वरिष्ठ BJP नेता सत्यनारायण सत्तन की कुर्सी के बहाने पार्टी में डैमेज करने की पॉलिटिक्स
News In Short
- इंदौर में BJP कार्यक्रम में सत्तन को कुर्सी नहीं मिली।
- उनका नाम सूची में होने के बावजूद गड़बड़ी हुई।
- सत्तन नाराज होकर कार्यक्रम से लौट गए।
- बाद में मामला मीडिया में खुलकर सामने आया है।
- डैमेज कंट्रोल की जगह विवाद और बढ़ गया है।
News In Detail
कुर्सी विवाद से कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
इंदौर में 29 मार्च को बड़ा कार्यक्रम हुआ था। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मौजूद थे। कार्यक्रम में कई वरिष्ठ नेता मंच पर थे। वरिष्ठ नेता सत्यनारायण सत्तन भी पहुंचे थे। लेकिन उन्हें मंच पर कुर्सी नहीं मिली। उन्हें बताया गया कि नाम सूची में नहीं है। यह सुनकर सत्तन कार्यक्रम से लौट गए। यहीं से पूरा विवाद शुरू हुआ।
क्या आमंत्रितों की सूची में नहीं थे सत्तन
द सूत्र के पास मंचासीन अतिथियों की पूरी सूची मौजूद है। इस सूची में कुल 69 अतिथियों को मंच पर बैठाने की लिस्ट को मंजूर किया गया था। यह सूची बीजेपी इंदौर पार्टी दफ्तर से ही मंजूर हुई और इसे सीएम हाउस और प्रशासन के पास भेजा गया। इस सूची में 26वें नंबर पर सत्तन गुरु का नाम मौजूद है। उनके ऊपर बाबूसिंह रघुवंशी का और उनके नीचे 27वें नंबर पर जिलाध्यक्ष ग्रामीण श्रवण चावड़ा का नाम है।
सूची में थे तो फिर गफलत कहां हुई
सूची में नाम मौजूद था और सत्तन के लिए कुर्सी भी मंच पर थी। कारण है कि नर्मदा के चतुर्थ चरण का ऐतिहासिक आयोजन था। इसलिए इसमें सभी पूर्व महापौर, निगम के पूर्व सभापति, पार्टी के सभी वरिष्ठों को आमंत्रित किया गया था। ताई सुमित्रा महाजन को भी (वह इंदौर से बाहर थीं, इसलिए नहीं आईं)।
इसके लिए खुद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सभी को फोन कर आमंत्रित किया। लेकिन सत्तन गुरु जब मंच पर पहुंचे तो उनकी कुर्सी तो लगी थी लेकिन उस पर नाम की पर्ची लगना बाकी रह गया था। इसके चलते गफलत हुई और वहां मंच पर मौजूद एक कार्यकर्ता ने उन्हें कह दिया कि आप आमंत्रित सूची में नहीं हैं और वह लौट गए।
मंच पर व्यवस्था तो पार्टी दफ्तर से इनकी लगी
अब इसकी जिम्मेदारी किसकी थी? तो पार्टी दफ्तर से मंच व्यवस्था संभालने के लिए चार पदाधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। इसमें नगर उपाध्यक्ष हरप्रीत सिंह बक्शी, कार्यालय मंत्री विशाल यादव, सह कार्यालय मंत्री आकाश उर्फ रानू गर्ग और महापौर प्रतिनिधि विधानसभा चार रमेश खत्री थे।
वहीं मंच के नीचे की व्यवस्था, मीडिया व्यवस्था और संत व्यवस्था के लिए भी कुल 20 लोगों की ड्यूटी लगी थी। यानी मंच के लिए जिन चार लोगों की जिम्मेदारी थी, वे इस मामले को मौके पर ही नहीं सुलझा सके। कायदे से इन चारों को ही सत्तन गुरु से बात कर बताना था कि सूची में आपका नाम है और कुर्सी बताना थी, जो यह नहीं कर सके।
सुमित मिश्रा पहुंचे घर, खुले कमरे में बात
यह तो किस्सा कुर्सी का हुआ लेकिन इसके बाद जो डैमेज कंट्रोल करना था उसकी जगह उलटी राजनीति हुई। इसमें नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा के लिए पार्टी दफ्तर से ही मीडिया के लिए मैसेज चला कि वह सत्तन गुरु के घर मिलने जा रहे हैं। इसके बाद मीडिया उनके घर पहुंच गया।
वहीं जो बात उनके और सत्तन गुरु के बीच बंद कमरे में होना थी वह उलटे मीडिया के कैमरों के बीच में खुले कमरे में की गई। इसी वीडियो ने पार्टी की भद पिटवा दी। इसमें गुरु खुलकर पार्टी को घेरते हुए दिख रहे हैं और कह रहे हैं कि अब पार्टी जिन लोगों के इशारे पर चल रही है, उनके कतिपय लोग ही पार्टी के धुरंधर हैं। जो लोग माई-बाप बनकर बैठे हैं, उनके इशारे पर नियुक्ति होती है, उन्हीं के इशारे पर यह सारा खेल हुआ। सत्तन की बातों ने पार्टी को जमकर घेर दिया।
महापौर तो पहले ही बात कर चुके थे
इस मामले में सत्तन गुरु जब कार्यक्रम से लौटे तभी महापौर ने उनसे बात कर लौटने का आग्रह किया था और माफी मांगी थी। इसके बाद फिर अगले दिन वीडियो जारी किया और खेद जताते हुए कहा कि कुर्सी थी लेकिन पर्ची नहीं लगी थी जिसके असमंजस के कारण यह हुआ, वह हमारे वरिष्ठ हैं हम खेद जताते हैं। बात खत्म हो चुकीथी लेकिन मिश्रा घर गए और सब कुछ कैमरों के सामने हो गया, जिसने पार्टी की भद पिटवा दी।
क्या महापौर, निगम का मजमा लूटना भारी पड़ा
यह पूरा कार्यक्रम नगर निगम का था और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी नर्मदा के चतुर्थ चरण के लिए हुए आयोजन को भविष्य के इंदौर के लिए ऐतिहासिक बताया। सीएम मोहन यादव ने भी इसकी प्रशंसा की और बाद में एक फोटो और वायरल हुई जिसमें सीएम भार्गव को सीने से लगा रहे हैं।
यानी इस आयोजन ने भार्गव को राजनीतिक तौर पर मजबूत किया और मजमा लूट लिया था। लेकिन इस पूरे मजमे के बाद बीजेपी नेता सत्यनारायण सत्तन की कुर्सी के किस्से की राजनीति हो गई। अब राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा है कि यह मजमा लूटना ही डैमेज करने की राजनीति की वजह बन गई।
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