इंदौर की अनंत चतुर्दशी झांकी में अखाड़ा निर्णायक समिति में राजनीति, प्रभाव से जुड़ रहे नाम
इंदौर में अनंत चतुर्दशी के अवसर पर रतजगा होता है और रात भर झांकियां निकलती हैं। यह परंपरा 103 साल पुरानी है। इसमें झांकियों को पुरस्कार देने के लिए एक झांकी निर्णायक समिति होती है। इसमें मुख्य तौर पर शासकीय अधिकारी होते हैं। वहीं झांकियों के आगे विविध अखाड़े कला का प्रदर्शन करते हैं और तलवारबाजी व अन्य करतब दिखाते हैं। इन्हें भी पुरस्कृत करने के लिए अखाड़ा निर्णायक समिति होती है। लेकिन इस समिति में अब राजनीतिक पकड़ के जरिए सदस्य बन रहे हैं।
अखाड़ा निर्णायक समिति में कौन है
साल 2025 की अखाड़ा समिति की बात करें तो इसमें रविंद्र सिंह गौड़, बुद्धासिंह पहलवान, रमेश यादव, सुरेश राणे, मानसिंह यादव, विनोद गांधी, गोपाल बौरासी, दिनेश शुक्ला, राजा रतन पहलवान, मीत भवानी कश्यप, गोपाल यादव और गोविंद गुर्जर हैं। जानकारी के अनुसार लगभग यही समिति 2026 के लिए भी बन रही है और इसकी फाइल चल चुकी है।
समिति में कलाकार, विक्रम अवार्डी गायब
अखाड़ा कला को परखने के लिए अनुभवी, जानकारों की जरूरत होती है। लेकिन समिति से अब ये गायब हो गए हैं। पहले विक्रम अवार्डियों जैसे सम्मानित इसमें शामिल होते थे। साथ ही संख्या भी पांच-छह से ज्यादा नहीं होती थी। लेकिन समय के साथ अपनी पहुंच लगाकर इसमें वह शामिल हो गए जो कला की फील्ड के हैं ही नहीं और न ही कला से कोई वास्ता है।
कौन हैं समिति के लोग
समिति में साल 2025 के सदस्यों की बात करें तो गौड़ वकील हैं, मानसिंह यादव बीजेपी नेता हैं। वहीं गुर्जर, मीत कश्यप, यादव इनका भी शस्त्र कला से कोई लेना-देना नहीं है। पुराने समिति सदस्य और विक्रम अवार्डी पहलवान ओमप्रकाश खत्री कहते हैं कि अब समिति काफी बदल गई है। अवार्डी और जानकार लोग बाहर हैं। यह क्यों हुआ यह तो प्रशासन ही जाने।
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