इंदौर भागीरथपुरा कांड: मौतों पर बोले सीएम, सरकार हर परिवार के साथ

Sanjay Gupta | Jan 07, 2026, 21:05 IST
Photograph: (the sootr)
इंदौर के भागीरथपुरा में मौतों की संख्या पर विवाद जारी है। इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आंकड़ों की परवाह किए बिना सरकार हर परिवार के साथ है।

Indore. इंदौर के भागीरथपुरा में मौतों को लेकर असमंजस छाया हुआ है। प्रशासन अभी तक 6 की मौत मान रहा है लेकिन मुआवजा लिस्ट में 18 नाम है। लेकिन मौतों का आंकड़ा उधर 20 को छू गया है। वहीं हाईकोर्ट में मौत चार बताई गई है। इस पूरे मामले में भोपाल में सीएम डॉ. मोहन यादव से भी सवाल हुआ।



सीएम से यह पूछा गया सवाल

भोपाल में जी राम जी योजना को लेकर बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस हुई। इसमें सीएम डॉ. मोहन यादव के साथ ही बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, मंत्री प्रह्लालाद पटेल व अन्य शामिल थे। इसमें सवाल हुआ कि इंदौर के गंदे पानी की घटना में प्रशासन 6 की मौत मान रहा है, मुआवजा 18 को दिया गया है। इसे हम क्या माने।



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सीएम ने यह दिया जवाब

इस पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने जवाब दिया कि- बात गिनती की नहीं है, एक भी व्यक्ति की जान जाना कष्ट का विषय है। इसलिए आंकड़ें में नहीं पड़ रहे हैं, प्रशासन की दृष्टि से तरीका होता जिन्होंने पीएम कराया, उनका आंकड़ा कुछ था। लेकिम हमने कहा कोई बात नहीं। जब कोई दुखद घटना होती है तो उसका निगम में पंजीयन होता है। जो वहां के लोग चाहेंगे राहत की बात आएगी तो आंकड़े की जगह सरकार हम सभी के साथ है।



कलेक्टर ने क्या कहा

वहीं कलेक्टर शिवम वर्मा ने इसे लेकर बुधवार को मीडिया से चर्चा में कहा कि- दुखद मृत्यु को जो समचाार होते हैं, ऐसे में तत्काल राहत मिलना चाहिए, इसलिए सीएम के निर्देश पर उन्हें राहत राशि दी जा रही है। सभी को दो-दो लाख रुपए की राशि तत्काल दी जा रही है। अभी ऐसे दुखद परिवार में 18 को यह राशि दी गई है। वहीं घटना में मौत के लिए डॉक्टर की रिपोर्ट पर ही उसे औपचारिक डेथ मानी जाती है, इसके लिए अभी रिपोर्ट का इंतजार है।



महापौर बोल चुके 6 मौत, पार्षद 15, ऐसे हो रही 20

महापौर पुष्यमित्र भार्गव दो दिन पहले 6 मौत की बात कह चुके हैं। पार्षद कमल वाघेला 15 मौत की बात कह चुके हैं। उधर प्रशासन की मुआवजा सूची में रामकली जगदीश और श्रवण दो नए नाम है, जो बताई जा रही 18 मौतों के सिवा है। इससे इन मौतों का आंकड़ा 20 तक पहुंच रहा है।



हाईकोर्ट कह चुका हेल्थ इमरजेंसी

इस पूरे मामले में जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान 6 जनवरी को हाईकोर्ट इंदौर ने इसे हेल्थ इमरजेंसी माना। साथ ही कहा कि यह स्वच्छ शहर में धब्बा है। मौतों के आंकड़े की स्थिति साफ नहीं होने पर भी इसे गंभीर लापरवाही और शासन की असंवेदनशीलता माना गया।



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डैथ आडिट की अभी तक रिपोर्ट नहीं

वहीं इस मामले में अभी भी हैल्थ टीम डैथ आडिट ही कर रही है। इसके लिए पांच सदस्यीय टीम काम कर रही है। इसमें एसोसिएट प्रोफेसर संजय दुबे, अखिलेख सिंह, सूरज सिरोही, धर्मांशु चौबे, और सुनील सोनी शामिल है। लेकिन अभी तक कमेटी ने रिपोर्ट नहीं दी है। हालांकि सूत्रों के अनुसार कमेटी सोमवार तक 14 मौतों को डायरिया से मौत मान चुकी थी लेकिन अभी औपचारिक रिपोर्ट बाकी है।



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