इंदौर हीरानगर फर्जी पट्टाकांड में टीआई सुशील पटेल सस्पेंड, विभागीय जांच के बाद कार्रवाई
इंदौर के हीरानगर थाने के चर्चित फर्जी पट्टाकांड (Hiranagar fake plaster case ) में टीआई सुशील पटेल सस्पेंड हो गए हैं। विभागीय जांच में आई गंभीर लापरवाही के बाद यह कदम उठाया गया है। सीपी संतोष सिंह ने इसमें सख्ती दिखाई थी। डीसीपी जोन 3 अभिषेक रंजन द्वारा विभागीय जांच के आदेश दिए गए। जांच एडिशनल डीसीपी ओमप्रकाश द्वारा की गई। जांच के बाद यह कार्रवाई हुई है। सीपी संतोष सिंह ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि जांच के बाद डीसीपी द्वारा अनुशासनत्मक कार्रवाई की गई है।
यह था पूरा मामला
हीरानगर पुलिस द्वारा कार में तोड़फोड़ और जानलेवा हमला करने के आरोप में गिरफ्तार दो बदमाशों मयंक और शोभित का जुलूस निकाला था। यह घटना 21 जुलाई को हुई। जुलूस के दौरान दोनों आरोपियों के हाथों में प्लास्टर(पट्टे)बंधे दिखाई दिए थे। सेंट्रल जेल में इन्हें भेजा जा रहा था, तभी जेल के बाहर का वीडियो सामने आया।
इसमें दोनों आरोपी बंधे हुए पट्टे निकाल रहे हैं। साथ में सिपाही जफर खान नजर आया था। जेल पहुंचने से ठीक पहले पट्टे खुलने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इस घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और कथित फर्जी पट्टे बांधने की पर सवाल खड़े हो गए थे।
मामला तूल पकड़ते ही जांच शुरू
मामले के तूल पकड़ते ही डीसीपी अभिषेक रंजन ने इसकी जांच एडीसीपी जोन-3 ओमप्रकाश को सौंपी थी। जांच के दौरान एसीपी रुबिना मिजवानी, टीआई सुशील पटेल, एसआई दिनेश त्रिपाठी समेत कई पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए गए थे। इसके साथ ही जांच टीम अस्पताल भी पहुंची, जहां डाक्टर की सलाह पर पट्टा बंधा था और आरोपियों का मेडिकल कराया गया था।
जांच में फिर यह आया
पुलिस रिकॉर्ड और अस्पताल के दस्तावेजों के मिलान में टीआई स्तर पर गंभीर लापरवाही और अनियमितता पाए जाने पर वरिष्ठ अधिकारियों ने हीरानगर टीआई सुशील पटेल को निलंबित कर दिया। टीआई सुशील पटेल ने अपने बयान में जांच कमेटी को कहा था कि आरोपितों का उपचार गिरफ्तारी से पहले ही एक निजी अस्पताल में कराया गया था। इसके बाद केवल मेडिकल जांच (एमएलसी) के लिए उन्हें एमवाय अस्पताल ले जाया गया था। वहीं, एसीपी रुबिना मिजवानी ने बताया था कि आरोपियों को पहले शांतिभंग के मामले में न्यायालय में पेश किया गया था। इसके बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए उनके खिलाफ जेल वारंट जारी कराया गया।
आरोपियों को पट्टा लगना कोई नई बात नहीं
इंदौर में आरोपियों को पट्टा लगना कोई नई बात नहीं है। लेकिन इस पर हमेशा सवाल भी उठते रहे हैं। इसके पहले भी आरोपियों पर फर्जी पट्टे लगे और फर्जी मेडिकल रिपोर्ट बनने के आरोप लगे हैं। हालांकि कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। सीपी संतोष सिंह द्वारा इस मामले में की गई सख्त कार्रवाई आगे पुलिस अधिकारियों के लिए भी नसीहत है। किसी तरह के फर्जी पट्टा मामले नहीं चलेंगे।
क्यों लगते हैं पट्टे ?
सवाल उठता के ये लगता क्यों हैं। इस मामले में पुलिस द्वारा औपचारिक रूप से बताया जाता है कि आरोपी को पकड़ने में वह गिर गए जिसके कारण उन्हें चोट लगी है और पट्टे चढ़ावाए गए हैं। हालांकि अनौपचारिक रूप से इसे पुलिस द्वारा आरोपी को दी गई नसीहत के रूप में देखा जाता है।