इंदौर हुआ जलमग्न, कांग्रेस ने नाला टेपिंग को लेकर लगाए 50% कमीशन के आरोप, पूर्व सांसद प्रतिनिधि ने भी पूछा कौन जिम्मेदार
संजय गुप्ता, INDORE. इंदौर में 36 घंटे में दस इंच करीब बारिश हो चुकी है। हालत खराब है, सभी सड़कें तालाब में बदल गई है, नदी-नाले सभी उफान पर है। जगह-जगह सड़कों पर गाड़ियां बंद पड़ी हुई दिख रही है। इंदौर का पूर्वी विकसित माने जाने वाला विजयनगर एरिया हो या फिर रणजीत हनुमान मंदिर वाला पश्चिमी एरिया हर जगह हालत खराब है। खासकर निचली बस्तियों में मकान तीन-चार फीट तक डूब गए हैं। देश के इकलौते वाटर प्लस शहर का दर्जा पाया हुआ इंदौर जलमग्न है और फिर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर स्मार्ट सिटी में नंबर वन इंदौर डूबता क्यों हैं? कांग्रेस ने इसके लिए नगर निगम द्वारा 50 फीसदी कमीशन लेकर घटिया काम कराने को जिम्मेदार बताया है और बीजेपी सरकार को फिर घेरा है।
कांग्रेस ने यह लगाए आरोप
कांग्रेस ने कहा कि भारी बारिश के चलते पूरे शहर की यातायात व्यवस्था चरमरा गई। अधिकांश जगह सीवरेज चेंबर चौक थे जिसके चलते बारिश के पानी की निकासी नहीं हो पाने से सड़के तथा जनता के घरों में कमरे तक पानी भर गया। निचली बस्तियों का तो बहुत ही बुरा हाल था। कल रात से इंदौर शहर कांग्रेस के पदाधिकारी, विधायकगण और पार्षद जनता की सहायता करते रहे। निगम के अमले से भी सहयोग नहीं मिला। नाला टेपिंग और सीवरेज व्यवस्था पर 1500 करोड़ से अधिक राशि खर्च कर देने के बाद भी जरा से बारिश में शहर जलमग्न हो जाता है। इंदौर नगर निगम प्रशासन की आपदा प्रबंधन व्यवस्था की फिर पोल खोल कर रख दी है उपरोक्त आरोप लगाते हुए मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव राजेश चौकसे और संभागीय प्रवक्ता अमित चौरसिया ने कहा की बीजेपी की 50 फीसदी कमीशन खोरी की सरकार ने विकास के नाम इंदौर शहर का बंटाधार कर दिया है।
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निगम के 110 इंजीनियर किस काम के
कांग्रेस के संभागीय प्रवक्ता अमित चौरसिया ने कहा कि नगर निगम में 110 इंजीनियर सहित 200 अधिकारियों पर सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। बड़े प्रोजेक्ट में लाखों रुपए खर्च कर कंसलटेंट नियुक्त होते हैं, लेकिन फिर भी शहर डूब रहा है। अमृत और जेएनएनयूआरएम प्रोजेक्ट व नाला टेपिंग में एक मुश्त 1500 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं, तो स्टार्म वाटर लाइन पर हर साल 15 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं, लेकिन स्थिति नियंत्रण के बाहर है। बीआरटीएस पर करीब 280 करोड़ रुपए में स्टार्म वाटर लाइन डाली, लेकिन हर साल पानी भर जाता है। अन्य सड़कों के भी यही हाल है। औसतन 70 हजार वेतन, गाड़ी ड्रायवर अलग, आइएएस और राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को छोड़ दें तो भी 200 अधिकारियों की टीम है। सीनियर इंजीनियर का वेतन करीब 1 लाख 10 हजार तो जूनियर का 80 हजार है। इतना बड़ा खर्च होने के बाद भी निगम का अमला शहर के डूबने जैसी स्थिति में सुधार नहीं कर पा रहा है। शहर डूब रहा है तो जिम्मेदार जनकार्य विभाग, ड्रेनेज सेक्शन पर सवाल उठना लाजिमी है। थोड़ी सी बारिश में ही शहर डूब रहा है।
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अलर्ट के बाद भी निगम की तैयारी जीरो थी
प्रदेश सचिव राजेश चौकसे ने बताया की मौसम विभाग ने पहले ही इंदौर के लिए रेड-ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया था फिर इंदौर नगर निगम ने इसको लेकर कोई तैयारी नही की जिसकी वजह से शहर के कई इलाके जलमग्न हो गए।
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अलग-अलग जगह नेता निकले सड़कों पर
महापौर पुष्यमित्र भार्गव, एमआईसी सदस्य बबलू शर्मा साथ ही सभी पार्षद व अन्य नेता सड़कों पर उतरे हुए हैं। कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी के साथ सभी अधिकारी रेस्क्यू में लगे हुए हैं। राउ से बीजेपी प्रत्याशी मधु वर्मा निगम कर्मचारी से फावड़ा लेकर नाली बनाते नजर आए, तो वहीं विधायक जीतू पटवारी भी क्षेत्र में निकले, विधायक संजय शुक्ला एयरपोर्ट की निचली बस्तियों में गए। कांग्रेस के चिंटू चौकसी, राजू भदोरिया, दीपक पिंटू जोशी, सहित अन्य दावेदारों ने भी मोर्चा संभाला। आकाश विजयवर्गीय अपने क्षेत्र में सक्रिय हुए, तो अन्य नेता भी अपने क्षेत्रों में निकले।
पूर्व सांसद प्रतिनिधि राजेश अग्रवाल ने पूछा सवाल कौन जिम्मेदार
वहीं पूर्व सांसद प्रतिनिधि राजेश अग्रवाल ने वाट्सअप पर लिखा कि कौन जिम्मेदार है? उन्होंने लिखा कि- नगर में चार पांच तकनीकि सलाहकार अधिकारियों के पले हुए हैं जो जिम्मेदार भी है और अवार्ड भी पाते हैं। प्राधिकरण से बड़ी संख्या में उपकृत हैं। देशभर में जब सड़कों की योजना के लिए सलाहकार को नियुक्त किया जाता है तो मुख्य कार्य ही जल बहाव की व्यवस्था को विचार में लिया जाता है। यहां फीस तो मेट्रो सिटी के मुकाबले कई गुना और कार्य दस बीस प्रतिशत ही करते हैं। जबकि इंदौर में पूरे शहर में जल प्रवाह उपलब्ध है। दैनिक भास्कर के सामने पानी भरता है और दो पांच सौ फीट दूरी पर प्रवाह उपलब्ध है। सपना संगीता रोड पर पानी भरता है, जबकि मात्र आधा किलोमीटर पर छावनी वाला जल प्रवाह उपलब्ध है। पूरे शहर में यही स्थिति है और सभी विकास पुरुष।