12 साल बाद मथुरावाला की बिल्डिंग पर चला बुलडोजर, हाईकोर्ट आदेश के बाद हुई कार्रवाई

Sanjay Gupta | Oct 02, 2026, 12:29 IST
इंदौर में सबसे सघन एरिया छावनी में रोड चौड़ीकरण की एक बड़ी बाधा हाईकोर्ट इंदौर के आदेश के बाद हटाई गई।
इंदौर के छावनी इलाके में रोड चौड़ीकरण की बड़ी बाधा आखिर 12 साल बाद हट गई। हाईकोर्ट इंदौर के आदेश के बाद इंदौर नगर निगम ने बीजेपी नेता और दुग्ध विक्रेता संघ अध्यक्ष भरत मथुरावाला की बिल्डिंग के बाधक हिस्से पर बुलडोजर चलाया। सबसे पहले मथुरावाला को भवन तोड़ने का आदेश साल 2014 में तत्कालीन कलेक्टर आकाश त्रिपाठी के समय दिया गया था। लेकिन तब मामला रुक गया था।

सुबह यह बाधक हिस्सा हटाया

सुबह निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के आदेश पर अपर आयुक्त आकाश सिंह व प्रखर सिंह के साथ इंदौर नगर निगम की रिमूवल टीम पहुंची। यहां पर बाधक हिस्सा चार मीटर बाय 20 मीटर और साढ़े तीन मीटर बाय 30 मीटर का हिस्सा हटाने की कार्रवाई की गई। इसके लिए सात अप्रैल को ही एमएमबी होटल मल्टी (मथुरावाला की मल्टी) को नोटिस जारी हुए थे।



हाईकोर्ट में क्या हुआ?

निगम द्वारा 7 अप्रैल को बिल्डिंग ऑफिसर जोन 11 से जारी नोटिस के खिलाफ एमएमबी होटल ने याचिका दायर की थी। इसमें सुनवाई 8 सितंबर को पूरी हुई और फिर एक अक्टूबर को आदेश जारी हुआ। इसमें याचिका को खारिज कर दिया गया। साथ ही निगम की कार्रवाई को कानूनी तौर पर सही पाया।



क्या था होटल का तर्क?

इसमें एमएमबी होटल का तर्क था कि उनका भवन नियमानुसार बना है और इसकी मंजूरी 1987 में थी। तब इस रोड की चौड़ाई 18 मीटर थी, जिसे अब 24 मीटर किया जा रहा है। उनकी वैध मंजूरी है और निगम ने नोटिस गलत दिया है। यह भी कहा कि सेंट्रल लाइन गलत है। मास्टर प्लान 2021 की समयसीमा खत्म होने की बात भी कही गई।



इस पर निगम की ओर से यह तर्क दिए गए

इस पर निगम की ओर से बताया गया कि मास्टर प्लान में चौड़ाई 24 मीटर शुरू से है। जब 1990 में रोड को 18 मीटर मानकर दिया गया, तब यह सघन एरिया नहीं था। सेंट्रल लाइन भी मास्टर प्लान में ही तय है। इसे डालने में सभी विभागों ने मिलकर काम किया है। रही बात मास्टर प्लान 2021 की समयसीमा खत्म होने की, तो ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। मास्टर प्लान तब तक लागू होता है, जब तक कि अगला नहीं आ जाता है। पूरी प्रक्रिया नियमानुसार की गई है। नोटिस वैध है।



पहले 2014 में बच गई थी मल्टी

साल 2014 में भी रोड की चौड़ाई बढ़ाने की कार्रवाई हुई थी। तब तत्कालीन कलेक्टर आकाश त्रिपाठी की मुहिम के तहत काम हुआ था। लेकिन इस मल्टी को स्टे मिल गया था, जिससे बाधक हिस्सा नहीं हटा। बाद में कार्रवाई ठंडी हो गई। लेकिन अप्रैल में फिर रोड को 24 मीटर करने का काम हुआ। इसके तहत कई लोगों ने खुद बाधक हिस्से हटाए। लेकिन एमएमबी होटल ने नहीं हटाए। इसके बाद मामला हाईकोर्ट गया और यहां फैसला आने के 12 घंटे के भीतर ही निगम ने बुलडोजर चला दिया, ताकि अगली याचिका नहीं लग सके।



FAQ

  1. एमएमबी होटल के खिलाफ निगम ने क्यों कार्रवाई की?
    निगम ने एमएमबी होटल के निर्माण में अवैध हिस्से को हटाने की कार्रवाई की, क्योंकि होटल ने निगम द्वारा जारी नोटिस का पालन नहीं किया और इससे सड़क की चौड़ाई बढ़ाने में बाधा उत्पन्न हो रही थी।
  2. हाईकोर्ट के फैसले में क्या कहा गया है?
    हाईकोर्ट ने एमएमबी होटल की याचिका को खारिज करते हुए निगम की कार्रवाई को कानूनी रूप से सही ठहराया।
  3. एमएमबी होटल का तर्क क्या था?
    एमएमबी होटल का तर्क था कि उनका भवन नियमानुसार बना है और 1987 में मिली मंजूरी के अनुसार सही था, लेकिन निगम ने उनके तर्कों को नकारते हुए बताया कि मास्टर प्लान में सड़क की चौड़ाई 24 मीटर निर्धारित है।
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