भागीरथपुरा कांड में केमिकल मिलाने की साजिश पर जांच ही नहीं हुई, इतने सारे बयान थे मौजूद

Sanjay Gupta | Oct 05, 2026, 13:01 IST
भागीरथपुरा कांड की जांच रिपोर्ट पर उठे सवाल।
Indore. इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 36 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में जांच आयोग की रिपोर्ट हाईकोर्ट पहुंच चुकी है। इस पर सोमवार यानी आज सुनवाई हो सकती है। खास बात यह है कि रिपोर्ट में पानी में केमिकल मिलाने की साजिश की जांच का जिक्र सामने नहीं आया है।
Thirty-six people died contaminated water Indore Bhagirathpura. inquiry commission report matter reached High Court, hearing could place today (Monday). Notably, report makes mention investigation conspiracy mix chemicals water.

बता दें कि दिसंबर 2025 में सामने आई इंदौर के वार्ड 11 भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता ने जांच रिपोर्ट दी है। यह सार्वजनिक हो चुकी है, लेकिन इसमें एक बड़ा सवाल अधूरा ही रहा है। तत्कालीन अपर आयुक्त आईएएस रोहित सिसोनिया से लेकर रिटायर्ड पीएचई एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और प्रोफेसर ने बयान दिए कि दूषित पानी कांड के अलग कारण हो सकते हैं। इसमें साजिश की आशंका जताई गई। लेकिन इस बिंदु पर पूरी रिपोर्ट में कभी भी विस्तृत जांच की बात नहीं आई है।



इन सभी ने जताई साजिश की आशंका

आईएएस रोहित सिसोनिया-

तत्कालीन अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया ने जांच कमीशन से कहा कि मेरी अंतरात्मा कहती है कि दूषित जल होने के अन्य कारण भी हो सकते हैं। यहां लघु उद्योग हैं और उनसे निकलने वाले तरल अपशिष्ट भी एक कारण हो सकते हैं।



आईएएस रोहित सिसोनिया​ का बयान

संतोष श्रीवास्तव, रिटायर्ड पीएचई एग्जीक्यूटिव इंजीनियर-

इन्होंने कमेटी से कहा कि मैंने अपने जीवनकाल में दूषित पानी से मौत होना नहीं देखा है। एक-दो मौत हुई तो बात अलग है। लेकिन 35 मौत होना अजीब है। यह एक षड़यंत्र लगता है, कहीं कोई विषैला केमिकल इसमें मिलाया गया है। या किसी के घर में केमिकल रखा हो और किसी कारण से लीकेज होकर वाटर सप्लाई में मिल गया हो। दूषित पानी से उल्टी, दस्त और लोग बीमार होते हैं लेकिन मौत, वह भी इतनी होना अजीब है। यह एक षड़यंत्र ज्यादा लगता है।



रिटायर्ड पीएचई एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संतोष श्रीवास्तव का बयान

राकेश यादव, बीजेपी प्रवक्ता-

पहले कांग्रेस में रहे और अभी बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता राकेश यादव ने कमेटी से कहा कि इसमें केमिकल मिलाने की आशंका है। फॉस्फोरस, पोटेशियम क्लोराइड या पोटेशियम परमैंगनेट मिलाया जा सकता है। कर्मचारियों ने पार्षद (कमल वाघेला) के कहने पर यह मिलाया है।



राकेश यादव, बीजेपी प्रवक्ता का बयान

अतुल भरत, प्रोफेसर-

यहां पर औद्योगिक तरल अपशिष्ट आ रहा है। एक दिन नर्मदा से और एक दिन बोरिंग से पानी आता है। बोरिंग सप्लाई में यह अपशिष्ट आ सकते हैं।



प्रोफेसर अतुल भारत का बयान

अजय बागड़िया, वरिष्ठ अधिवक्ता-

इन्होंने हाईकोर्ट में जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान केमिकल मिलाने की साजिश की आशंका जताई थी।



प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने ऐसे झाड़ा पल्ला

इस मामले में प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के सतीश चौकसे से भी कमेटी ने बयान लिए। इसमें उद्योगों से अपशिष्ट निकलने और उनकी जांच करने की बात पूछी गई। इसमें उन्होंने माना कि भागीरथपुरा में नौ उद्योग लगे हैं। इसमें दो इंजीनियरिंग यूनिट और सात कपड़े धोने व अगरबत्ती के उद्योग हैं। लेकिन यहां से कोई अपशिष्ट निकलने और पानी दूषित करने की बात को नकार दिया।



यह भी कहा कि यहां पर तीन बार उद्योगों को नोटिस दिए गए थे। यहां सभी उद्योगों में ईटीपी लगी होने की बात कही गई। साथ ही अपने विभाग को पूरी तरह क्लीन चिट देते हुए चौकसे ने कहा कि यहां लगातार निगरानी रखी जाती है, कभी उद्योगों से गलत निस्तारण नहीं पाया गया। हालांकि चौकसे ने कहा कि यहां अवैध उद्योग नहीं हैं और तीन उद्योगों को पहले साल 2024 में बंद कराया जा चुका है।



क्या बोले थे उमंग सिंघार

इस मामले में विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दो अक्टूबर को इंदौर में कहा था कि पोटेशियम क्लोराइड अधिक मात्रा में पार्षद द्वारा मिलवाने की बात आई है। लेकिन कमेटी ने इसकी जांच नहीं की। कारण है कि कमेटी पर सरकार का दबाव था कि उनके महापौर, पार्षद, मंत्री सभी को बचाया जाए। इसलिए केवल दो अधिकारियों पर जिम्मेदारी डाली गई।



कमेटी ने दूषित पानी के लिए यह कारण माना

कमेटी ने मुख्य तौर पर माना कि सालों की सिस्टम की लापरवाही और प्रशासनिक विफलता के कारण यह घटना हुई। यहां पर सीवरेज व पानी की लाइन पास-पास हैं और मानकों के विपरीत बिछी हैं। कई जगह लाइन सड़ गई। पुलिस चौकी के सेप्टिक टैंक से भी लीकेज था। इन सभी के चलते वाटर सप्लाई लाइन में दूषित सीवरेज मिला और इस कारण पानी दूषित हुआ, जिसके कारण यह घटना हुई।

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