इंदौर कलेक्टर की बड़ी कार्रवाई, स्वामित्व योजना में काम नहीं करने पर सात प्रोबेशनर पटवारियों की सेवा समाप्त
सहमति के बाद भी काम में नहीं आई तेजी
मध्य प्रदेश सरकार और पटवारियों के बीच स्वामित्व योजना को लेकर सहमति बन चुकी है। इसके बावजूद योजना के काम में तेजी नहीं आई है। इसी बीच इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने सख्त कदम उठाया है। उन्होंने स्वामित्व योजना के तहत एक भी रजिस्ट्री नहीं करने वाले सांवेर तहसील के सात पटवारियों की सेवा समाप्त कर दी है।
इन 7 पटवारियों की सेवा समाप्त
स्वामित्व योजना के तहत काम नहीं करने पर सांवेर तहसील के सात पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनमें शैलेश राठौर, रंजीत मंडलोई, सकलेंद्र सिंह, अदम्य त्रिपाठी, दीपा गुप्ता, शिवानी राजगुरु और संजय रजक शामिल हैं। इन सभी की सेवा समाप्त कर दी गई है।
सभी पटवारी प्रोबेशन पीरियड पर थे
ये सभी पटवारी मार्च 2024 में नियुक्त हुए थे। इनकी नियुक्ति तीन साल के प्रोबेशन पीरियड पर हुई थी। यानी सातों पटवारी अभी परिवीक्षा अवधि में थे।
इस दौरान इनका काम संतोषजनक नहीं पाए जाने पर कलेक्टर ने कार्रवाई की। सातों पटवारियों को निलंबित करने के बजाय सीधे सेवा से बाहर कर दिया गया। यानी अब इनकी नौकरी समाप्त हो गई है।
स्वामित्व योजना को लेकर पहले भी हुआ विवाद
मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना के काम को लेकर पटवारी संगठनों (MP Patwari) और सरकार के बीच पहले भी मतभेद सामने आए थे। पटवारी संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर नाराजगी जताई थी। इनमें कार्रवाई का सामना कर रहे पटवारियों की बहाली का मुद्दा भी शामिल था।
इसके बाद सरकार और पटवारियों के बीच बातचीत हुई। योजना का काम दोबारा शुरू करने को लेकर सहमति बनने की बात सामने आई थी। हालांकि, इंदौर में सात पटवारियों की सेवा समाप्त होने से योजना के कामकाज का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
दो साल में 32 पटवारी रिश्वत लेते पकड़े गए
पिछले दो वर्षों में इंदौर और उज्जैन संभाग के 16 जिलों में कुल 32 पटवारी रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़े गए। ये मामले जमीन से जुड़े कामों के थे। इनमें नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, ऋण पुस्तिका और सरकारी रिकॉर्ड में नाम दर्ज करने जैसे काम शामिल थे।
इन मामलों में दो हजार रुपए से लेकर एक लाख रुपए तक की रिश्वत लेने की घटनाएं सामने आई थीं।
इंदौर संभाग में दर्ज हुए 15 मामले
लोकायुक्त एसपी डॉ. राजेश सहाय के मुताबिक अकेले इंदौर संभाग में पटवारियों के खिलाफ रिश्वतखोरी के 15 मामले दर्ज किए गए थे। इन मामलों में पीड़ित आदिवासी और किसान थे। जमीन का बंटवारा कराने, सीमांकन करने और सरकारी रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने के बदले रिश्वत मांगने की शिकायतें मिली थीं।
लोकायुक्त ने शिकायतों का सत्यापन करने के बाद संबंधित मामलों में कार्रवाई की थी।
क्या है स्वामित्व योजना?
स्वामित्व योजना केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है। इसका उद्देश्य ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में संपत्तियों का सर्वे कर उनके मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज तैयार करना है।
योजना के तहत ड्रोन तकनीक से गांवों में आबादी क्षेत्र की संपत्तियों का सर्वे किया जाता है। इसके आधार पर पात्र संपत्ति मालिकों के लिए प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए जाते हैं।
इससे ग्रामीणों के संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड स्पष्ट करने में मदद मिलती है। साथ ही संपत्ति को लेकर होने वाले विवाद कम करने और पात्रता के अनुसार बैंक से कर्ज लेने में भी सुविधा हो सकती है।