विधानसभा रिजल्ट से उठी बात, इंदौर में कांग्रेस कितनी तैयार, नौ विधानसभा उम्मीदवारों की भी तंगी
News In Short
- चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही कांग्रेस पर सवाल उठने लगे हैं।
- इंदौर की नौ सीटों पर कांग्रेस पार्टी कमजोर दिख रही है।
- पार्टी के कई सारे नेता बीजेपी में शामिल हो चुके हैं।
- फिलहाल में उम्मीदवारों की कमी साफ नजर आ रही है।
- आने वाले चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी में चिंता बढ़ गई है।
News In Detail
पांच राज्यों के चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर कांग्रेस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भले ही केरलम में कांग्रेस की वापसी हुई है, लेकिन बाकी राज्यों खासकर असम में करारी हार हुई है।
अब सवाल मध्यप्रदेश में भी उठ रहे हैं कि क्या कांग्रेस ढाई साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए तैयार है। इसके पहले अगले साल 2027 में निगम चुनाव है।
1989 से इंदौर में कांग्रेस का सांसद नहीं
कभी मध्य प्रदेश में लगातार सत्ता में रहने वाली कांग्रेस प्रदेश की 230 विधानसभा सीट में 66 विधानसभा सीट पर सिमट चुकी है। बीते चुनाव 2023 में तो इंदौर में सूपड़ा साफ हो चुका था। सभी नौ की नौ सीट बीजेपी ले गई थी।
महापौर के जब से सीधे चुनाव हो रहे हैं कांग्रेस के हाथ जीत नहीं लगी है। लोकसभा में उम्मीदवार ऐन वक्त पर साथ छोड़कर भगोड़ा हो गया। वहीं सांसद की बात ही बेमानी है। साल 1989 से ही इंदौर में कांग्रेस का सांसद नहीं रहा है।
विधानसभा चुनाव लड़ने वाले तो बीजेपी के हो गए
कांग्रेस के हाल इतने बेहाल हैं कि यदि इंदौर की नौ विधानसभा में संभावित टिकट के दावेदारों की बात भी करें तो ढूंढना पड़ेगा। कारण है कि विधानसभा एक में चुनाव लड़ने वाले संजय शुक्ला कांग्रेस छोड़ बीजेपी में जा चुके हैं।
वहीं विधानसभा चार से लड़ने वाले राजा मंधवानी और देपालपुर से लड़ने वाले विशाल पटेल का भी यही हाल है। महू से लड़ने वाले रामकिशोर शुक्ला और यहीं से अंतर सिंह दरबार भी कांग्रेस छोड़ बीजेपी में जा चुके हैं।
इसके पहले सांवेर से लड़ने वाले तुलसीराम सिलावट तो 2020 में ही कांग्रेस का साथ छोड़ चुके थे। यही नहीं टिकट के कई दावेदार भी बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। इसमें स्वप्निल कोठारी जैसे नाम प्रमुख हैं, जो कांग्रेस से पांच नंबर से कभी टिकट मांगा करते थे।
फिर कौन करेगा कांग्रेस में दावेदारी
इंदौर विधानसभा एक: कांग्रेस से टिकट की दावेदारी की बात करें तो इंदौर विधानसभा एक से केवल दीपू यादव का ही नाम अभी उभर कर सामने आता है। यह एक बार चुनाव में करारी मात खा चुके हैं और तीसरे नंबर पर रहे थे।
इंदौर विधानसभा दो: विधानसभा दो से फिर ले देकर चिंटू चौकसे हैं, जो बीते चुनाव में एक लाख सात हजार वोट से हार का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बना चुके हैं।
विधानसभा तीन: इंदौर विधानसभा तीन से पिंटू जोशी के साथ ही पूर्व विधायक अश्विन जोशी हैं। पिंटू बीता चुनाव 2023 का हारे इसके पहले अश्विन जोशी लगातार 2013 व 2018 में हारे थे।
इंदौर विधानसभा चार: विधानसभा चार में फिलहाल कोई दमदार चेहरा नहीं है> सभी हारे हुए नेता बैठे हुए हैं, जो अपना बूथ भी नहीं जीत पाते हैं।
इंदौर विधानसभा पांच: विधानसभा पांच से बीती बार सत्यनारायण पटेल ने चुनाव लड़ा था, लेकिन अब सीट खाली है, क्योंकि वह अब देपालपुर से ही चुनाव लड़ेंगे। यहां फिर अमन बजाज जैसे युवा का ही नाम उठकर आता है। संभावना यह भी है कि जीतू पटवारी राऊ छोड़कर पांच नंबर में आ जाएं।
विधानसभा राऊ: उधर राऊ में जीतू पटवारी 30 हजार से अधिक वोट से हार चुके हैं। अब वह सीट बदलेंगे या खुद लड़ेंगे तय नहीं है।
देपालपुर विधानसभा: देपालपुर में सत्यनारायण पटेल ही हैं। इसके अलावा एक मोती पटेल भी हैं।
महू: महू में कोई खास चेहरा नहीं है। अंतर सिंह दरबार और शुक्ला दोनों बीजेपी में जा चुके हैं।
सांवेर: सांवेर में रीना बौरासी हैं, जो बीता चुनाव करीब 60 हजार वोट से हार चुकी हैं। अभी मध्यप्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष हैं।
सांसद और महापौर के भी ठिकाने नहीं
अब सबसे पहले चुनौती महापौर के चुनाव को लेकर आएगी, क्योंकि जून-जुलाई 2027 में निगम महापौर का कार्यकाल खत्म हो रहा है। पिछले चुनाव में संजय शुक्ला ने महापौर का चुनाव लड़ा था, जो अब बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। अब सवाल ये है कि महापौर का चुनाव कौन लड़ेगा?
इस बार उम्मीद है कि महापौर का पद महिला कोटे में जाएगा, लेकिन कांग्रेस के लिए इस चेहरे को तलाशना आसान नहीं होगा। वहीं लोकसभा चुनाव 2029 में होने हैं, लेकिन 2024 में कांग्रेस का उम्मीदवार अक्षय कांति बम मुश्किल से तय हो पाया था। अब आने वाले चुनाव का उम्मीदवार भी अगर चुनाव के दौरान बीजेपी में चला गया तो कांग्रेस के लिए यह दावेदारी बहुत दूर की बात होगी।
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