इंदौर आश्रम कांड: नगर निगम के सामुदायिक भवन में अवैध रूप से हो रहा था संचालित
इंदौर में 29 जुलाई की रात को एक वीडियो सामने आया था। इस वीडियो में एक 13 साल का बालक वृद्धों को डंडे से पीट रहा था। यह वीडियो बाणगंगा थाना क्षेत्र के वार्ड 12 में स्थित महाराणा प्रताप नगर आश्रम का था।
इसमें जिला प्रशासन ने सख्ती करते हुए 30 जुलाई को टीम भेजकर जांच की और आश्रम को बिना मान्यता के संचालित होने पर सील कर दिया।
इसमें हाईकोर्ट इंदौर ने भी संज्ञान लिया और प्रशासन से स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई। इस पर सोमवार को सुनवाई है।
स्टेटस रिपोर्ट में खुलासा, भवन तो निगम का है
इस स्टेटस रिपोर्ट में जिला प्रशासन ने खुलासा किया है कि, जिस भवन में यह आश्रम संचालित हो रहा है, वह तो नगर निगम का सामुदायिक भवन है। यह निगम की संपत्ति है।
इस पर आश्रम संचालिका नीलम दुबे द्वारा अवैध कब्जा किया गया या फिर निगम ने इसे दिया, यह स्थिति अभी साफ नहीं है। इसकी जांच की जा रही है।
बताया जा रहा है कि पूर्व पार्षद संतोष गौर के करीबी संबंधों का लाभ आश्रम संचालिका नीलम दुबे को मिला। उन्हें यह भवन ऐसे ही आश्रम संचालन के लिए दे दिया गया।
केवल फर्म एंड सोसायटी में रजिस्टर्ड
जांच में सामने आया है कि आश्रम के पास केवल फर्म एंड सोसायटी का रजिस्ट्रेशन है, जो 27 नवंबर 2024 को हुआ था। इसके बाद आश्रम ने कोई रिकॉर्ड सोसायटी को भी नहीं दिया है।
वहीं नियमानुसार सामाजिक न्याय विभाग से आश्रम संचालन की मंजूरी लेनी होती है, जो नहीं ली गई और बिना मंजूरी के ही आश्रम संचालित किया गया।
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