इंदौर के बिल्डर ने IAS पर लगाए आरोप, काम कराने रिटायर्ड IAS से भी लगाई एप्रोच
INDORE. इंदौर के तिरूमाला ग्रुप के मालिक निलेश मालपानी ने एक विवादित पोस्ट डाली है। इसमें इंदौर के पूर्व अपर कलेक्टर और आईएएस कैलाश वानखेड़े को लेकर आरोप लगाए। सरकारी सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार की बात कही गई है और आरोप लगाए गए हैं कि अधिकारी महीनों फाइल को दबाए बैठे रहते हैं। लाखों रुपए की मांग की जाती है।
यह लिखा मालपानी ने
मालवपानी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि- आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे अधिकारी, पूरे शहर का विकास रोका, शासन को करोड़ों का राजस्व देरी से मिलेगा। हजारों को रोजगार नहीं मिलेगा। 15 दिन में जारी होने वाला लाइसेंस 5-6 महीनों तक रोक कर दबा कर बैठे। कैलाश वानखेड़े हर लाइसेंस पर लाखों रुपए की मांग। कोई सुनने वाला नहीं।
शहर के अधिकांश बिल़्डर/ कॉलोनाइजर सड़े काम के लिए परेशान हो रहे, धक्के खा रहे। काम की कोई बात इनसे नहीं करें। अपना टैक्स समय पर जमा करें। इन लोगों में इतनी हिम्मत आती कहां से हैं। क्या कोई तंत्र नहीं है जो इनकी जावबदेही तय करता हो। इन्हें फाइनेंशियल पनीश करेष लोगों का करोड़ों रुपयों का नुकसान हो रहा है और यह रोककर बैठे हैं। क्योंकि इनके बाप का कुछ लगा नहीं है।
यह है पूरा मामला, मालपानी से मांगी थी जानकारी
मालपानी के भाई मनोज मालपानी ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया हुआ है। आवेदन पर दिसंबर 2025 से ही सर्वर से आटोमेटिक जनरेटिक क्ववेरी चल रही है। आवेद को 30 दिसंबर को फिर 23 जनवरी को और 29 जनवरी, 5 मार्च व 13 मार्च को जानकारियां मांगी गई। इसमें पहले कंपनी के पूर्व के कामों, सर्टिफिकेट की जानकारी मांगी गई। आवेदक फर्म शुभ लाभ रियलिटी लिमिटेड के पूर्व के कामों की जानकारी चाही गई। इनकी जानकारी बार-बार मांगी गई।
रिटायर्ड आईएएस रिश्तेदार से लगाई एप्रोच
लाइसेंस का काम अटकने पर मालपानी द्वारा अपने रिश्तेदार रिटायर्ड आएएस जेएम मालपानी से भी एप्रोच लगवाई गई। इनके द्वारा वानखेड़े से मुलाकात की गई और फोन भी लगाया गया। लेकिन तब हाईकोर्ट केस में व्यस्त होने से वानखेड़े ने कहा कि अधीनस्थों को इस काम में जल्द कागज पूरे कर, कार्रवाई के आदेश दे दिए हैं। इसे तीन-चार दिन बाद ही देख पाउंगा। यह बात मालपानी को अखर गई। इसके बाद निलेश मालपानी द्वारा यह पोस्ट लिखी गई।
कौन है रिटायर्ड आईएएस मालपानी
दिसंबर 2015 में जब मालपानी अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग में कमिशनर पद पर थे तब उनका एक आड़ियो आया था। इसमें वह बड़वानी में पदस्थ सहायक आयुक्त आरके श्रोत्री से राशि का हिस्सा मांग रहे थे। इसमें तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने निलंबत कर दिया था। निलंबन अवधि में ही वह सेवानिवृत्त हो गए। बाद में अपर मुख्य सचिव पीसी मीना ने उन्हें जांच कर क्लीन चिट दी थी। इसके बाद मालपानी ने सरकार से ग्रेच्युटी व अन्य सेवा के लिए सरकार से 20 लाख भी मांगे थे।
उधर शासन ने पोस्ट पर ली आपत्ति
उधर शासन ने इस पोस्ट पर आपत्ति ली है और खंडन जारी किया। इसमें कहा गया कि यह संज्ञान में आया है कि कॉलोनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के संबंध में नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों पर दबाव बनाने व छवि धूमिल की कोशिश हो रही है। सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों पर तथ्यहीन, भ्रामक एवं मनगढ़ंत आरोप प्रसारित किए जा रहे हैं। विभाग इन सभी आरोपों का विधिक आधार पर खंडन करता है।
अपर आयुक्त कैलाश वानखेड़े ने स्पष्ट किया है कि लंबित फाइलें केवल उन्हीं मामलों में हैं, जहां आवेदकों द्वारा आवश्यक अनुमतियां एवं दस्तावेज पूर्ण नहीं किए गए हैं। या पूर्व की कॉलोनियों के कार्य अधूरे हैं। बिना परीक्षण एवं आवश्यक अनुमतियों के किसी भी प्रकरण को स्वीकृति प्रदान नहीं की जा सकती।
इतने आवेदन किए गए निराकृत
विभाग ने बताया कि ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया प्रारंभ होने से अब तक कुल 4132 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 3669 आवेदनों के रजिस्ट्रेशन प्रमाण-पत्र जारी किए जा चुके हैं। शेष आवेदन विभिन्न स्तरों पर परीक्षणाधीन हैं, जबकि 183 आवेदनों को आवश्यक जानकारी पूर्ण करने हेतु आवेदकों को ऑनलाइन पोर्टल पर वापस किया गया है।
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