भागीरथपुरा कांड के जिम्मेदार तय, जांच आयोग की 600 पन्नों की रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश
इंदौर के अभी तक के शर्मनाक भागीरथपुरा दूषित पानी कांड (bhagirathpura indore news) की जांच पूरी हो गई है। हाईकोर्ट डबल बेंच ने 27 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया था। जांच आयोग ने इंदौर नगर निगम, आईडीए, प्रशासन,इंदौर स्वास्थ्य विभाग सभी से दस्तावेज लेने और खुले तौर पर आमजन से लिखित बयान बुलाने के बाद यह रिपोर्ट बनाई है।
सीलबंद लिफाफे में 600 पन्नों की रिपोर्ट
द सूत्र को सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार रिपोर्ट 600 पन्नों से ज्यादा की है। इसे हाईकोर्ट इंदौर में जमा करा दिया गया है। इस मामले में सुनवाई की संभावित तारीख 25 अगस्त को है। ऐसे में यह एमपी हाईकोर्ट की बेंच ही तय करेगी कि यह रिपोर्ट कब, कैसे ओपन होगी और कब इसकी कॉपी उपलब्ध कराई जाएगी। यह रिपोर्ट पूरी तरह से सीलबंद है।
गोपनीय तरीके से कमेटी ने बनाई रिपोर्ट
सूत्रों के मुताबिक, इस मामले की जांच को पूरी तरह गोपनीय रखा गया है, क्योंकि मामला संवेदनशील है। जांच में आईएएस अधिकारियों से लेकर नगर निगम के कई अधिकारियों, स्थानीय पार्षद कमल वाघेला और निचले स्तर के कर्मचारियों की भूमिका की जांच की गई है।
वहीं, मप्र सरकार ने अभी तक इन मौतों को दूषित पानी (indore bhagirathpura) से मानकर मुआवजा राशि नहीं दी है।। फिलहाल रेडक्रॉस की ओर से इलाज के लिए दो लाख रुपए की मदद दी गई है। अब मुआवजे की राशि तय होना बाकी है।
दो IAS की स्थिति भी जांच रिपोर्ट पर निर्भर
इस रिपोर्ट से ही दो आईएएस की आगे की स्थिति तय होगी। तत्कालीन निगमायुक्त 2014 बैच के आईएएस दिलीप यादव और साल 2017 बैच के आईएएस व तत्कालीन अपर आयुक्त निगम रोहित सिसोनिया, दोनों को लेकर भी रिपोर्ट काफी अहम है। इसके साथ ही कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव, पार्षद वाघेला इन सभी पर रिपोर्ट में क्या है, इस पर नजरें रहेंगी। आईएएस रोहित सिसोनिया
जांच कमेटी ने इन मुद्दों पर की है जांच
- जल दूषित होने का कारण, क्या भागीरथपुरा में दिया गया जल दूषित था।
- दूषित होने का स्रोत और प्रकृति (सीवेज का प्रवेश, औद्योगिक कारण, पाइपलाइन क्षति या अन्य)।
- दूषित पानी के कारण वास्तविक मृत्यु की संख्या।
- दूषित पानी से क्या बीमारी हुई।
- भागीरथपुरा जल संदूषण घटना के लिए प्रथम दृष्टया जिम्मेदार पाए गए अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान करना और उन पर जिम्मेदारी तय करना।
- प्रभावितों के मुआवजा राशि को लेकर।
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