इंदौर में स्कूल की जमीन पर बाउंड्रीवाल को लेकर बवाल, सैकड़ों जेन अल्फा छात्रों ने लात मारकर तोड़ी दीवार
स्कूल खुलते ही सैकड़ों जेन अल्फा छात्रों को इसकी जानकारी मिली और वे विरोध करने उतर आए। अब मामला पुलिस और प्रशासन तक पहुंच गया है।
तीन दिन की छुट्टी में बना दी नई बाउंड्रीवाल
मामला इंदौर जिले की देपालपुर तहसील के बेटमा का है। यहां शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। जानकारी के मुताबिक, स्कूल में तीन दिन का अवकाश था। इसी दौरान स्कूल के पड़ोस में रहने वाले जमीन मालिक ने नई बाउंड्रीवाल बना दी।
आरोप है कि जमीन मालिक ने पहले नगर परिषद की ओर से बनाई गई पुरानी बाउंड्रीवाल को तोड़ा। इसके बाद वहां नई दीवार खड़ी कर दी। मंगलवार को स्कूल खुला तो छात्र-छात्राओं की नजर नई दीवार पर पड़ी। इसके बाद स्कूल परिसर में विरोध शुरू हो गया।
सैकड़ों छात्रों ने मिलकर तोड़ दी दीवार
नई बाउंड्रीवाल देखकर छात्र-छात्राएं नाराज हो गए। बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौके पर जमा हो गए। इसके बाद छात्रों ने विरोध करते हुए नई बनी दीवार को तोड़ना शुरू कर दिया।
विद्यार्थियों ने हाथों और पैरों से दीवार वारकर गिरा दिया। इस घटना के बाद इलाके में हलचल बढ़ गई है। स्कूल की जमीन पर निर्माण और उसे तोड़ने का मामला विवाद का कारण बन गया है।
स्कूल प्रशासन ने दर्ज कराई एफआईआर
स्कूल प्रशासन ने भी इस मामले में पुलिस से शिकायत की है। प्रशासन का आरोप है कि स्कूल की जमीन पर बिना अधिकार के नई बाउंड्रीवाल का निर्माण किया गया है। साथ ही स्कूल में पहले से लगा गेट भी चोरी कर लिया गया है।
इन आरोपों को लेकर बेटमा थाने में FIR दर्ज कराई गई है। अब पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करेगी।
करणी सेना ने उठाए जमीन के नामांतरण पर सवाल
इस विवाद में करणी सेना भी सामने आई है। संगठन ने देपालपुर तहसीलदार को आवेदन सौंपकर जमीन के मालिकाना हक की जांच की मांग की है।
करणी सेना का आरोप है कि स्कूल के आसपास पहले से बनी बाउंड्रीवाल की जमीन पर कब्जा किया गया है। इसके बाद वहां नया निर्माण शुरू किया गया।
संगठन ने प्रशासन से कई जानकारियां मांगी हैं।
- विवादित जमीन का सर्वे नंबर क्या है?
- जमीन का Land Mutation यानी नामांतरण किसके नाम हुआ?
- नामांतरण किन दस्तावेजों के आधार पर किया गया?
- नई बाउंड्रीवाल बनाने की अनुमति किसने दी?
- क्या यह निर्माण नियमों के अनुसार हुआ है?
करणी सेना ने पूरे मामले की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
एसडीएम बोले जमीन पहले से निजी थी
इस पूरे विवाद पर देपालपुर एसडीएम चरणजीत सिंह हुड्डा का बयान भी सामने आया है। उन्होंने बताया कि विवादित जमीन शुरू से निजी रही है। पहले स्कूल को दो एकड़ जमीन दान में दी गई थी।
एसडीएम के मुताबिक, स्कूल के पड़ोसी जमीन मालिक ने पुरानी बाउंड्रीवाल तोड़कर नई दीवार बना दी थी। इसी बात से छात्र-छात्राएं नाराज हो गए और उन्होंने नई दीवार तोड़ दी।
उन्होंने बताया कि जमीन से जुड़े सभी दस्तावेज निकलवाए जा रहे हैं। इसके बाद मौके पर जाकर जांच की जाएगी।
अब जमीन के कागजों से साफ होगी स्थिति
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल विवादित जमीन के मालिकाना हक को लेकर है। स्कूल प्रशासन की शिकायत और करणी सेना के आरोपों के बीच एसडीएम ने विवादित जमीन को निजी बताया है।
ऐसे में प्रशासन की Land Records Verification यानी जमीन के दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि स्कूल और निजी जमीन की वास्तविक सीमाएं क्या हैं। साथ ही पुरानी बाउंड्रीवाल तोड़कर नई दीवार बनाने की वैधता भी जांच के दायरे में है।
अब देखना होगा कि प्रशासन की जांच में क्या सामने आता है और इस विवाद का समाधान कैसे होता है।