बंटी नागर के 5 प्रोजेक्ट में फंसे 600करोड़ रुपए, नेताओं के परिजनऔरअधिकारियों का भी निवेश
परिजन ने क्या दिए बयान
थाना पलासिया में जाकर बुधवार, 30 सितंबर की रात को बेटे ऋषित, भाई राजेश और अन्य के बयान हुए। सभी ने साफ कहा कि कोई आर्थिक परेशानी नहीं थी और ना ही कोई कर्ज था। ऐसे में साफ है कि नागर आर्थिक परेशानी में नहीं थे। सुसाइड का कारण अब व्यक्तिगत अधिक दिख रहा है।
पुलिस की जांच भी इसी ओर जा रही है। जैसा द सूत्र ने पहले ही खुलासा किया था कि वह कुछ दिन पहले ही दिल्ली होकर आए थे और इसके बाद से ही अलग-थलग रहने लगे थे। सुसाइड से तीन दिन पहले उन्होंने दोस्तों से भी बात बंद कर दी थी। जिस तरह से सुसाइड के पहले ही वह ऑफिस में साड़ी रखकर आए थे, उससे भी यह आशंका है कि कोई ग्लानि या व्यक्तिगत परेशानी थी, जिसके कारण पहले ही मरने का तय कर लिया था।
600 करोड़ का क्या होगा
बंटी नागर के एक के बाद एक प्रोजेक्ट चल रहे थे। हाल ही में राजोदा की एक कॉलोनी को कार्यपूर्णता मिली थी। वहीं एक बड़े प्रोजेक्ट में वह मार्केटिंग से जुड़े थे, जिसे एक सप्ताह पहले ही मंजूरी मिली थी। वहीं दर्जी कराडिया में भी एक बड़ा प्रोजेक्ट वह ला रहे थे, जिसकी फाइल भी कलेक्टर कार्यालय की कॉलोनी सेल में अभी मंजूर हुई थी। इसी के लिए 25 करोड़ की जमीन हाल ही में खरीदी थी। इन सभी प्रोजेक्ट्स में 600 करोड़ रुपए लगे हुए हैं।
नेताओं के परिजन, अधिकारी भी उलझे
बंटी नागर का ब्रांड संस्कृति डेवलपर्स की अच्छी साख थी। नागर के प्रोजेक्ट में करीब 20 फीसदी ही निवेश होता था, बाकी 80 फीसदी निवेश इन्वेस्टर्स का था, जो नागर के प्रोजेक्ट से लगातार कमाई कर रहे थे। हर प्रोजेक्ट में अलग-अलग निवेशक थे। एक प्रोजेक्ट बाल्याखेड़ी में धारा 16 में उलझा हुआ था, जिसमें एक नेताजी के भाई का भी करोड़ों रुपया फंसा हुआ था।
इसी तरह नागर के प्रोजेक्ट में इंदौर से लेकर भोपाल तक और मध्य प्रदेश के कई शहरों के अधिकारियों का डायरियों पर पैसा लगा हुआ था। यह राशि करोड़ों में है। ऐसे में यह सभी अधिकारी संताप में हैं कि इस निवेश का क्या होगा।
कई बड़े इन्वेस्टर्स और भूमाफिया के फंसे करोड़ों
बताया जा रहा है कि नागर के प्रोजेक्ट में कई बड़े इन्वेस्टर्स और भूमाफिया का पैसा फंसा हुआ है। एक भूमाफिया ने नागर के अंतिम संस्कार के समय ही कुछ लोगों से चर्चा में कहा कि मेरे तो 25 करोड़ फंस गए। इस तरह अब बाजार में काफी उथल-पुथल है।
इसमें सबसे बड़ा सवाल है कि अधिकांश ब्लैक मनी है, इनका हिसाब कौन करेगा और कैसे होगा। कई लोग कम राशि को ज्यादा बताने में जुट गए हैं, तो कई को अपने सौदों की चिंता है। डायरियों पर कई सौदे होने के चलते इनमें हस्ताक्षर और सौदों का मिलान कैसे होगा, यह बड़ी चिंता की बात है। ऐसे में वास्तव में राशि लगाने वाले परेशान हैं।
इसके साथ ही सैंकड़ों प्लॉटधारक हैं, जिनके डायरी पर सौदे हैं और रजिस्ट्री बाकी है। यह सभी उलझे हुए हैं। अभी स्थिति साफ नहीं है कि इनका हिसाब कौन करेगा। बेटे ऋषित को ज्यादा अनुभव नहीं है।