इंदौर में कारोबारी राजीव धाम को 4.16 करोड़ की धोखाधड़ी में नहीं मिली अग्रिम जमानत
4.16 करोड़ की धोखाधड़ी
विधवा महिला मनजीत कौर आनंद ने इस मामले में क्राइम ब्रांच इंदौर में शिकायत की थी। उनकी सास गजिंदर कौर का निधन नवंबर 2025 में हो चुका है। आरोप लगाए गए हैं कि राजीव धाम ने फरियादी महिला और उनकी सास को संपत्ति विवाद के निराकरण और मध्यस्थता की पेशकश की। उन्हें विश्वास में लेकर साल 2015 से 2022 के दौरान उनसे चार करोड़ 16 लाख रुपए विभिन्न खातों में लिए थे। ये खाते उनके परिजनों और सिग्मा एडवर्टाइजिंग फर्म के थे। लेकिन बाद में इसमें से केवल 26 लाख रुपए ही लौटाए हैं। अभी भी धाम ने तीन करोड़ 90 लाख रुपए नहीं लौटाए हैं।
जमीन भी बेचने की साजिश की
यह भी आरोप एफआईआर में लगाए गए कि इसके साथ ही धाम ने धोखाधड़ी करते हुए उनसे बिचौली मर्दाना की 0.683 हेक्टेयर में से 44 हजार वर्गफीट जमीन खरीदी का सौदा किया था। यह सौदा सात करोड़ रुपए में किया गया, लेकिन इस सौदे की राशि नहीं दीइस जमीन को बेचने का विज्ञापन दे दिया।
वहीं धाम ने आवेदन में आरोप खारिज किए
वहीं धाम ने अधिवक्ता के जरिए कोर्ट में अपना पक्ष रखा। इसमें उन्होंने सारे आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि वह इंदौर में सम्मानित व्यक्ति हैं और उनकी उम्र 64 साल है। जो राशि कौर परिवार ने दी थी, वह वे नकद में ले चूके हैं। यह पूरा केस पुराना है और अब इसमें दबाव के तहत केस दर्ज कराया गया है। यह केस सिविल प्रकृति का है, लेकिन इसमें इसे फौजदारी केस बनाते हुए आईपीसी की धाराएं लगाई गईं।
जिला कोर्ट ने खारिज किया आवेदन
लेकिन इस मामले में इंदौर जिला कोर्ट ने धाम का आवेदन खारिज कर दिया। कोर्ट ने फैसले में कहा कि अग्रिम जमानत की मंजूरी बहुत कम मामलों में दी जानी चाहिए। गिरफ्तारी रोकने के लिए यह राहत नहीं दी जा सकती है। जहां प्रतीत हो कि असत्य रूप से केस हुआ है और स्वतंत्रता मिलने पर उसके दुरुपयोग की संभावना नहीं है, वहीं पर इसका उपयोग किया जाना चाहिए। इसलिए केस डायरी देखने के बाद अग्रिम जमानत आवेदन खारिज किया जाता है।