डेली कॉलेज बोर्ड में विवाद के बीच लग गई स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा, संघ प्रमुख भागवत नागपुर गए
हालांकि, इसका आयोजनों पर कोई असर नहीं पड़ा। बैठक खत्म होने के बाद संघ के सभी पदाधिकारी इंदौर से रवाना हो गए। सबसे आखिर में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत शनिवार सुबह नागपुर के लिए निकले।
कॉलेज में संघ आयोजन और स्वामी विवेकानंद प्रतिमा को लेकर मचे विवाद के बाद भी दोनों आयोजन पूरे हो गए। डेली कॉलेज बोर्ड मेंबर व पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह खिलचीपुर के साथ ही पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया सभी ने संघ के आयोजन पर आपत्ति ली थी। वहीं 28 अक्टूबर से 6 नवंबर तक संघ के सभी आयोजन बिना किसी रुकावट के संपन्न हो गए।
स्वामी विवेकानंद प्रतिमा का अनावरण
डेली कॉलेज बोर्ड मेंबर प्रियव्रत सिंह ने परिसर में संघ के आयोजन व अन्य मामलों के साथ ही स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा लगाने का भी विरोध किया था। वहीं विरोध के बीच में 6 अक्टूबर को यहां पर प्रतिमा का अनावरण हो गया। संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने प्रतिमा का अनावरण किया।
प्रियव्रत ने प्रतिमा पर यह विरोध जताया था
प्रियव्रत ने बोर्ड को पत्र लिखकर प्रतिमा लगाने का विरोध किया था। उनका कहना था कि डेली कॉलेज का 150 साल का इतिहास और लिगेसी है, यहां कभी भी कोई मूर्ति नहीं लगी है। केवल देवी अहिल्या मां की प्रतिमा को मंजूरी से पहले यहां सर हेनरी डेली की केवल प्रतिमा थी। अब स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा लगाई जा रही है। स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव संस्थान की निष्पक्षता और स्कूल की सार्वजनिक पहचान पर सवाल खड़े करता है।
जेन जी को संदेश देने की कोशिश
स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा लगाने के पीछे देश में हो रहे जेन जी आंदोलनों को भी एक वजह माना जा रहा है। इसके जरिए संघ ने युवाओं को संदेश देने की कोशिश की है। स्वामी विवेकानंद किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े थे। वे युवाओं के आदर्श माने जाते हैं। इसी वजह से उनकी प्रतिमा लगाने का फैसला किया गया।
संघ की बैठक में भी युवाओं को लेकर काफी चर्चा हुई। संघ का कहना था कि जेन जी आंदोलनों में अराजक तत्व भी शामिल थे और इनके पीछे षड्यंत्र भी था। हालांकि संघ ने युवाओं से संवाद करने की जरूरत पर भी जोर दिया। ताकि युवा भटकें नहीं और कोई उनका राजनीतिक इस्तेमाल न कर सके।
संघ के आयोजन को लेकर लंबा चला विवाद
संघ के डेली कॉलेज में आयोजन के चलते करीब 15 दिन की छुट्टियां दी गई। संघ का आयोजन ही 28 अक्टूबर से 6 नवंबर तक चला। इसके पहले तैयारियों के लिए परिसर लिया गया। वहीं 400 से ज्यादा पदाधिकारी संघ के आयोजन के लिए देश भर से पहुंचे।
ऐसे में डेली कॉलेज का होस्टल भी खाली कराया गया। प्रियव्रत का आरोप है कि यह होस्टल रिनोवेशन के नाम पर खाली कराया गया। बच्चे और अभिभावक परेशान हुए, एकेडमिक कैलेंडर में बेवजह बदलाव किया गया और छुट्टियां बढ़ाई गईं।
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने भी ली थी आपत्ति
इससे पहले संघ के आयोजन को लेकर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने इस पर आपत्ति ली थी। इसके बाद बोर्ड प्रेसीडेंट विक्रम सिंह पवार के यहां पूर्व सीएम सिंह, प्रियव्रत व अन्य की बैठक हुई थी। इसमें तय हुआ था कि आगे से कोई राजनीतिक आयोजन नहीं होंगे। इसकी जानकारी खुद दिग्विजय सिंह ने इंदौर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी थी।
प्रियव्रत सिंह के ई-मेल में यह सब लिखा है
पूर्व मंत्री और बोर्ड मेंबर प्रियव्रत सिंह ने इस मामले में लंबा ई-मेल लिखा था। उन्होंने कहा कि कॉलेज में राजनीतिक कार्यक्रम, वैचारिक थिंक टैंक और राजनीतिक संगठनों के आयोजन लगातार हो रहे हैं। इनमें आरएसएस के कार्यक्रम भी शामिल हैं। इन आयोजनों को लेकर बोर्ड के पास कोई स्पष्ट नीति नहीं है।
उन्होंने मांग की कि कैंपस में राजनीतिक कार्यक्रमों, स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा लगाने और बाहरी राजनीतिक व वैचारिक आयोजनों के लिए स्कूल परिसर के इस्तेमाल को लेकर लिखित नीति बनाई जाए। इसे आधिकारिक तौर पर लागू भी किया जाए। साथ ही, बोर्ड अध्यक्ष और प्रधानाचार्य की ओर से इस मामले में लिखित जवाब दिया जाए।
बोर्ड में अभी ये मेंबर हैं
प्रेसीडेंट विक्रम सिंह पवार, मेंबर हरपाल सिंह भाटिया, प्रियव्रत सिंह, रिटायर जस्टिस सुभाष काकाड़े, एएजी राहुल सेठी, संजय पाहवा, करण नरसरिया, नवनीज बागरी, नीलेश अग्रवाल व निपुण अग्रवाल व सचिव प्रिंसीपल डॉक्टर गुणमीत बिंद्रा।