इंदौर डेली कॉलेज विवाद: हाईकोर्ट में एक घंटे चली सुनवाई, चुनाव और संविधान पर आएगा फैसला
इंदौर डेली कॉलेज मामले में चार याचिकाएं लगी हुई हैं। इसमें मुख्य रूप से मांग नए संविधान संशोधन पर रोक की है। इसे लेकर गुरुवार, 14 मई को हाईकोर्ट इंदौर में जस्टिस प्रणय वर्मा की बेंच में सुनवाई होना थी, लेकिन जस्टिस ने खुद को इस केस से अलग कर लिया।
इसके बाद मामला चीफ जस्टिस के पास गया और इसे फिर जस्टिस संदीप भट्ट की बेंच में लगाया गया। इस पर शुक्रवार, 15 मई को करीब एक घंटे तक सुनवाई चली। फैसला सुरक्षित है, यह देर शाम तक संभावित है।
एक घंटे तक चली सुनवाई
नए सिरे से इस केस में शुक्रवार, 15 मई को एक घंटे तक सुनवाई हुई। इसमें याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि हम चुनाव चाहते हैं, लेकिन जो संविधान संशोधन हुआ वह अवैधानिक है। इसे रद्द किया जाना चाहिए। पुराने संविधान से ही चुनाव होना चाहिए। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता महेश जेठमलानी वीर जैन थे।
वहीं डेली कॉलेज की ओर से अधिवक्ता विजय आसुदानी ने तर्क रखे। इसमें कहा गया कि याचिका मेंटेनेबल नहीं है। इनके पास इस मामले में हाईकोर्ट की जगह अन्य उच्च अधिकारियों के पास अपील के विकल्प उपलब्ध है।
संविधान संशोधन बोर्ड से प्रस्ताव पास हुआ और इसे फर्म सोसायटी ने मंजूर किया। सभी प्रक्रिया विधिक तौर से की गई है और चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
साथ ही कहा कि केवल कुछ लोग है जो इसका विरोध कर रहे हैं। यह सभी पूर्व छात्रों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। सभी तर्क सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया है।
इसके पहले जस्टिस हट गए थे
हाईकोर्ट जस्टिस प्रणय वर्मा ने गुरुवार 14 मई को एक लाइन का आदेश जारी कर खुद को केस से अलग किया था। लिखा था कि यह याचिकाएं अन्य बेंच के सामने लगाई जाएं, जिसमें वह सदस्य नहीं हो।
इस पर अधिवक्ता ने पूछ लिया क्यों। जिस पर जस्टिस नाराज हुए और कहा कि यह मत पूछिए क्यों। बेहतर होगा कि ये मुझसे मत पूछिए क्यों। मैं इस पर कुछ नहीं कहना चाहता हूं।
इन सभी की लगी याचिकाएं
इसमें एक नई याचिका जय सिंह झाबुआ द्वारा लगाई गई है। वहीं डेली कॉलेज सोसायटी, विक्रम खंडेलवाल, संदीप पारिख की ओर से भी याचिकाएं लगी हैं। खंडेलवाल की ओर से दो याचिकाएं हैं।
इस तरह कुल पांच याचिकाएं लिंक हैं। इन सभी में मुख्य रूप से फर्म एंड सोसायटी और डेली कॉलेज बोर्ड पक्षकार हैं। साथ ही डेली कॉलेज द्वारा दो रिट अपील भी दायर की गई है जो डबल बेंच के सामने लगी है।
उधर 21 मई को वोटिंग और रिजल्ट
इन याचिकाओं में मुख्य रूप से नए संविधान को लागू करने और चुनाव प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां ली गई हैं। इसमें डेली कॉलेज के पूर्व छात्र द्वारा चुनाव पर रोक की मांग की गई है।
बीती सुनवाई के दौरान चुनाव पर स्टे की मांग की गई थी, लेकिन इसमें डेली कॉलेज को जवाब देने के लिए समय दिया गया था और स्टे नहीं हुआ था। अब 14 मई को मामला फिर टल गया। उधर चुनाव 21 मई को होना है और इसी दिन रिजल्ट भी जारी होगा।
एक पद के लिए मोनू Vs राजेश अग्रवाल
नए संविधान के मुताबिक टू बी वन (फाउंडर मेंबर) कैटेगरी से दो सदस्य और टू बी टू (न्यू डोनर) कैटेगरी से एक सदस्य का चुनाव होना तय है। फाउंडर मेंबर कैटेगरी में चार नामांकन थे। इसमें दो खारिज हो गए।
इसके चलते विक्रम पंवार और प्रियवत खिलचीपुर निर्विरोध चुने गए। वहीं न्यू डोनर कैटेगरी में चुनाव होना है, जिसमें केवल एक पद है।
इस पद के लिए बोर्ड के वर्तमान मेंबर हरपाल (मोनू) सिंह भाटिया हैं। वहीं विरोध का बिगुल बजा रहे नीरज देसाई, संदीप पारिख, राजेश अग्रवाल, जयेश पटेल और मनवीर सिंह बायस उम्मीदवार हैं। विरोधी गुट ने एकजुट होकर राजेश अग्रवाल को अधिकृत उम्मीदवार घोषित किया है। यानी चुनाव मोनू भाटिया और राजेश अग्रवाल के बीच ही है।
ये खबरें भी पढ़िए...
डेली कॉलेज को लेकर लगी चार याचिकाओं से हाईकोर्ट जस्टिस ने खुद को किया अलग
डेली कॉलेज को लेकर लगी चार याचिकाओं पर टली सुनवाई, उधर 21 मई को चुनाव
डेली कॉलेज चुनाव में पोस्टल बैलेट चोरी के आरोप, विक्रम पंवार ने ले लिया उद्योगपति मेहता का बैलेट
ओल्ड डेलियंस एसोसिएशन ने डेली कॉलेज बोर्ड के संविधान संशोधन के खिलाफ पास किया प्रस्ताव