मध्य प्रदेश का पहला डबल डेकर ब्रिज इंदौर में शुरू, 175 करोड़ की लागत, सीएम ने किया लोकार्पण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को थोड़े समय के लिए इंदौर पहुंचे। सुबह एयरपोर्ट पर उन्होंने यूसीसी बिल पास होने को लेकर अपनी बात रखी। इस दौरान अलग-अलग धर्मों के लोगों ने एयरपोर्ट पहुंचकर उनका स्वागत किया। इसके बाद मुख्यमंत्री लवकुश चौराहे पहुंचे, जहां उन्होंने नए डबल डेकर ब्रिज का लोकार्पण किया।
यूसीसी पर यह बोले सीएम
सीएम डॉ. मोहन यादव ने यूसीसी बिल पास होने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने ऐसे भारत का सपना देखा था, जहां हर नागरिक को समान अवसर और समान अधिकार मिलें।
मध्य प्रदेश में यूसीसी लागू करना उसी संकल्प को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि बिल लाने से पहले प्रदेशभर में साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा लोगों से संपर्क किया गया और 10 लाख से अधिक सुझाव और राय ली गईं।
यूसीसी से यह होगा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि UCC लागू होने के बाद शादी, तलाक, उत्तराधिकार और दूसरे पारिवारिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होगा। इसका मकसद किसी खास वर्ग को प्रभावित करना नहीं, बल्कि हर नागरिक पर समान कानून लागू करना है, चाहे वह किसी भी धर्म का हो।
डबल डेकर ब्रिज पर यह बोले
सीएम ने डबल डेकर ब्रिज को लेकर कहा कि इंदौर के साथ विकास जुड़ा है और लगातार सौगातें मिल रही हैं। यह प्रेरणा और उत्साह देता है। डबल डेकर ब्रिज अपने आप में आधुनिक तकनीक का उदाहरण है। यह इंदौर ही कर सकता है। इस दौरान विधायक गोलू शुक्ला, रमेश मेंदोला, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, संभागायुक्त सुदाम खाड़े, आईडीए सीईओ परीक्षित झाड़े व अन्य उपस्थित थे।
400 टन स्टील लगी है ब्रिज निर्माण में
इस ब्रिज (डबल डेकर ब्रिज इंदौर) का काम अहमदाबाद की एक कंपनी को दिया गया था। इसे बनाने में करीब 175 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। निर्माण कार्य 25 अगस्त 2023 को शुरू हुआ था। फिलहाल ब्रिज की एक लेन शुरू कर दी गई है, जबकि बाकी काम 15 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक करीब 95 फीसदी काम पूरा हो चुका है।
यह तीन स्तर वाला ब्रिज है। नीचे लवकुश चौराहे का सामान्य ट्रैफिक चलेगा। दूसरे स्तर पर मौजूदा फ्लायओवर और मेट्रो रेल कॉरिडोर रहेगा। सबसे ऊपर नया डबल लेयर फ्लायओवर होगा।
ब्रिज की कुल लंबाई 1450 मीटर है। इसमें 22 मीटर की ऊंचाई पर 65 मीटर लंबे और 24 मीटर चौड़े दो स्टील बो-स्ट्रिंग गर्डर लगाए गए हैं। दोनों गर्डर का वजन 400-400 टन है। यानी इस पूरे प्रोजेक्ट में करीब 800 टन स्टील का इस्तेमाल हुआ है। इसी वजह से इसे मध्य प्रदेश की बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धियों में गिना जा रहा है।
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