इंदौर में 13 साल की दुल्हन, 42 का दूल्हा, फर्जी मार्कशीट से छिपाई उम्र, प्रशासन ने रुकवाई

Kaushiki | Apr 25, 2026, 08:49 IST
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इंदौर के ग्राम रंगवासा में 13 साल की नाबालिग की शादी 42 साल के व्यक्ति से तय थी। परिवार ने फर्जी मार्कशीट दिखाई, लेकिन जांच में पकड़ाई। प्रशासन ने समय रहते दोनों बच्चों की शादी रुकवाई। टेंट और साउंड सिस्टम भी हटवाया गया।

5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

  • इंदौर के रंगवासा गांव में 13 साल की बच्ची की शादी तय थी।
  • दूल्हे की उम्र 42 साल थी, यानी लड़की से करीब तीन गुना ज्यादा।
  • परिवार ने उम्र छिपाने के लिए फर्जी अंकसूची (मार्कशीट) पेश की।
  • स्कूल ने साफ कहा, ये दस्तावेज हमने जारी नहीं किए।
  • प्रशासन ने दोनों बच्चों की शादी रुकवाई और टेंट भी हटवाया।

बाल विवाह कैसे पकड़ा

25 अप्रैल को इंदौर के ग्राम रंगवासा में शादी होनी थी। हेल्पलाइन पर सूचना मिलते ही प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई। जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिन्हा ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद तुरंत जांच शुरू की गई।



टीम के पहुंचते ही परिवार ने दो अंकसूचियां दिखाईं। इनमें बताया गया कि लड़की और लड़के दोनों की उम्र शादी के लिए सही है। लेकिन अधिकारियों को शुरू से ही कुछ संदिग्ध लगा।



फर्जी मार्कशीट पकड़ी

जिला शिक्षा अधिकारी से डाक्यूमेंट्स का वेरिफिकेशन कराया गया। इंदौर वाले स्कूल ने साफ कह दिया कि यह मार्कशीट उन्होंने कभी जारी नहीं की। न ही ये बच्चे उस स्कूल में कभी पढ़े थे। होशंगाबाद की अंकसूची से सच्चाई सामने आई। उसमें लड़की की उम्र 13 साल और भाई की उम्र 19 साल दर्ज थी।



बेटी दो, बेटी लो की प्रथा बनी वजह

बता दें कि, जांच में पता चला कि परिवार एक पुरानी सामाजिक प्रथा का पालन कर रहा था। इसे 'बेटी दो, बेटी लो' की परंपरा कहते हैं। इस प्रथा में एक घर से लड़की देने के बदले दूसरे घर से लड़की ली जाती है।



परिवार के एक बुजुर्ग ने अपने पोते की शादी कराने के लिए यह रास्ता चुना। उसने अपनी 13 साल की पोती का रिश्ता 42 साल के व्यक्ति से तय कर दिया। यानी पोते की शादी के लिए पोती को दांव पर लगाया गया।



किसी के पास नहीं थे असली कागज

अधिकारियों ने मौके पर मेन डाक्यूमेंट्स मांगे। परिवार के किसी सदस्य के पास कागजात नहीं थे, सिर्फ मोबाइल में फोटो थीं। परिजनों ने कहा कि असली कागज समधी के पास हैं, लेकिन समधी भी कुछ नहीं दिखा सके। जब कानून की जानकारी दी गई तो परिवार ने शादी रोकने पर सहमति जताई। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत यह पूरी तरह गैरकानूनी है।



इंदौर से उज्जैन तक निगरानी

शादी का कार्यक्रम उज्जैन की चंद्रवंशी बागरी समाज धर्मशाला में रखा गया था। इसलिए उज्जैन प्रशासन को भी तुरंत सूचित किया गया। वहां भी निगरानी बढ़ा दी गई।



इसके अलावा सांवेर तहसील के ग्राम दयाखेड़ा में होने वाली एक और शादी की खबर मिली। यह 19 साल के लड़के की शादी थी। तहसीलदार पूनम तोमर ने उसे भी रुकवाया (बाल विवाह रुकवाया)।



टेंट उखड़ा, माफी लिखकर दी

रंगवासा में शादी की सारी तैयारी हो चुकी थी। मंडप सज गया था और साउंड सिस्टम (sound system) बज रहा था। टीम ने पहुंचते ही टेंट और साउंड वालों को कानून की जानकारी दी। कुछ ही देर में पूरा सामान हटा दिया गया।



शादी का न्योता (कार्ड) छापने वाले प्रिंटर को भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई। उसने लिखित माफीनामा दिया। इस पूरी कार्रवाई से साफ संदेश गया कि बाल विवाह में मदद करना भी अपराध है।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर(एमपी में बाल विवाह का मामला) कई वजहों से अहम है। भारत में बाल विवाह कानूनन (बाल विवाह निषेध कानून) अपराध है और यह बच्चों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। भारतीय संविधान हर बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान का अधिकार देता है।



13 साल की उम्र में शादी न सिर्फ एक बच्ची का बचपन छीनती है, बल्कि उसकी शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य को भी बर्बाद करती है। इस मामले में परिवार ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर कानून को धोखा देने की कोशिश की, जो एक गंभीर अपराध है।



यह खबर (इंदौर बाल विवाह) प्रशासन की सतर्कता और हेल्पलाइन की उपयोगिता को भी सामने रखती है। यह समाज को यह भी याद दिलाती है कि पुरानी सामाजिक प्रथाएं कानून से ऊपर नहीं हैं। डिजिटल युग में भी जागरूकता की जरूरत है ताकि ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग बढ़े और बच्चों को समय पर बचाया जा सके।



FAQ

  1. बाल विवाह में भारत में क्या सजा होती है?
    भारत में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 (Prohibition of Child Marriage Act, 2006) के तहत बाल विवाह कराने वाले को दो साल तक की जेल और एक लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। विवाह को शून्य घोषित किया जा सकता है। इसमें शामिल परिजन, पंडित, और शादी की व्यवस्था करने वाले भी दोषी माने जाते हैं।
  2. बेटी दो, बेटी लो प्रथा क्या है और क्या यह कानूनी है?
    यह एक पुरानी सामाजिक प्रथा है जिसमें एक परिवार किसी दूसरे परिवार को लड़की देने के बदले उनसे लड़की लेता है। इसे आटा-साटा भी कहते हैं। यह प्रथा मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ इलाकों में प्रचलित है। अगर इस प्रथा में नाबालिगों की शादी कराई जाए तो यह पूरी तरह गैरकानूनी है और बाल विवाह कानून के तहत सजा का प्रावधान है।
  3. बाल विवाह की शिकायत कहां और कैसे करें?
    बाल विवाह की सूचना चाइल्डलाइन (Childline) के नंबर 1098 पर दी जा सकती है। इसके अलावा स्थानीय पुलिस, तहसीलदार या जिला कार्यक्रम अधिकारी को भी सूचित किया जा सकता है। शिकायत गुमनाम भी दी जा सकती है। इंदौर के इस मामले में भी हेल्पलाइन पर मिली शिकायत के बाद ही प्रशासन ने समय पर कार्रवाई की।

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