इंदौर–देवास बायपास की बदहाली पर हाईकोर्ट ने NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को किया तलब

Sanjay Gupta | Nov 06, 2026, 20:19 IST
इंदौर-देवास बायपास की बदहाली पर हाईकोर्ट सख्त, NHAI प्रोजेक्ट डायरेक्टर तलब
High Court strict on Indore-Dewas bypass condition, NHAI Project Director summoned
इंदौर-देवास बायपास की खराब हालत पर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को तलब किया है। लंबे समय से हाईकोर्ट इस मामले में निर्देश जारी कर रहा है। इसके बावजूद NHAI की ओर से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं। अब हाईकोर्ट ने प्रोजेक्ट डायरेक्टर को पेश होने के आदेश दिए हैं।

जनहित याचिका पर हुई सुनवाई

इंदौर-देवास बायपास की खराब हालत को लेकर जनहित याचिका दायर हुई है। यह याचिका मात्र फाउंडेशन की ओर से लगाई गई है। मामले में अधिवक्ता अमेय बजाज ने पैरवी की। हाईकोर्ट ने NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। यह अधिकारी परियोजना कार्यान्वयन इकाई (PIU), इंदौर से जुड़े हैं। कोर्ट ने अगली सुनवाई में व्यक्तिगत उपस्थिति भी अनिवार्य की है। मामले की अगली सुनवाई 22 दिसंबर 2026 को होगी।



सड़क पर गड्ढे, जलभराव और जर्जर अंडरपास की शिकायत

याचिका में बायपास के उचित रखरखाव नहीं होने का आरोप लगाया गया है। इसके कारण सड़क पर जगह-जगह गड्ढे बने हुए हैं। सड़क की सतह असमतल और फिसलन भरी बताई गई है। कई जगह कीचड़ जमा होने की समस्या भी सामने आई है। बारिश के दौरान सड़क पर जलभराव होता है। पुलों और पुलियाओं में दरारें होने की शिकायत भी की गई है। सर्विस रोड खराब हैं और अंडरपास की हालत जर्जर है। इन समस्याओं से वाहन चालकों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा है। संस्था ने समर्थन में सड़क की नई रंगीन तस्वीरें भी पेश कीं।



NHAI ने कोर्ट में क्या दलील दी?

सुनवाई के दौरान NHAI ने याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर सवाल उठाए। इस पर हाईकोर्ट बेंच ने कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि NHAI वास्तविक स्थिति का सामना करने से बच रहा है। हाईकोर्ट ने NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को जरूरी निर्देश दिए। उन्हें दोनों आवेदनों में उठाई गई शिकायतों पर कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। इन शिकायतों के निराकरण की रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश करनी होगी।



प्रोजेक्ट डायरेक्टर को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। उन्हें भविष्य में सड़क रखरखाव की व्यवस्था भी बतानी होगी। कोर्ट ने मौजूदा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उसने कहा कि मौजूदा बुनियादी ढांचा पर्याप्त नहीं दिखाई दे रहा। NHAI के नियुक्त अधिकारी भी उचित रखरखाव सुनिश्चित नहीं कर पा रहे हैं।



टोल वसूली फिर क्यों जारी है?

सुनवाई के दौरान टोल वसूली रोकने की मांग भी उठाई गई। मांग थी कि उचित रखरखाव होने तक टोल वसूली निलंबित की जाए। संस्था ने सड़क की खराब हालत का हवाला दिया। आवश्यक सुविधाओं की कमी को भी इसका आधार बताया गया। संस्था के अनुसार, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। इस मांग पर फिलहाल हाईकोर्ट ने रिपोर्ट मांगी है। हालांकि, टोल वसूली रोकने का कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं हुआ। यानी फिलहाल बायपास पर टोल वसूली जारी रहेगी।



याचिका में और कौन-सी राहत मांगी गई?

मूल जनहित याचिका में कई अन्य राहतों की मांग भी की गई है। इसमें सड़क की मरम्मत कराने का अनुरोध शामिल है। इसके लिए एक तदर्थ समिति गठित करने की मांग की गई है। समिति की निगरानी में मरम्मत और रखरखाव कराने का अनुरोध है। इसके बाद समिति को अपनी रिपोर्ट न्यायालय में पेश करनी होगी। याचिका में अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी शामिल है। इनमें स्ट्रीट लाइट और यातायात सहायता चौकी शामिल हैं। विश्राम क्षेत्र और चिकित्सा सहायता केंद्र बनाने की मांग भी की गई है। मवेशियों के सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करने का अनुरोध भी है। हालांकि, इन सभी मांगों पर अभी अंतिम फैसला नहीं आया है।

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