भागीरथपुरा कांड पर कमेटी के सामने IAS, महापौर यह बोले, सिसोनिया बोले- अंतरात्मा कुछ और कहती है
किसने कमेटी के सामने कैसे रखी अपनी बात
आईएएस मनीष सिंह, पूर्व निगमायुक्त
इन्होंने कमेटी से कहा कि मेरे कार्यकाल के दौरान भागीरथपुरा को लेकर कोई शिकायत या रिपोर्ट सामने नहीं आई थी। उन्होंने कहा कि यदि मानकों का पालन किए बिना लाइन डाली तो समस्या आ सकती है। आयुक्त मौके पर जाकर परीक्षण नहीं करते हैं। यह काम तकनीकी टीम करती है।
आईएएस आशीष सिंह, पूर्व निगमायुक्त
आईएएस आशीष सिंह ने कमेटी को बताया कि उनके समय भागीरथपुरा में दूषित पानी की कोई शिकायत सामने नहीं आई थी। पानी की गुणवत्ता को लेकर भी उनके पास कोई रिपोर्ट नहीं पहुंची थी। सीवरेज लाइन से जुड़ी शिकायत मिलने के बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
कमेटी ने उनसे पूछा कि क्या भागीरथपुरा की घटना में ऊपर से नीचे तक सभी की सामूहिक जिम्मेदारी बनती है। इस पर सिंह ने कहा कि उन्हें घटना से जुड़े पूरे तथ्य पता नहीं हैं, इसलिए वह इस बारे में कुछ नहीं कह सकते।
आईएएस प्रतिभा पाल, पूर्व निगमायुक्त
आईएएस प्रतिभा पाल ने कमेटी को बताया कि भागीरथपुरा में काम के लिए टेंडर मंजूर किए गए थे। उन्होंने कहा कि दो करोड़ रुपए तक के काम की मंजूरी अपर आयुक्त स्तर पर होती है। उनके कार्यकाल में किसी तरह की देरी नहीं हुई।
पाल ने यह भी कहा कि भागीरथपुरा की घटना उनके कार्यकाल की नहीं है, इसलिए उन्हें इसके पूरे तथ्य मालूम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल में व्यवस्थाओं को बेहतर करने की कोशिश की थी।
आईएएस क्षितिज सिंघल, निगमायुक्त इंदौर
आईएएस क्षितिज सिंघल ने कमेटी के सामने माना कि घटना के बाद आपात बैठक बुलाने का कोई लिखित रिकॉर्ड नहीं है। घटना के बाद 31 पानी के सैंपल लिए गए थे, जिनमें 25 फेल पाए गए।
उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित काम पूरा करने में देरी हुई। ठेकेदार को एक साल में काम पूरा करना था, लेकिन समय पर काम नहीं हुआ। इसके बावजूद ठेकेदार पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। देरी क्यों हुई, इसका कारण भी स्पष्ट नहीं है।
सिंघल ने माना कि सीवर और पानी की लाइन पास-पास होना गलत है। उन्होंने यह भी बताया कि 30 और 31 दिसंबर को 73 सैंपल लिए गए थे। इनमें से 55 सैंपल फेल हुए और 39 में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए।
आईएएस हर्षिका सिंह, पूर्व निगमायुक्त
आईएएस हर्षिका सिंह ने कमेटी को बताया कि भागीरथपुरा को लेकर शिकायतें मिली थीं। उन्होंने कहा कि पेयजल से जुड़ी समस्याओं को प्राथमिकता से दूर करने की कोशिश की गई थी और इसके लिए प्रभावी कदम भी उठाए गए थे।
बिना सत्यापन टैंकरों को भुगतान किए जाने की बात पर उन्होंने इसे गलत बताया। कमेटी ने पूछा कि क्या इस घटना से नगर निगम की छवि धूमिल हुई है। इस पर सिंह ने कहा कि यह बात सही है।
उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक परिस्थितियां कठिन होने के बावजूद पेयजल से जुड़े भुगतान किए गए और जरूरी काम पूरे कराने की कोशिश की गई।
आईएएस शिवम वर्मा, पूर्व निगमायुक्त
आईएएस शिवम वर्मा ने बताया कि समय पर टेंडर प्रक्रिया की गई थी। दूषित पानी को लेकर कोई गंभीर रिपोर्ट या शिकायत नहीं आई थी। लगातार मॉनिटरिंग की जा रही थी। टेंडर प्रक्रिया में कमेटी और अपर आयुक्त स्तर पर देखा जाता है।
आईएएस दिलीप यादव, पूर्व निगमायुक्त
आईएएस दिलीप यादव ने कमेटी को बताया कि उन्हें घटना की जानकारी 29 दिसंबर को मिली थी। इससे पहले दूषित पानी को लेकर कोई रिपोर्ट उनके पास नहीं आई थी।
उन्होंने कहा कि संबंधित काम अपर आयुक्त को सौंपे गए थे, इसलिए इसकी फाइल उनके पास नहीं आई। घटना के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की गई। जोनल अधिकारी और सहायक यंत्री को सस्पेंड किया गया, जबकि उपयंत्री को हटा दिया गया।
यादव ने कहा कि निगमायुक्त के रूप में उनका कार्यकाल काफी कम रहा। उन्होंने अपने कार्यकाल में पूरी निष्ठा के साथ काम करने की बात कही।
आईएएस रोहित सिसोनिया, पूर्व अपर आयुक्त
आईएएस रोहित सिसोनिया ने कमेटी को बताया कि कार्यपालन इंजीनियर और अन्य अधिकारी प्रशासनिक रूप से आयुक्त के प्रति जिम्मेदार थे, उनके प्रति नहीं। उन्होंने कहा कि घटना की जानकारी मिलते ही तेजी से कार्रवाई की गई। दूषित पानी की शिकायतों पर भी तुरंत कदम उठाए गए।
सिसोनिया ने कहा कि उनकी अंतरात्मा मानती है कि दूषित पानी के पीछे कोई दूसरा कारण भी हो सकता है। उन्होंने आसपास मौजूद उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट की संभावना भी जताई। उनके मुताबिक इस पहलू की भी जांच होनी चाहिए।
आईएएस परीक्षित झाड़े, सीईओ आईडीए
इनसे कमेटी ने आईडीए द्वारा वहां किए गए सीवर लाइन बिछाने के काम की जानकारी मांगी जो 1990 से 95 में हुए। इनके रिकॉर्ड नहीं मिले हैं।
आईएएस सिद्धार्थ जैन- पूर्व अपर आयुक्त
आईएएस सिद्धार्थ जैन ने कमेटी के ज्यादातर सवालों पर पहले कहा कि रिकॉर्ड देखने के बाद ही जवाब दे पाएंगे। इसके बाद कमेटी ने उन्हें दोबारा बुलाया।
दोबारा पेश होने पर जैन ने कहा कि उनके पास वाटर सप्लाई का काम नहीं था, इसलिए भागीरथपुरा से जुड़े मामले की जानकारी उन्हें नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकता है।
आईएएस अभिषेक गेहलोत, पूर्व अपर आयुक्त
आईएएस अभिषेक गेहलोत ने कमेटी को बताया कि उनके कार्यकाल में मेयर हेल्पलाइन पर 31 शिकायतें मिली थीं। इसी दौरान करीब 2.65 करोड़ रुपए के काम की मंजूरी भी दी गई थी।
उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा में मेंटेनेंस के लिए कोई लिखित आदेश जारी नहीं किए गए थे। निर्देश मौखिक रूप से दिए गए थे। उनके कार्यकाल में किसी अधिकारी, कर्मचारी या ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं हुई।
गेहलोत ने यह भी माना कि अगर समय रहते लाइन की मरम्मत और सुधार हो जाता, तो घटना को रोका जा सकता था।
आईएएस भव्या मित्तल, पूर्व निगमायुक्त
आईएएस भव्या मित्तल ने कहा कि भागीरथपुरा में तीन काम मेरे समय में मंजूर हुए थे। भागीरथपुरा में स्थिति सुधार के लिए अनुशंसा/सुझाव दिए थे जिसमें ढाई करोड़ के काम का अनुमान था।
आईएएस अभिलाष मिश्रा, पूर्व अपर आयुक्त
आईएएस अभिलाष मिश्रा ने कमेटी को बताया कि उनके कार्यकाल में संयुक्त निरीक्षण कराया गया था। जर्जर पाइपलाइन बदलने का काम भी चल रहा था। इस दौरान गंदे पानी की शिकायतें मिली थीं और पानी की गुणवत्ता की जांच भी कराई गई थी।
उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा में प्रभावी कार्रवाई नहीं होने की बात सही नहीं है। उनके मुताबिक वहां जरूरी कार्रवाई की गई थी।
कमेटी ने पूछा कि क्या यह घटना प्रशासनिक लापरवाही, तकनीकी विफलता और विभागों के बीच समन्वय की कमी का नतीजा थी। इस पर मिश्रा ने कहा कि उनके विचार में ऐसा नहीं था।
संजीव श्रीवास्तव, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर
इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव ने कमेटी को बताया कि 24 अक्टूबर 2025 को क्षेत्र से गंदे पानी की शिकायत मिली थी। इसके बाद उन्होंने सब इंजीनियर और सहायक इंजीनियर को जरूरी निर्देश दिए थे। शिकायत का समाधान होने और संतुष्टि मिलने के बाद उसे बंद कर दिया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र के आसपास औद्योगिक इकाइयां मौजूद हैं। ऐसे में हानिकारक केमिकल सीवरेज के जरिए पेयजल में मिलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि आसपास लघु उद्योग भी हैं, जहां से अपशिष्ट निकलता है।
बता दें कि इस मामले में आईएएस संतोष टैगोर और आशीष पाठक के बयान भी दर्ज किए गए हैं। दोनों प्रमोटी आईएएस अधिकारी हैं।
महापौर, पार्षद यह बोले
महापौर पुष्यमित्र भार्गव
पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि नागरिकों को जलापूर्ति और दूसरी सुविधाएं देना नगर निगम की जिम्मेदारी है। उन्हें घटना की जानकारी 29 दिसंबर की सुबह मिली थी। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को तुरंत जानकारी देकर कार्रवाई शुरू कराई गई।
उन्होंने बताया कि एमआईसी ने नवंबर 2022 में भागीरथपुरा में काम की मंजूरी दी थी। पार्षद वाघेला ने फरवरी 2024 में भी समस्या बताई थी, जिसके बाद टेंडर मंजूर किए गए।
भार्गव ने कहा कि घटना का उन्हें दुख है। घटना के बाद उन्होंने तत्कालीन निगमायुक्त दिलीप यादव से बात की और उच्च स्तरीय जांच कराने को कहा। संबंधित लोगों पर कार्रवाई भी की गई।
कमेटी ने पूछा कि क्या अधिकारी महापौर की बात सुनते हैं। इस पर भार्गव ने कहा कि हां, अधिकारी उनकी बात सुनते हैं।
पार्षद कमल वाघेला
कमल वाघेला ने बताया कि चुनाव के बाद 2022 में ही दूषित पानी की शिकायतों की जानकारी मिल गई थी। उन्होंने कहा कि फरवरी 2024 में एक बच्ची को उल्टी-दस्त हुए थे। इसके बाद पता चला कि इलाके में दूषित पानी आ रहा है।
वाघेला के मुताबिक उन्होंने इस संबंध में पत्र भी लिखे थे। इसके बाद महापौर और अधिकारियों ने इलाके का दौरा किया। फिर पाइपलाइन बदलने के काम के आदेश दिए गए।
वाघेला ने यह भी कहा कि सरकार प्रभावित परिवारों को कम से कम पांच लाख रुपए मुआवजा दे।