BJP की लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा पर घमासान: भीड़ जुटाने के टारगेट से चूके विधायक, 1 लाख लोगों को लाने का था लक्ष्य

Sanjay Gupta | Oct 30, 2026, 21:49 IST
इंदौर में बीजेपी की लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय समेत कई नेता शामिल हुए।
BJP's Loktantra Bachao Padyatra in Indore saw the participation of CM Mohan Yadav and Kailash Vijayvargiya, amid reports of internal differences over crowd mobilisation.
इंदौर में बीजेपी की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा को लेकर पार्टी के अंदर ही घमासान मच गया है। पदयात्रा में एक लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं पहुंची। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय लोगों को जुटाने में लगे रहे, जबकि कई विधायक अपना टारगेट पूरा नहीं कर पाए। अब इसकी अंदरूनी रिपोर्ट भोपाल पहुंच गई है।

विधायकों को दिया था दस-दस हजार लोगों का लक्ष्य

इंदौर शहर में मुख्य तौर पर 6 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इनमें इंदौर विधानसभा एक, दो, तीन, चार, पांच और राऊ शामिल हैं। साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में सांवेर और देपालपुर भी आते हैं। महू विधानसभा वैसे तो इंदौर जिले में है, लेकिन यह धार संसदीय क्षेत्र में आती है। हर विधायक को दस-दस हजार लोग लाने का लक्ष्य दिया गया था। इसके साथ ही सांसद, महापौर और पार्टी के अन्य पदाधिकारियों को भी भीड़ जुटाने के लिए कहा गया था।



लेकिन असल में हुआ क्या

इस आयोजन में मुख्य तौर पर विधानसभा एक और दो से ही ज्यादा लोग पहुंचे। इसकी वजह भी थी कि आयोजन की पूरी कमान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय संभाल रहे थे। ऐसे में वे अपने समर्थकों को लेकर आए। साथ ही उनके करीबी इंदौर विधानसभा दो के विधायक रमेश मेंदोला भी लोगों को लेकर पहुंचे।



महापौर पुष्यमित्र भार्गव जेन जी और अधिवक्ताओं के साथ अपने कोटे की भीड़ लेकर पहुंचे। विधायक मधु वर्मा भी ठीक संख्या में लोगों को लेकर पहुंचे थे। लेकिन इंदौर विधानसभा चार की विधायक मालिनी गौड़ और विधानसभा पांच के विधायक महेंद्र हार्डिया की ओर से वैसी भीड़ नहीं जुटी।



विधानसभा तीन के विधायक गोलू शुक्ला की ओर से भी वैसी भीड़ नहीं थी। इसका कारण यह है कि उनके अधिकांश समर्थक अभी भी इंदौर विधानसभा एक क्षेत्र के ही हैं, जो पहले से ही मंत्री गुट की ओर से शामिल थे। वहीं, मंत्री तुलसी सिलावट के समर्थक भी कुछ लोगों को लेकर पहुंचे थे।



इंदौर में बीजेपी की लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा में शामिल लोग।

पदयात्रा से पहले हुईं लगातार बैठकें

इस पदयात्रा से पहले करीब सप्ताह भर तक पार्टी पदाधिकारी तैयारियों में लगे रहे। खासकर नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा ने बैठकें आयोजित कीं और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सभी से अलग-अलग मुलाकात की। सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संगठनों के साथ अलग-अलग बैठकें की गईं।



पदयात्रा दो नंबर में थी, इसलिए भी बनाई दूरी

इसका एक बड़ा कारण यह भी बताया जा रहा है कि पदयात्रा का पूरा क्षेत्र इंदौर विधानसभा दो में था, जो मंत्री गुट का क्षेत्र है। ऐसे में अन्य नेताओं ने दूरी बनाए रखी।



क्योंकि सभी को राजनीतिक रूप से इसमें शामिल होने का ज्यादा फायदा नहीं दिखा। उन्हें लगा कि इसका श्रेय मंत्री विजयवर्गीय गुट को ही मिलेगा। ऐसे में पार्टी का आयोजन होने के बावजूद राजनीतिक दूरी बनी रही।



इंदौर में बीजेपी की लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा में शामिल लोगों की भीड़।

इसलिए मंत्री कर रहे थे जल्दी

मंच पर मंत्री विजयवर्गीय लगातार पदयात्रा जल्द शुरू करने का आग्रह करते रहे। क्योंकि लोग सुबह दस बजे से आ गए थे और भीड़ छंटने की आशंका थी। लेकिन सीएम डॉ. मोहन यादव के अन्य कार्यक्रम में व्यस्त होने के कारण देरी हुई।



इस पर मंत्री ने मंच से कहा कि मैंने केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया जी से मंजूरी ले ली है और अब हम पदयात्रा शुरू करते हैं। इसी दौरान सीएम पहुंच गए और पदयात्रा में शामिल हुए। वे पूरी यात्रा में पैदल चले।



विजयवर्गीय आगे चलकर पूरी पदयात्रा की कमान संभाले रहे। बाद में पदयात्रा के समापन पर सभा हुई, जिसे सीएम ने संबोधित किया।



इधर कांग्रेस ने कसा तंज

उधर, कांग्रेस ने पदयात्रा को फ्लॉप बताया। कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने कॉलेज के स्टाफ और छात्रों को बुलाने के आदेश की आलोचना की। साथ ही आदेश जारी करने वाली एडिशनल डायरेक्टर एजुकेशन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।



मिश्रा ने कहा कि सांसद, दो मंत्री, नौ विधायक और महापौर सभी बीजेपी के होने के बावजूद भीड़ जुटाने के लिए कॉलेजों को पत्र लिखने पड़ रहे हैं।

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