वंदे मातरम् विवाद में कांग्रेस के नेताओं की अलग-अलग बयानबाजी, अब नजरें जांच कमेटी पर
इंदौर में वंदे मातरम् विवाद के बाद कांग्रेस के नेताओं की अलग-अलग बयानबाजी ने पार्टी को ही बांट दिया है। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह से लेकर पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे तक – इन सभी ने अलग-अलग तरह से बयान दिए हैं।
कोई साजिश की बात कर रहा है, तो कोई पार्षदों के पाकिस्तान में बसने का मुद्दा उठा रहा है। इन बयानबाजियों ने कांग्रेस को ही एक तरह से दो खेमों में बांट दिया है।
विवाद क्या है
इंदौर नगर निगम के बजट सत्र में आठ अप्रैल को कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम देरी से आईं। बीजेपी ने कहा कि वंदे मातरम् नहीं गाना था, इसलिए देरी से आईं। इस पर फौजिया ने कहा कि मैं नहीं गाऊंगी, संविधान में ऐसा कहीं नहीं लिखा कि गाना जरूरी है। फिर पार्षद रुबीना इकबाल खान ने बोल दिया कि किसी के बाप में हिम्मत नहीं जो जबरदस्ती वंदे मातरम् बुलवा सके।
इस विवाद में कौन नेता क्या बोला
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह- यह बीजेपी की कुटिल साजिश है। दोनों महिला पार्षद देरी से आईं तो उन्हें अलग से वंदे मातरम् गाने के लिए कहा गया। यह बीजेपी का हिंदू-मुस्लिम में बांटने का प्रयास है।
प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी- राष्ट्रगीत नहीं गाना अपना संवैधानिक अधिकार हो सकता है, पर यह कहना कि मैं नहीं गाऊंगा, मुझे भी अच्छा नहीं लगा। पार्टी को घटना की जानकारी है और समय पर कार्रवाई होगी।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार- जब इस तरह की बात होती है तो पार्टी को समय पर कार्रवाई करना चाहिए।
शहराध्यक्ष चिंटू चौकसे- इस मामले में उनके तीन बयान आए।
- विवाद वाले दिन कहा कि वंदे मातरम् हमारी रगों में है। यह उनकी (पार्षदों) व्यक्तिगत राय है। इसके साथ ही चिंटू ने कांग्रेस के सभी आयोजनों में वंदे मातरम् गान को अनिवार्य कर दिया।
- दूसरा बयान दिया कि रुबीना को पार्टी से निष्कासित ही मानें, कार्रवाई के लिए भोपाल पत्र लिखा है।
- दोनों पार्षदों पर एफआईआर के बाद तीसरा बयान आया कि सबसे पहले हमारे लिए देश है और उसकी गरिमा है। इसके ऊपर कोई चीज नहीं आती है। इस राष्ट्रवाद से संबंधित जो भी चीजें हैं, उनका सम्मान करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। हमारा देश कैसे धर्मनिरपेक्ष चलेगा, किसी की भावना आहत तो नहीं हो रही है, सौहार्दपूर्ण माहौल बिगड़ तो नहीं रहा है, यह सुनिश्चित करना होगा।
पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा- कोई भी कार्रवाई प्राकृतिक न्याय और पार्टी संविधान के तहत ही हो सकती है। पार्षदों ने यदि कुछ बोला है तो नोटिस देकर जवाब मांगें कि उन्होंने किन परिस्थितियों में कहा।
प्रवक्ता केके मिश्रा- जो राष्ट्रधर्म नहीं निभा सकते और वंदे मातरम् नहीं बोल सकते, वे पाकिस्तान में जाकर बस जाएं। यह पूरे विवाद को इंदौर में रहे एक विवादित अधिकारी ने हवा दी है।
अल्पसंख्यक प्रभारी छत्तीसगढ़ डॉ. अमीनुल सूरी- वंदे मातरम् का सम्मान जरूरी है, लेकिन इसे अनिवार्य करना गलत है।
पार्षद राजू भदौरिया- यह पूरा विवाद फौजिया के पति शेख अलीम और महापौर के बीच हुई डील का नतीजा है। पहले वह राष्ट्रगीत गाती रही है, उसी दिन क्यों मना किया? यह पूरी साजिश है।
दोनों पार्षद अब क्या बोल रहीं
इस मामले में फौजिया ने पुलिस को बयान दिया कि वह राष्ट्रगीत का हमेशा सम्मान करती रही हैं। पहले भी वह बैठकों में रही हैं। संविधान हमें धार्मिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी देता है, किसी को गीत गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। वहीं रुबीना खान ने कहा कि दो शब्द गलत बोले थे, इसके लिए मैं खेद जता चुकी हूं। हमेशा राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का सम्मान किया है।
दोनों पर इन धाराओं में हुआ है केस
निगम सभापति मुन्नालाल यादव और बीजेपी पार्षद कमल वाघेला की शिकायत पर पुलिस ने पहले सभी के बयान लिए। फौजिया और रुबीना के भी बयान हुए। इसके बाद बीएनएस की धारा 196(1) और 3(5) में केस किया।
इसमें 196(1) में है कि धर्म, जाति या भाषा के आधार पर समूहों में शत्रुता फैलाने का अपराध, माहौल खराब करना। इसमें तीन से पांच साल की सजा का प्रावधान है। वहीं 3(5) में है कि जब कोई सामूहिक रूप से अपराध करे।
कांग्रेस ने बनाई जांच कमेटी
वहीं कांग्रेस मप्र प्रभारी महेश चौधरी ने इसमें जांच के लिए कमेटी गठित कर दी। इसमें मप्र कांग्रेस के सह-प्रभारी संजय दत्त और उषा नायडू सदस्य हैं। कमेटी को सात दिन में जांच रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है ताकि संगठन स्तर पर उचित कार्रवाई की जा सके।
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