डेली कॉलेज के कामकाज पर बोर्ड मेंबर प्रियव्रत सिंह ने उठाए सवाल, बोर्ड को लिखा लंबा पत्र
डेली कॉलेज बोर्ड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय कार्यकारिणी मंडल की बैठक के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। बोर्ड मेंबर और कांग्रेस सरकार में ऊर्जा मंत्री रह चुके प्रियव्रत सिंह खिंची ने बोर्ड को ई-मेल भेजा है।
प्रियव्रत सिंह ने यह मुद्दे उठाए
पूर्व मंत्री और बोर्ड मेंबर प्रियव्रत सिंह ने लंबा-चौड़ा पत्र लिखा है। उन्होंने लिखा है कि कॉलेज में लगातार राजनीतिक कार्यक्रम हो रहे हैं। यहां वैचारिक संगठनों, थिंक टैंकों और RSS के कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। ऐसे कार्यक्रमों को लेकर बोर्ड की कोई स्पष्ट नीति नहीं है।
प्रियव्रत ने कहा कि डेली कॉलेज का 150 साल पुराना इतिहास और अपनी अलग पहचान है। यहां पहले कभी कोई मूर्ति नहीं लगाई गई थी। देवी अहिल्या की प्रतिमा को मंजूरी मिलने से पहले यहां सिर्फ सर हेनरी डेली की प्रतिमा थी। अब कॉलेज में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा लगाने की तैयारी है। प्रियव्रत सिंह का कहना है कि इससे संस्थान की निष्पक्षता और उसकी सार्वजनिक पहचान पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
आयोजनों के लिए स्पष्ट नीति बनाए बोर्ड
प्रियव्रत सिंह ने पत्र में आगे लिखा है कि कॉलेज कैंपस में राजनीतिक कार्यक्रमों, स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा लगाने और बाहरी संगठनों के आयोजनों को लेकर स्पष्ट नियम बनाए जाएं। उन्होंने कहा कि इन नियमों को लिखित रूप में तैयार कर आधिकारिक मंजूरी दी जाए। साथ ही, कॉलेज अध्यक्ष और प्रिंसिपल इस पूरे मामले पर लिखित में अपना जवाब दें।
बोर्ड ने नहीं दी थी तवज्जो
प्रियव्रत सिंह ने सितंबर में भी बोर्ड को पत्र लिखा था और बोर्ड की बैठक में यह मुद्दा उठाया था। वहीं बाद में बैठक के जो मिनट्स सामने आए, उनमें उनकी बातों को पूरी तरह शामिल नहीं किया गया। इस पर उन्होंने ई-मेल के जरिए आपत्ति जताई। साथ ही कॉलेज में होने वाले आयोजनों के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग भी की।
यह बोले प्रियव्रत सिंह
प्रियव्रत सिंह ने इस संबंध में द सूत्र से पत्र लिखने की पुष्टि करते हुए कहा कि, हमारा 150 साल का इतिहास रहा है। कांग्रेस इतने समय सत्ता में रही है लेकिन कोई राजनीतिक आयोजन नहीं हुआ है। कोई प्रतिमा नहीं लगी और ना ही राजनीतिक आयोजन हुए। तत्कालीन सीएम दिग्विजय सिंह ने भी कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन पचमढ़ी में कराया था, वह चाहते तो इसे डेली कॉलेज में करा सकते थे। हमें शैक्षणिक संस्थानों को इससे दूर रखना चाहिए। संघ के आयोजन के लिए स्कूल का पूरा एकेडमिक कैलेंडर बदल दिया गया। उनसे होस्टल खाली कराया गया। यह गलत परंपरा है।
इधर महापौर ने कांग्रेस और प्रियव्रत को घेरा
वहीं, इस मामले में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद युवाओं के आदर्श हैं। वे किसी राजनीतिक दल या संगठन से जुड़े नहीं हैं। भार्गव ने कहा कि स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का विरोध करना प्रियव्रत सिंह के साथ-साथ पूरी कांग्रेस की सोच को दिखाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस हमेशा से महापुरुषों का अपमान करती आई है। इस विरोध से एक बार फिर उनकी राष्ट्रविरोधी सोच सामने आ गई है।
पूर्व सीएम सिंह के साथ हुई थी पवार की बैठक
इससे पहले संघ के आयोजन को लेकर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने इस पर आपत्ति ली थी। साथ ही वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने भी विरोध जताया था। इसके बाद बोर्ड प्रेसीडेंट विक्रम पवार के यहां पूर्व सीएम सिंह, प्रियव्रत व अन्य की बैठक हुई थी। इसमें तय हुआ था कि आगे से कोई राजनीतिक आयोजन नहीं होंगे। इसकी जानकारी खुद दिग्विजय सिंह ने इंदौर में एक प्रेस कांफ्रेंस में दी थी।
बोर्ड में अभी यह है मेंबर
प्रेसीडेंट विक्रम सिंह पवार, मेंबर हरपाल सिंह भाटिया, प्रियव्रत सिंह, रिटायर जस्टिस सुभाष काकाड़े, एएजी राहुल सेठी, संजय पाहवा, करण नरसरिया, नवनीज बागरी, नीलेश अग्रवाल व निपुण अग्रवाल व सचिव प्रिंसीपल डॉक्टर गुणमीत बिंद्रा।