मध्यावधि 2026: इंदौर संभाग में विधायक मजबूत, सरकार 8 अंक पीछे, बड़वानी चुनौती
मध्यप्रदेश की हर विधानसभा से डेटा लेकर तैयार किए गए इस सर्वे में जानिए... इंदौर संभाग के लोगों के मन की बात… और हां! ये सर्वे किसी तरह की घोषणा नहीं करता सिर्फ प्राप्त आंकड़ों से परसेप्शन बताता है।
हमने पूछे सिर्फ तीन सवाल
- क्या आप अपने विधायक से संतुष्ट हैं?
- BJP और डॉ. मोहन यादव की सरकार से संतुष्ट हैं या नहीं?
- क्या कांग्रेस प्रदेश में active दिखती है?
तो पहली बार हर नागरिक जान सकेगा
- उसके अपने जिले का मूड क्या है
- उसके विधायक को जनता पास करती है या फेल
- मोहन यादव सरकार के बारे में उसके इलाके की राय क्या है
- कांग्रेस जनता को active दिखती है या नहीं
मध्यावधि 2026: इंदौर संभाग thesootr Survey
इंदौर संभाग का मिजाज
इंदौर संभाग में 8 जिले और 37 विधानसभा सीटें हैं जिनमें 23 BJP के पास और 14 कांग्रेस के पास हैं। thesootr के मध्यावधि 2026 सर्वे ने इस पूरे संभाग की राजनीतिक नब्ज टटोली है।
संभाग का सबसे बड़ा संदेश यह है कि विधायक संतुष्टि (63%) सरकार संतुष्टि (54.7%) से 8 अंक आगे है। यानी जनता अपने विधायक को सरकार से बेहतर आंक रही है। इसके साथ 56.6% मतदाता कांग्रेस को प्रदेश में सक्रिय मानते हैं जो BJP के लिए एक स्पष्ट सतर्कता का संकेत है।
विधायक को व्यक्ति की तरह परखती है जनता
37 में से 29 सीटों पर विधायक संतुष्टि 60% से ऊपर है। सबसे ज्यादा संतुष्टि धार की विधायक नीना विक्रम वर्मा (BJP) को 70.4% मिली है। इसके बाद बदनावर के भंवरसिंह शेखावत (कांग्रेस) 69% और जोबट की सेना महेश पटेल (कांग्रेस) 68.3% पर हैं। शीर्ष पांच में BJP और कांग्रेस दोनों के नाम हैं।
यह एक अहम राजनीतिक संकेत है। जनता विधायक को उसकी पार्टी के चश्मे से नहीं बल्कि उसके व्यक्तिगत काम के आधार पर परख रही है। सबसे कम विधायक संतुष्टि राऊ (SC यानी Scheduled Caste आरक्षित) के BJP विधायक महादेव वर्मा को 50.7% मिली जो पूरे संभाग में सबसे नीचे है।
शहरी इंदौर मजबूत, ग्रामीण बेल्ट कमजोर
इंदौर जिला संभाग का सबसे बड़ा जिला है जिसमें 9 सीटें हैं और सभी BJP के पास हैं। यहां विधायक संतुष्टि 59.7% और सरकार संतुष्टि 58.8% है। यह इकलौता जिला है जहां दोनों आंकड़े लगभग बराबर हैं।
इंदौर-5 के विधायक महेंद्र हार्डिया की सीट पर सरकार संतुष्टि 73.7% के साथ पूरे संभाग में सबसे ऊंची है। इंदौर-1 से कैलाश विजयवर्गीय 66.4% विधायक संतुष्टि के साथ मजबूत स्थिति में हैं। महू में उषा ठाकुर और इंदौर-4 में मालिनी गौड़ की सीटें भी सरकार संतुष्टि में 65% से ऊपर हैं।
लेकिन राऊ और देपालपुर जिले की कमजोर कड़ियां हैं। देपालपुर में सरकार संतुष्टि 44.4% और कांग्रेस सक्रियता 64.6% है। इंदौर-2 के रमेश मेंदोला की सीट पर भी सरकार संतुष्टि 49% पर है।
आदिवासी जिलों में BJP के लिए असली चुनौती
बड़वानी, आलीराजपुर और धार के आदिवासी हिस्से में सरकार संतुष्टि लगातार कमजोर दिखती है। बड़वानी जिला (4 सीटें, जिसमें 1 BJP और 3 कांग्रेस) में सरकार संतुष्टि केवल 47.3% और कांग्रेस सक्रियता 65.2% है। यह पूरे संभाग में सरकार के लिए सबसे कठिन जिला है। पानसेमल (BJP) में विधायक संतुष्टि 68.2% तो है लेकिन सरकार संतुष्टि केवल 40.9% है।
आलीराजपुर जिले में एक तीखा विरोधाभास दिखता है। यहां विधायक संतुष्टि 67.3% के साथ संभाग में सबसे ऊंची है, लेकिन सरकार संतुष्टि महज 47.7% है और कांग्रेस सक्रियता 67% तक पहुंची है। BJP विधायक नागर सिंह चौहान की आलीराजपुर सीट पर व्यक्तिगत छवि और सरकार की छवि के बीच बड़ा फासला है।
धार जिले में विधायक संतुष्टि 64.7% है लेकिन सरकार संतुष्टि 51.9% पर है और कांग्रेस सक्रियता 61.3%। आदिवासी सीटों पर सरकार संतुष्टि 41 से 48% के बीच है।
खंडवा और बुरहानपुर: BJP के मजबूत किले
खंडवा जिले (4 सीटें, सभी BJP) में कांग्रेस सक्रियता 48.5% के साथ संभाग में सबसे कम है। हरसूद में विधायक संतुष्टि 67.2% और कांग्रेस सक्रियता 43.8% है जो इसे सबसे सुरक्षित सीट बनाती है। हालांकि खंडवा SC सीट पर सरकार संतुष्टि 43.1% पर कमजोर है।
बुरहानपुर (2 सीटें, सभी BJP) संभाग का वह इकलौता जिला है जहां सरकार संतुष्टि (66.3%) विधायक संतुष्टि (62.7%) से ऊपर है। यहां की दोनों सीटें नेपानगर और बुरहानपुर स्थिर और संतुलित हैं।
झाबुआ में दिलचस्प उलटफेर
झाबुआ जिले में विधायक संतुष्टि 66.8% के साथ संभाग में दूसरे नंबर पर है। लेकिन यहां एक असामान्य आंकड़ा सामने आया है। झाबुआ सीट पर कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया की सीट पर कांग्रेस सक्रियता केवल 36.4% है जो पूरे संभाग में सबसे कम है। यानी खुद कांग्रेस की सीट पर पार्टी को सक्रिय नहीं माना जा रहा। यह स्थानीय संगठन और विधायक छवि के बीच की खाई को उजागर करता है।
दलवार तुलना क्या कहती है
BJP की 23 सीटों पर विधायक संतुष्टि 62.4% और कांग्रेस की 14 सीटों पर 64.2% है। यानी कांग्रेस विधायक व्यक्तिगत स्तर पर थोड़ा बेहतर आंके जा रहे हैं। सरकार संतुष्टि में BJP सीटों पर 56.7% और कांग्रेस सीटों पर 51.2% है। कांग्रेस सीटों पर पार्टी सक्रियता की धारणा 62.9% तक पहुंचती है।
2028 के लिए क्या है संदेश
इंदौर जैसा शहरी गढ़ और बुरहानपुर BJP के लिए मजबूत आधार हैं। लेकिन बड़वानी, आलीराजपुर और धार का आदिवासी हिस्सा वह जमीन है जहां सरकारी योजनाओं की पहुंच कमजोर दिखती है। यह 8 अंकों का विधायक बनाम सरकार का फर्क दोनों दलों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि अगला चुनाव चेहरे की दम पर जीता जाएगा या पार्टी की ताकत पर।
FAQ
- सवाल 1: इंदौर संभाग सर्वे 2026 में BJP की सरकार को कितनी संतुष्टि मिली?
जवाब: thesootr के मध्यावधि 2026 सर्वे में इंदौर संभाग की 37 सीटों पर BJP सरकार को औसतन 54.7% संतुष्टि मिली। यह विधायक संतुष्टि (63%) से 8 अंक कम है। 16 सीटों पर सरकार संतुष्टि 50% से नीचे रही जिनमें ज्यादातर आदिवासी बहुल सीटें हैं। सबसे ज्यादा सरकार संतुष्टि इंदौर-5 में 73.7% और सबसे कम आलीराजपुर व पानसेमल में 40.9% रही। - सवाल 2: इंदौर संभाग में कांग्रेस के लिए कौन से जिले सबसे अनुकूल हैं?
जवाब: बड़वानी और आलीराजपुर जिले कांग्रेस के लिए सबसे अनुकूल हैं। बड़वानी में कांग्रेस सक्रियता 65.2% और सरकार संतुष्टि 47.3% है। आलीराजपुर में कांग्रेस सक्रियता 67% और सरकार संतुष्टि 47.7% है। धार जिले में भी विपक्ष की सक्रियता 61.3% है। इन तीनों जिलों में आदिवासी मतदाताओं की बड़ी संख्या है। - सवाल 3: इंदौर संभाग में BJP के लिए सबसे मजबूत और सबसे कमजोर जिले कौन से हैं?
जवाब: बुरहानपुर BJP के लिए सबसे मजबूत जिला है जहां सरकार संतुष्टि 66.3% के साथ संभाग में सबसे ऊंची है। खंडवा भी अनुकूल है जहां कांग्रेस सक्रियता 48.5% के साथ सबसे कम है। वहीं बड़वानी सबसे कमजोर जिला है जहां सरकार संतुष्टि 47.3% और कांग्रेस सक्रियता 65.2% है। आलीराजपुर में भी विधायक-सरकार के बीच बड़ा फर्क BJP के लिए चुनौती है।
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