इंदौर के विधायक अधिकारियों से दुखी, बोले-सुनते नहीं हैं, अब एकजुट होकर सीएम से करेंगे बात
INDORE. इंदौर के बीजेपी विधायक और जनप्रतिनिधि अधिकारियों की कार्यप्रणाली से परेशान हैं। उनकी शिकायत है कि अधिकारी उनकी सुनते नहीं हैं, जिससे शहर का विकास प्रभावित हो रहा है। यह मुद्दा गुरुवार शाम (26 मार्च) को बीजेपी दफ्तर में हुई इंदौर कोर कमेटी की बैठक में उठा।
बैठक में सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, इंदौर बीजेपी नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा और विधायक मधु वर्मा, महेंद्र हार्डिया, गोलू शुक्ला समेत कई नेता मौजूद थे।
सभी ने मिलकर ये तय किया कि इस मामले पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से बात करेंगे। मुख्यमंत्री 29 मार्च को इंदौर आ रहे हैं। इस दौरान वे नगर निगम के विकास कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। तब ही उन्हें इस स्थिति के बारे में जानकारी दी जाएगी।
क्या बोले विधायक
बैठक में महेंद्र हार्डिया ने कहा कि अधिकारी बिल्कुल नहीं सुन रहे हैं। विधायक निधि से स्वीकृत काम भी नहीं हो रहे हैं।
वहीं मधु वर्मा ने कहा कि विकास के काम प्रभावित हो रहे हैं। यदि हम इंदौर नगर निगम में किसी अधिकारी को चालानी कार्रवाई से रोकते हैं तो भी वे सुनते नहीं हैं।
विधायक गोलू शुक्ला भी बोले कि कोई सुनवाई नहीं हो रही है। नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा भी बोले कि सीएम का कार्यक्रम अधिकारियों ने 29 मार्च को दशहरा मैदान पर तय कर लिया और इस संबंध में किसी से कोई बात नहीं की। सब उन्होंने अपने स्तर पर तय किया है।
एमओएस पर टैक्स नहीं लगना चाहिए
सभी विधायकों ने कहा कि एमओएस पर टैक्स नहीं लगना चाहिए। इससे सरकार और नगर निगम से बहुत नाराजगी होगी। इस पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि यह साल 2020 का सरकार का फैसला है। मैं खुद इस पक्ष में नहीं हूं क्योंकि यह जगह तो धूप, हवा आने के लिए है। इस पर पुनर्विचार होना चाहिए। इसके लिए मैंने शासन स्तर पर आग्रह किया है। इस पर सभी ने तय किया कि इस मुद्दे पर भी सीएम को आमजन की भावनाओं से अवगत कराकर इस पर विचार के लिए आग्रह करेंगे।
प्रशासन और निगम से ज्यादा नाराजगी
बैठक में मुख्य तौर पर जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों को लेकर नाराजगी जाहिर की गई। सभी जनप्रतिनिधि बोले कि यह रवैया रहा तो शहर का विकास और काम प्रभावित होगा।
इससे बीजेपी सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ती है। इसलिए जरूरी है कि इन बातों को सीएम के सामने रखा जाए और उन्हें बताया जाए कि अधिकारियों के रवैए से किस तरह से शहर का विकास प्रभावित हो रहा है।
सीधी कलेक्टर हट चुके हैं
उल्लेखनीय है कि हाल ही में सीधी में भी जनप्रतिनिधियों ने मोर्चा खोला था, जिसके चलते वहां के कलेक्टर को सीएम ने हटाने के आदेश दिए थे। वहीं जल्द ही मध्य प्रदेश में आईएएस की ट्रांसफर सूची भी संभावित है, जिसमें कई बड़े बदलाव होना है।
ऐसे में जनप्रतिनिधियों की नाराजगी किसी भी अधिकारी पर भारी पड़ सकती है। सीएम पहले भी कई मौके पर बोल चुके हैं कि विकास के काम में अधिकारी, जनप्रतिनिधियों को साथ लेकर चलें।
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