सीएम मोहन जिस अस्पताल का कर रहे उद्घाटन, वो आज भी अधूरा, बदल चुके सात कलेक्टर
इंदौर का जिला अस्पताल (पं. गोविंद वल्लभ पंत जिला चिकित्सालय) सरकारी लेटलतीफी का एक बेहतरीन उदाहरण है। इस अस्पताल के उद्धार के प्रयास साल 2005 से शुरू हुए।
साल 2017 में प्रस्ताव मंजूर हुआ और साथ ही 18 करोड़ की राशि भी मंजूर हुई। लेकिन 300 बेडों का यह अस्पताल 9 साल में भी अधूरा है। अभी केवल 34 बेडों के मैटर्निटी वार्ड के साथ इस अस्पताल की शुरुआत हो रही है।
क्या हुआ इन सालों में...
बता दें कि साल 1988 में दुग्ध संघ की जर्जर मल्टी में जिला अस्पताल शुरू हुआ था। साल 2005 में नए भवन के लिए बात चली। इसके बाद साल 2017 में जाकर प्रस्ताव को मंजूरी मिली। साथ ही तय हुआ कि 18 करोड़ की लागत से 300 बेडों का अस्पताल बनेगा।
तब मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान थे। इसके बाद सरकार बदली और कमलनाथ सरकार बनी। अस्पताल का काम शुरू हुआ, लेकिन पूरा नहीं हुआ।
इसके बाद फिर शिवराज सिंह चौहान की सरकार बनी लेकिन काम कछुए की रफ्तार से चलता रहा। इसके बाद मध्यप्रदेश सीएम मोहन यादव बने, लेकिन अभी भी अस्पताल अधूरा है और अब केवल मैटर्निटी वार्ड को 34 बेडों के साथ शुरू किया जा रहा है।
इतने कलेक्टर भी बदल गए
इस दौरान इंदौर में साल 2017 से अभी तक कलेक्टर पद पर पी. नरहरि, निशांत वरवड़े, लोकेश जाटव, मनीष सिंह, इलैयाराजा और आशीष सिंह कार्यकाल पूरा कर चुके हैं।
अब कलेक्टर शिवम वर्मा पद पर हैं। वहीं लागत भी 18 करोड़ से बढ़कर 83 करोड़ रुपए पहुंच चुकी है।
अभी यह यूनिट नहीं होंगी चालू
वहीं अभी मेडिसिन, हड्डी रोग, जनरल सर्जरी और हार्ट विभाग, यह सभी शुरू नहीं होंगे। इसके लिए समय लगेगा। यह भी तय नहीं है कि इनकी सुविधा कब शुरू होगी।
हालांकि अस्पताल शुरू होने से पश्चिमी इंदौर को राहत मिलेगी। साथ ही इससे एमवाय अस्पताल पर भी बोझ कम होगा। अभी महिलाओं को अन्य अस्पतालों में रेफर किया जाता था। यहां शासन ने स्टाफ भी 166 का स्वीकृत कर पदस्थ किया हुआ है।
ये खबरें भी पढ़िए...
मेडिकल ऑफिसर भर्ती में डॉक्टर्स को नहीं मिली मनपसंद पोस्टिंग, HC पहुंचा मामला
एक साथ तीन जिलों में सेवाएं दे रहे थे डॉक्टर साहब, घूसकांड के बाद खुले राज
डॉक्टर की पर्ची बिना नहीं मिलेगा कफ सिरप, केंद्र सरकार ने बदले नियम
अब फोन पर नहीं मिलेगा डॉक्टर्स का अपॉइंटमेंट, बंद होगा एनएचए हेल्पलाइन नंबर