इंदौर के बिल्डर्स क्या करें, मास्टर प्लान, अहिल्या पथ, निगम के नोटिस, कॉलोनी सेल नियम सभी में उलझे
मास्टर प्लान सबसे बड़ा रोड़ा
सबसे बड़ी बाधा इंदौर का मास्टर प्लान नहीं आने की है। इसमें इंदौर से सटे हुए 79 गांव फंस गए हैं। यहां छोटी टाउनशिप आना बंद हो चुका है। दस एकड़ व उससे अधिक जमीन पर धारा 16 में विशेष मंजूरी होती थी, वह भी डेढ़ साल से बंद हो चुकी है। ऐसे में किसान और बिल्डर के बीच होने वाली जमीन खरीदी और रेशियो डील के करार डिफॉल्ट होने लगे हैं। यहां पर सैंकड़ों करोड़ की डील संकट में हैं। बंटी नागर की खुद की भी बाल्याखेड़ा में धारा 16 की मंजूरी अटकी हुई थी, जिसमें 50 करोड़ रुपए फंसे हुए थे।
अहिल्या पथ का पता नहीं
इसी तरह आईडीए द्वारा जून 2024 में घोषित अहिल्या पथ में भी आठ गांव के किसान और बिल्डर/निवेशक फंसे हुए हैं। इन गांवों में पहले जारी हो चुकी कॉलोनियों की अनापत्ति (NOC) भी रोकी हुई है। यहां भी 16 टाउनशिप्स अटकी हुई हैं। ये लोग आईडीए से लेकर जिला प्रशासन तक के चक्कर काट रहे हैं, जबकि अहिल्या पथ के प्रस्ताव को खुद मध्यप्रदेश शासन वापस लौटा चुका है। लेकिन अब यह गले की हड्डी बन गई है। न इसे मुक्त किया जा रहा है और न ही इसमें फैसला लिया जा रहा है।
चरनोई रास्ता वाला नियम बना गले की फांस
इसी तरह कॉलोनी सेल/जिला प्रशासन द्वारा कॉलोनी की विकास मंजूरी को लेकर नया नियम बनाया गया था। इसके तहत ग्रामीण एरिया में किसी की भी टीएंडसीपी पास होने से पहले कलेक्टोरेट की कॉलोनी सेल से मंजूरी ली जाएगी कि यहां पर कॉलोनी का एप्रोच रोड बनाने की स्थिति है या नहीं। इसके बाद ही मंजूरी होगी। जिस गांव में चरनोई भूमि दो प्रतिशत (ऐसी भूमि जहां गाय-भैंस चारा चरती हैं, यह कुल कृषि भूमि का दो प्रतिशत रखना अनिवार्य है) से कम है, वहां पर कॉलोनी के लिए एप्रोच रोड ही नहीं बन सकती है।
इसमें पहले कॉलोनी सेल पटवारी से रिपोर्ट लेती है और यदि जमीन कम है और मार्ग नहीं है तो टीएंडसीपी ही पास नहीं होती है। जबकि इस नियम को लाने की मंशा इतनी भर थी कि कॉलोनी में आने-जाने के लिए एप्रोच रोड उपलब्ध होना चाहिए। लेकिन इसमें चरनोई का नियम फंसने से कई टीएंडसीपी अनुमतियां उलझ गई हैं।
निगम के आश्रय निधि के नोटिस
इंदौर नगर निगम की कार्यशैली भी रियल एस्टेट कारोबारियों को राहत देने की जगह परेशानियां खड़ी कर रही है। निगम ने हाल ही में 70 बिल्डर्स से आश्रय निधि वसूली के लिए 200 करोड़ के नोटिस जारी किए हैं। यह नोटिस मध्य प्रदेश में केवल इंदौर निगम द्वारा जारी हुए हैं और किसी भी निगम ने इसे लेकर नोटिस नहीं दिए हैं।
अब इंडस्ट्रियल पार्क में भी नोटिस
जिला प्रशासन इंदौर की कॉलोनी सेल ने इसी तरह आश्रय निधि वसूली को लेकर अब इंडस्ट्रियल पार्क बनाने वालों को नोटिस जारी कर दिए हैं। नोटिस में लिखा है कि क्यों न अवैध कॉलोनी घोषित कर दिया जाए, जबकि वहां इंडस्ट्री लगी है, रेरा नंबर तक जारी है। जबकि इंडस्ट्रियल पार्क को लेकर आश्रय निधि की राशि लेने का कहीं पर कोई प्रावधान ही नहीं है।
25 हजार करोड़ का है रियल एस्टेट
इंदौर का रियल एस्टेट कारोबार हर साल करीब 25 हजार करोड़ का है। इससे मध्य प्रदेश शासन को भी ढाई हजार करोड़ के करीब का पंजीयन शुल्क मिलता है। इसके अलावा हजारों कामगारों को रोजगार, सीमेंट, सरिया आदि की खरीदी पर जीएसटी जैसे टैक्स भी मिलते हैं। यह सेक्टर इंदौर में सबसे ज्यादा रोजगार देता है। ऐसे में यह सेक्टर दो साल से परेशान है लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।
क्या बोल रहा है क्रेडाई
क्रेडाई इंदौर के प्रेसीडेंट संदीप श्रीवास्तव कहते हैं कि रियल सेक्टर की समस्याएं हम हर स्तर पर लगातार बता रहे हैं। छोटी-छोटी बातें हैं, जिनके चलते समस्याएं हैं। जो काम म.प्र. में कहीं नहीं हो रहे, वह इंदौर में हो रहे हैं और नोटिस दिए जा रहे हैं। सभी को यह समझना होगा कि रियल सेक्टर से रोजगार और राजस्व मिलता है और इसे बढ़ावा देने तथा रास्ता निकालने की जरूरत है।