इंदौर कलेक्टर ने आधी रात को 11 तहसीलदार, 4 एसडीएम बदले, वजह शिकायतें
बताया जा रहा है कि लगातार काम में ढिलाई और शिकायतों के चलते इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा (Indore Collector Shivam Verma) ने यह फैसला लिया है। इसमें 11 तहसीलदार, नायब तहसीलदार प्रभावित हुए हैं और वहीं चार एसडीएम भी बदले गए हैं। बदलाव के साथ संदेश दिया गया है कि काम नहीं करोगे तो बदलने में देरी नहीं की जाएगी। जिन्होंने बेहतर काम किया है उन्हें और अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। शिकायत वाले अधिकारियों को लूपलाइन में भेजा गया है।
एसडीएम क्यों बदले गए
महू एसडीएम राकेश परमार: महू में राकेश परमार को लंबा समय हो गया था। वहीं हाल ही में हाईकोर्ट ने उनकी कार्यशैली पर तीखी टिप्पणी की थी। एक जमीन केस में बेवजह स्टे हटाने को लेकर विवाद में आए। हाईकोर्ट ने इसमें 50 हजार की कॉस्ट लगाई। द सूत्र ने इस आदेश और केस का खुलासा किया था। इसके बाद उन्हें हटा दिया गया है। कलेक्टोरेट में भी अभी कोई अहम शाखा का काम नहीं दिया गया है।
संयुक्त कलेक्टर रोशनी हुई मजबूत: कलेक्टर ने संयुक्त कलेक्टर रोशनी पाटीदार पर फिर भरोसा जताया है। कॉलोनी सेल को अच्छे ढंग से संभालने और बेदाग छवि के कारण उन्हें अब इन कामों के साथ ही बिचौली हप्सी का एसडीएम बनाया गया है। अब वह फील्ड अधिकारी के रूप में भी काम करेंगी।
डिप्टी कलेक्टर विनोद राठौर: राऊ, देपालपुर के साथ ही पहले महू एसडीएम रह चुके विनोद राठौर को एक बार फिर महू एसडीएम बनाया गया है। परमार को हटाने से खाली हुई जगह पर वह आए हैं। राठौर को बीते बदलाव में देपालपुर से हटाकर शाखाओं का प्रभारी बनाया गया था। लेकिन अब फिर फील्ड में लाया गया है और महू जैसी अहम जिम्मेदारी दी गई है।
डिप्टी कलेक्टर अजय शुक्ला: लंबे समय से बिचौली हप्सी एसडीएम रहे शुक्ला को फिलहाल कलेक्टोरेट में ही प्रोटोकॉल, आपदा प्रबंधन, पेट्रोलियम व एक्सप्लोसिव एक्ट शाखा के काम दिए गए हैं। एक जगह लंबे समय से एसडीएम रहने से बदलाव हुआ है।
भूमाफिया से केस हारने वाले, शिकायत वाले हटाए
वहीं 11 तहसीलदारों के काम में बदलाव किया गया है। इसमें काफी वे थे जो लंबे समय से प्रोटोकॉल शाखा में थे और उन्हें अब राजस्व कोर्ट की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं जिन्हें हटाया गया है, उसकी अहम वजह शिकायतें और काम में देरी रही है। खासकर जूनी इंदौर तहसील और महू तहसील के अधिकारी बदले गए हैं।
सपना शर्मा: इन्हें जूनी इंदौर तहसीलदार की अहम जिम्मेदारी मिली है। यह पद मुख्यालय तहसीलदार का होता है। अभी यह प्रोटोकॉल शाखा में थीं।
राकेश सस्तिया: हाल ही में अयोध्यापुरी में भूमाफियाओं से प्रशासन केस हारा है, इसमें सामने आया था कि अधिकारियों ने वहां तर्क ही नहीं रखे और एकपक्षीय मामला चला गया। वहीं आईएएस तरुण भटनागर कोर्ट के एक फर्जी आदेश पर ही कब्जा दिलाने के लिए टीम बना दी थी। इन दो कारणों से विदाई हो गई।
योगेंद्र सिंह राठौर: इन्हें नायब तहसीलदार जूनी इंदौर किया है।
अशोक परमार: इन्हें नायब तहसीलदार जूनी इंदौर से हटाकर भू-अभिलेख में किया है। इनके द्वारा एक शराब दुकान व अन्य कब्जाधारी को बेदखली का आदेश किया गया लेकिन कोर्ट में कैविएट ही नहीं लगाई, यह सभी सात दिन में स्टे ले आए। इस तरह जूनी इंदौर तहसील की पूरी टीम बदल दी गई है।
राजेश सोनी: सीनियर तहसीलदार हैं, लंबे समय बाद राजस्व कोर्ट में वापसी हुई है और खुडैल अपर तहसीलदार किया है।
योगेश मेशराम: इन्हें खुडैल से हटाकर देपालपुर में कार्यपालिक अधिकारी बनाया गया है। शिकायतों के चलते इन्हें राजस्व कोर्ट से हटाया गया है।
अनिल पटेल: तहसीलदार बिचौली हप्सी पद से हटाकर खुडैल में कार्यपालिक अधिकारी किया है। लंबे समय से इनकी कार्यशैली की शिकायतें कलेक्टर को मिल रही थीं। इन्हें मौके दिए गए लेकिन काम में और शैली में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद हटा दिया गया है।
विकास रघुवंशी: इन्हें सांवेर के क्षिप्रा तहसीलदार से अब बिचौली हप्सी तहसीलदार बनाया गया है।
यशदीप रावत: महू में सिमरोल के नायब तहसीलदार पद से लूपलाइन शिकायत शाखा में अटैच किया है।
अखिलेश सरमंडल: इन्हें शिकायत शाखा से अब महू सिमरोल में नायब तहसीलदार किया है।
नागेंद्र त्रिपाठी: मल्हारगंज से एक शिकायत के बाद नायब तहसीलदार पद से हटाए गए त्रिपाठी अभी देपालपुर में कार्यपालिक अधिकारी थे। अब उन्हें फिर मौका दिया है और क्षिप्रा में नायब तहसीलदार किया है।
इन तहसीलदारों को नोटिस
उधर राजस्व बैठक में समीक्षा के बाद कलेक्टर ने कई अधिकारियों को नोटिस जारी कर दिए हैं।
नारायण नांदेड़ा: कनाडिया तहसीलदार नांदेड़ा हाल ही में पुलिस ड्राइवर फिरोज खान से जुड़ी जमीन के विवादित नामांतरण आदेश से चर्चा में आए थे। अब डायवर्सन शुल्क की वसूली नहीं करने के चलते नोटिस थमाया गया है।
यशदीप रावत: सीएम हेल्पलाइन शिकायतों पर काम नहीं करने के चलते महू के सिमरोल नायब तहसीलदार को नोटिस दिया गया है। इन्हें अब पद से भी हटाया गया है।
विवेक सोनी: महू तहसीलदार विवेक सोनी एक बार फिर नए कार्यविभाजन में भी बच गए हैं। लंबे समय से इनके खिलाफ शिकायतें हैं और यह सालों से जमे हुए हैं। राजस्व बैठक में भी इनके मामले सामने आए थे। अब कलेक्टर ने डायवर्सन शुल्क वसूली में लापरवाही पर नोटिस दिया है।
नीरज प्रजापति: हातोद नायब तहसीलदार प्रजापति द्वारा आवेदक का पक्ष सुने बिना ही केस रद्द करने के चलते नोटिस हुआ है। इसे शासकीय काम में लापरवाही माना गया है।
संगीता गोलिया: हातोद तहसीलदार गोलिया को इनके द्वारा भी आवेदक को सुनवाई का अवसर दिए बिना केस रद्द करने के चलते नोटिस हुआ है।
चोखेलाल टांक: नायब तहसीलदार चंद्रावतीगंज को सीएम हेल्पलाइन के निराकरण में लापरवाही के कारण नोटिस हुआ।
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