लिफाफे में कोर्ट पहुंचे

29 अप्रैल 2026 के आदेश के अनुसार तीनों बंदियों को संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया था, जहां उनके बयान दर्ज किए गए। 29वें सिविल जज (सीनियर डिवीजन), जबलपुर ने इन बयानों को सीलबंद लिफाफे में हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को भेजा। कोर्ट ने इन बयानों को रिकॉर्ड पर लेते हुए उनकी एक प्रति सुरक्षित रखने और मूल प्रतियां भोपाल पुलिस आयुक्त को भेजने के निर्देश दिए।



भोपाल पुलिस कमिश्नर को कार्रवाई के निर्देश

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि बंदियों के बयानों के आधार पर प्रथम दृष्टया अवैध हिरासत का मामला बनता दिखाई दे रहा है। इसके बाद कोर्ट ने भोपाल पुलिस आयुक्त को निर्देश दिए कि इन बयानों को BNSS के तहत शिकायत मानते हुए कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करें और अगली सुनवाई से पहले विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें। यह आदेश सीधे तौर पर पुलिस कार्रवाई की वैधता पर गंभीर प्रश्नचिह्न माना जा रहा है।



अतिरिक्त हलफनामे के लिए मांगा गया समय

सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश और राजस्थान राज्य की ओर से पेश अधिवक्ताओं बी.डी. सिंह और अंशुमन सिंह ने अदालत से अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने दोनों पक्षों को आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के लिए तीन सप्ताह का समय प्रदान किया है।



अगली सुनवाई 18 जून को, बढ़ सकती हैं मुश्किलें

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 18 जून 2026 को निर्धारित की है। अब सभी की नजरें भोपाल पुलिस कमिश्नर की रिपोर्ट और दोनों राज्यों की ओर से दाखिल किए जाने वाले हलफनामों पर टिकी हैं। कोर्ट की शुरुआती टिप्पणी के बाद इस मामले में संबंधित पुलिस अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।



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