खातेगांव TI दिलीप पुरी की मौत पर सियासी घमासान: शराब तस्करी में कांग्रेस नेता का नाम आने से गरमाई राजनीति, BJP ने घेरा
भाजपा सवाल उठा रही है कि आखिर शराब के अवैध कारोबार को किसका संरक्षण मिल रहा है? वहीं राहुल जायसवाल ने आरोपों को खारिज करते हुए पूरे मामले से खुद को अलग बताया है। अब सवाल सिर्फ शराब तस्करी का नहीं, बल्कि यह भी है कि पुलिस अधिकारी की मौत के पीछे सक्रिय नेटवर्क में आखिर कौन-कौन शामिल है? इस बीच मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजी उपेंद्र जैन जांच की कमान संभालेंगे।
कांग्रेस के विधानसभा प्रभारी का नाम आने से बढ़ा विवाद
इस मामले में हरदा के शराब कारोबारी और लिकर कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राहुल जायसवाल का नाम सामने आया है। राहुल कांग्रेस से भी जुड़े हैं। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी ने उन्हें खातेगांव विधानसभा का प्रभारी नियुक्त किया था।
जांच के दौरान टिमरनी की एक शराब दुकान से उनके कथित कारोबारी संबंधों की बात सामने आई है। पुलिस ने रेडगांव टिमरनी वाइन शॉप के मैनेजर भूपेंद्र राणा को हिरासत में लिया है।
बताया जा रहा है कि भूपेंद्र ने पुलिस पूछताछ में दुकान में राहुल जायसवाल और उनके भाई मनीष जायसवाल की पार्टनरशिप होने की बात कही है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि और तस्करी में दोनों की किसी भूमिका का निर्धारण जांच के बाद ही हो सकेगा।
BJP का कांग्रेस पर हमला
राहुल जायसवाल का नाम सामने आने के बाद भाजपा ने इस मामले को राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और राहुल जायसवाल के संबंधों को लेकर सवाल उठाए हैं।
सुरेंद्र शर्मा ने कांग्रेस पर शराब माफियाओं को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। भाजपा के आरोपों के बाद इस मामले में राजनीतिक जवाबदेही का सवाल भी खड़ा हो गया है। हालांकि भाजपा के आरोपों से किसी व्यक्ति की आपराधिक संलिप्तता साबित नहीं होती। इसका फैसला पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।
राहुल जायसवाल की सफाई- मेरी कोई शराब दुकान नहीं
मामले में नाम सामने आने के बाद कांग्रेस नेता राहुल जायसवाल ने अपनी सफाई दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने शराब दुकान में अपनी हिस्सेदारी होने से इनकार किया है। राहुल का कहना है कि उनकी कोई शराब दुकान नहीं है। जिस दुकान का नाम सामने आ रहा है वह उनके रिश्तेदार पाटन जायसवाल की है। वहां भूपेंद्र सिंह राणा मैनेजर हैं।
उन्होंने कहा कि उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। उनका मुख्य कारोबार बसों और पेट्रोल पंप का है। ऐसे में पुलिस के सामने कथित तौर पर आई पार्टनरशिप की जानकारी और राहुल जायसवाल के इनकार के बीच अब जांच से ही स्थिति साफ हो सकेगी।
आयशर में बना था गुप्त कंपार्टमेंट
इस पूरे मामले में शराब तस्करी का तरीका भी सामने आया है। आबकारी निरीक्षक पूजा गेहलोत के मुताबिक, जब्त आयशर वाहन में शराब छिपाने के लिए नीचे की तरफ एक विशेष गुप्त कंपार्टमेंट बनाया गया था।
इसमें करीब 100 से 200 पेटियां शराब ले जाई जा रही थीं। शराब परिवहन का कोई वैध परमिट नहीं मिला है। आबकारी निरीक्षक के अनुसार नियमानुसार वैध परमिट होने पर उसका रिकॉर्ड आबकारी विभाग के पास रहता है। इस वाहन में ले जाई जा रही शराब के लिए ऐसा कोई परमिट मौजूद नहीं था।
जांच में यह भी सामने आया है कि आयशर वाहन खरगोन निवासी अकील कुरैली के नाम पर पंजीकृत है। अब पुलिस वाहन मालिक चालक और शराब की सप्लाई से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
शराब तस्करी रोकने पहुंचे थे TI
बता दें कि खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी अवैध शराब तस्करी की सूचना पर अपनी टीम के साथ इंदौर-बैतूल हाईवे पहुंचे थे। इसी दौरान संदिग्ध आयशर वाहन को रोकने की कार्रवाई की गई।
आरोप है कि चेकिंग के दौरान चालक ने वाहन आगे बढ़ा दिया और टीआई पुरी उसके पहिए की चपेट में आ गए। गंभीर रूप से घायल पुरी को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
अब जांच के घेरे में पूरा शराब नेटवर्क
टीआई की मौत के बाद जांच का दायरा सिर्फ वाहन चालक तक सीमित नहीं है। शराब कहां से लोड हुई, किसके लिए भेजी जा रही थी, वाहन में गुप्त कंपार्टमेंट किसने बनवाया और बिना परमिट शराब का परिवहन कैसे हो रहा था ये सभी सवाल अहम हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजी उपेंद्र जैन जांच की कमान संभालेंगे।
फिलहाल इस मामले में दो मोर्चों पर हलचल है। एक तरफ पुलिस शराब तस्करी के पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। वहीं दूसरी तरफ भाजपा ने कांग्रेस से जुड़े नेता का नाम सामने आने पर राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। राहुल जायसवाल आरोपों से इनकार कर रहे हैं।
अब देखना होगा कि जांच में शराब तस्करी के पीछे किन लोगों की भूमिका सामने आती है और टीआई दिलीप पुरी की मौत के मामले में किसकी जवाबदेही तय होती है।
धर्मपत्नी को SI पद पर अनुकंपा नियुक्ति
वहीं इस घटना पर सीएम मोहन यादव ने शोक जताया है। सीएम मोहन ने कहा कि वीर बलिदानी दिलीप पुरी वीर बलिदानी दिलीप पुरी की धर्मपत्नी को एसआई के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी। साथ ही सीएम ने परिवार को 1 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश भी दिए हैं।
ऐसे मामलों में कांग्रेस जुड़े लोगों के नाम बार-बार
इसके अलावा BJP Madhya Pradesh ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कांग्रेस पर निशाना साधा है।भाजपा का कहना है कि देवास के अवैध शराब मामले में कांग्रेस नेताओं से जुड़े नाम सामने आना गंभीर सवाल खड़े करता है। राहुल जायसवाल और उनके भाई मनीष जायसवाल की टिमरनी शराब दुकान में साझेदारी की जानकारी सामने आई है। दुकान के मैनेजर के बयान भी जांच का हिस्सा हैं। इससे पहले देवास के अवैध शराब प्रकरण में कांग्रेस प्रवक्ता आनंद कासलीवाल के पुत्र का नाम भी सामने आया था। आखिर बार-बार कांग्रेस नेताओं और उनसे जुड़े लोगों के नाम ऐसे मामलों में क्यों सामने आ रहे हैं?
पाटेन्द्र जायसवाल की शराब दुकानों के लाइसेंस निलंबित
इस मामले में हरदा कलेक्टर कुमार सत्यम ने लाइसेंसी पाटेन्द्र जायसवाल की टिमरनी स्थित तीन शराब दुकानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। इनमें सोडलपुर रोड, रहटगांव और हरदा रोड की दुकानें शामिल हैं।
साथ ही आबकारी आयुक्त ने टिमरनी के सहायक जिला आबकारी अधिकारी अमरसिंह बघेल और दो आरक्षकों अरुण कुमरे व कृष्णपाल सिंह डोडियार को भी निलंबित कर दिया है।