बीजेपी की पदयात्रा में कॉलेज स्टाफ और छात्रों को बुलाने का आदेश, एडी बोलीं- कार्यक्रम गैर राजनीतिक है
खास बात यह है कि इस पदयात्रा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल समेत कई बड़े नेता शामिल हो रहे हैं। कांग्रेस ने इस आदेश पर सवाल उठाए हैं। वहीं, उच्च शिक्षा विभाग की एडिशनल डायरेक्टर अनामिका जैन का कहना है कि उन्हें यह कार्यक्रम गैर राजनीतिक बताया था।
बीजेपी की पदयात्रा के लिए कॉलेजों को भेजा आदेश
इंदौर से बीजेपी की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा हो गई है। कांग्रेस के लगातार आंदोलनों के बीच बीजेपी भी अब सड़क पर उतरी है। इस पदयात्रा को लेकर उच्च शिक्षा विभाग की एडिशनल डायरेक्टर (AD) अनामिका जैन ने कॉलेजों को आदेश जारी किया है।
आदेश सरकारी, निजी और अनुदान प्राप्त कॉलेजों के प्राचार्यों को भेजा गया है। इसमें 28 अक्टूबर को जाल सभागृह में हुई प्राचार्यों की बैठक का हवाला दिया गया है। आदेश के मुताबिक, सभी कॉलेजों के स्टाफ और छात्रों को 30 अक्टूबर की सुबह 10 बजे सुभाष चौक पर एकत्र होना है।
इसके अलावा कॉलेजों को अपने कर्मचारियों और विद्यार्थियों की सूची लीड कॉलेज को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।
एडी अनामिका जैन ने आदेश पर क्या कहा?
इस मामले में द सूत्र ने एडिशनल डायरेक्टर अनामिका जैन से बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आदेश बीजेपी की रैली के लिए जारी नहीं किया गया है। जैन ने कहा कि प्रबुद्धजनों से आवाज उठाने और वैचारिक मंथन करने का आह्वान किया गया था। उन्हें मंत्रीजी ने बताया था कि यह कार्यक्रम गैर राजनीतिक है। इसका राजनीति से कोई संबंध नहीं है।
जैन के मुताबिक, इसी जानकारी के आधार पर कॉलेजों को आदेश जारी किया गया। हालांकि, कार्यक्रम में बीजेपी के बड़े नेताओं की मौजूदगी और कॉलेजों को भेजे गए आदेश को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सीएम मोहन यादव और बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष पदयात्रा में शामिल
बीजेपी की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा 30 अक्टूबर को इंदौर में आयोजित हुई है। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खंडेलवाल सहित पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं।
पदयात्रा का समय सुबह 10 बजे तय किया गया है। इसका Route सुभाष नगर चौराहे से पाटनीपुरा चौराहे तक रखा गया है। आयोजकों की ओर से इसमें करीब एक लाख लोगों के शामिल होने की बात कही गई है। इनमें विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि, व्यापारी संगठन, खेल संगठनों के पदाधिकारी और आम नागरिक भी शामिल हैं।
कांग्रेस ने पूछा- कॉलेजों से भीड़ जुटाने की जरूरत क्यों?
उच्च शिक्षा विभाग के आदेश पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के इंचार्ज अमिनुल खान सूरी ने इसे लेकर कई सवाल उठाए हैं। सूरी का कहना है कि लोकतंत्र बचाने के नाम पर कॉलेजों के स्टाफ और छात्रों को राजनीतिक कार्यक्रम में बुलाने के लिए आदेश जारी किए जा रहे हैं।
उन्होंने सवाल किया कि अगर बीजेपी की पदयात्रा को लेकर जनता में इतना उत्साह है, तो कॉलेजों के कर्मचारियों और विद्यार्थियों को आदेश देकर बुलाने की जरूरत क्यों पड़ रही है? सूरी ने कहा कि शिक्षण संस्थानों का काम विद्यार्थियों को शिक्षा देना है। उन्हें किसी राजनीतिक दल के कार्यक्रम के लिए भीड़ जुटाने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
छात्रों की सूची मांगने पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने कॉलेजों से कर्मचारियों और छात्रों की सूची मांगने पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सरकारी और निजी कॉलेजों के प्राचार्यों को इस तरह के निर्देश देना गलत है। विद्यार्थियों को अपनी इच्छा से किसी कार्यक्रम में शामिल होने का अधिकार होना चाहिए।
सूरी ने कहा कि शिक्षण संस्थान किसी राजनीतिक दल की शाखा नहीं हैं। छात्र किसी पार्टी की रैली में भीड़ बढ़ाने का साधन नहीं हैं। सरकारी व्यवस्था का इस्तेमाल भी किसी दल के संगठन की तरह नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए संस्थाओं की स्वतंत्रता और लोगों की स्वेच्छा का सम्मान जरूरी है।
आदेश के बाद खड़ा हुआ विवाद
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल कॉलेजों को जारी किए गए आदेश को लेकर है। एक तरफ बीजेपी इस पदयात्रा का आयोजन कर रही है। इसमें मुख्यमंत्री और प्रदेशाध्यक्ष समेत पार्टी के प्रमुख नेता शामिल हो रहे हैं। दूसरी तरफ उच्च शिक्षा विभाग की अधिकारी इसे गैर राजनीतिक कार्यक्रम बता रही हैं।
कांग्रेस नेता ने उठाया सवाल
वहीं कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के इंचार्ज अमिनुल खान सूरी ने इस पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इंदौर में भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के लिए सरकारी और निजी कॉलेजों के प्राचार्यों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि वे 30 अक्टूबर को सुबह 10 बजे अपने स्टाफ और विद्यार्थियों को सुभाष चौक भेजें। साथ ही सभी कॉलेजों से कर्मचारियों और विद्यार्थियों की सूची भी तुरंत मांगी गई है।
सूरी ने कहा कि कॉलेजों का काम पढ़ाई कराना है या राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए भीड़ जुटाना? अगर भाजपा की पदयात्रा को लेकर लोगों में इतना उत्साह है, तो फिर कॉलेजों के स्टाफ और विद्यार्थियों को बुलाने के लिए आदेश जारी करने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
उन्होंने कहा कि कॉलेज किसी राजनीतिक पार्टी के संगठन नहीं हैं और न ही विद्यार्थी रैलियों में भीड़ बढ़ाने का जरिया हैं। लोकतंत्र में हर किसी को अपनी मर्जी से किसी कार्यक्रम में शामिल होने का अधिकार है। ऐसे में कॉलेजों के जरिए विद्यार्थियों को राजनीतिक कार्यक्रम में बुलाने के मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए।