इंदौर आबकारी ने भरा सरकार का खजाना, 2000 करोड़ देने वाला बना पहला जिला

Sanjay Gupta | Mar 28, 2026, 16:53 IST
Photograph: (the sootr)
आबकारी ठेकों की पूरे प्रदेश में भले ही हालत खराब है, लेकिन इंदौर ने सरकार का खजाना भर दिया है। यहां की 156 दुकानें बिक चुकी हैं, जिनसे 2001 करोड़ रुपए मिलेंगे।

एमपी न्यूजIndore. इंदौर आबकारी विभाग की 173 शराब दुकानों में से 156 बिक गई है। जिले का कुल राजस्व लक्ष्य 2100 करोड़ है, जिसमें से 2001.91 करोड़ मिल चुके हैं। अब केवल 18 दुकानें बाकी हैं। बची इन दुकानों से अभी न्यूनतम 258 करोड़ रुपए और आना है। यानी लक्ष्य पार हो जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने आबकारी विभाग से नए सिरे से शराब दुकानों की ग्रुपिंग कराई गई थी। इसमें महंगी और सस्ती दुकानों को मिलाकर ग्रुप बनाए गए। इससे यह ग्रुप अधिक कीमत पर उठ गए।



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इन दुकानों के लिए तय कीमत से अधिक मिला राजस्व

आबकारी विभाग द्वारा जो 156 दुकानें बेची गई हैं, इसके लिए बेस प्राइज 1844.11 करोड़ था, जबकि इस 157.80 करोड़ अधिक में यह दुकानें बिकी। जो कि लगभग 8.56% वृद्धि है। वहीं बीते साल वर्ष 2025–26 में यह दुकान 1536.76 करोड़ में गई गई थी। यानी बीते साल की तुलना में विभाग को 465.15 करोड़ (लगभग 30.27%) अधिक मिले हैं।



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बड़े ग्रुप में रिकॉर्ड तोड़ बोली लगी

सहायक आयुक्त आबकारी अभिषेक तिवारी ने बताया कि सीएम की मंशानुसार 20 फीसदी से अधिक का राजस्व लक्ष्य तय था। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देशन में ग्रुपिंग हुई और पूरे प्रदेश में सर्वाधिक राजस्व प्राप्त किया गया।



  • स्कीम नं. 54 समूह: ₹134.95 करोड़ के विरुद्ध ₹153.33 करोड़ मिले
  • एमआईजी समूह: ₹98.03 करोड़ के विरुद्ध ₹111.11 करोड़
  • एमआर-9 समूह: ₹130.09 करोड़ के विरुद्ध ₹150.20 करोड़
  • चंद्रगुप्त चौराहा (एमआर.-10): ₹99.38 करोड़ के विरुद्ध ₹113.57 करोड़
  • मांगलिया समूह: ₹41.94 करोड़ के विरुद्ध ₹52.83 करोड़ प्राप्त हुए।

विभागीय विश्लेषण के अनुसार, ई-टेंडर प्रक्रिया के दौरान अन्य कई समूहों में 30% से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। यह मोनोपाली खत्म करने और नए ग्रुपिंग से हुई प्रतिस्पर्धा के कारण हुआ है।



आंकड़ों में समझिए पूरी प्रक्रिया

अगर हम आंकड़ों की बात करें, तो इस बार की नीलामी ने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।



  • कुल लक्ष्य: 2100 करोड़ रुपए का पहाड़ जैसा टारगेट।
  • अब तक की कमाई: 2001.91 करोड़ रुपए वसूल हो चुके हैं।
  • पिछला साल: वर्ष 2025–26 में इन्हीं दुकानों से मात्र 1536.76 करोड़ मिले थे।
  • बढ़ोतरी: पिछले साल के मुकाबले विभाग को लगभग 30.27% ज्यादा मुनाफा हुआ है।

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