इंदौर आग हादसा: 4.02 बजे फायर ब्रिगेड को फोन, उठाने वाले ने काटा, 4.20 पर पहुंची, धमाकों से घुस नहीं सके
Indore. इंदौर आग हादसे में क्या मौतों को रोका या कम किया जा सकता था। अब यह सवाल उठ रहा है। क्योंकि फायर ब्रिगेड को फोन करने वाला एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में पड़ोसी फायर ब्रिगेड को फोन करता है और घटना की जानकारी देता है। लेकिन फोन कट जाता है।
इस तरह हुई फोन पर बात
पड़ोसी फोन पर - अंदर सब सो रहे हैं, आपको आवाज आ रही है यह फूटने (धमाके) की।
( इसके बाद फोन कट जाता है।)
पड़ोसी बोलता है- रख दिया फोन उसने
दूसरा पड़ोसी- फायर ब्रिगेड बुलाओ ना, नंबर लगाओ ना
पड़ोसी- लगाया ना नंबर, वह बोले 15 मिनट लगेंगे।
दूसरा पडोसी- अरे पानी तो डालें
पड़ोसी- बिजली का मामला है पानी नहीं डाल सकते हैं। आ रही है फायर ब्रिगेड़।
इतने बजे पहुंची फायर ब्रिगेड
इस मामले में मौके पर पहुंचे एएसआई सुशील दुबे से 'द सूत्र' ने बात की। उन्होंने कहा कि दल को पहुंचने में कोई समय नहीं लगा। हमारे पास 4 बजकर 2 मिनट पर कॉल आया और 4 बजकर 20 मिनट पर पहुंच चुके थे।
धमाके हो रहे थे टीम अंदर नहीं घुस सकी
दुबे ने बताया कि मौके पर घर में धमाके हो रहे थे और घर में घुसना किसी भी तरह से संभव नहीं था। आग बहुत भयानक थी। बुझाने में बहुत समय लगा और इसके बाद ही टीम 6 से 6.30 बजे के बीच में अंदर घुस सकी।
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छह माह से कोई एसपी ही नहीं
फायर ब्रिगेड की हालत यह है कि कर्मचारी/स्टाफ आधा रह गया है। नई भर्ती बंद है। वहीं इसे अब नगर निगम के अधीन कर दिया गया है। छह महीने पहले एसपी शशिकांत कनकने थे लेकिन अभी कोई एसपी नहीं है।
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नगर निगम ने पुलिस वाली वेतन सुविधा ही नहीं दी
जब फायर ब्रिगेड को निगम के अधीन किया गया तब कहा गया था कि पुलिस वाली ही सुविधा जारी रहेंगी। लेकिन इन्हें जो पूर्व में अप्रैल और दिवाली के समय वेतन का आधा अतिरिक्त मिलता था वह बंद कर दिया गया है, जो एएसआई, एसआई स्तर पर साल भर का करीब एक लाख रुपए होता है। यह नगर निगम द्वारा नहीं दिया जा रहा है। वहीं स्टाफ की कमी के कारण अतिरिक्त बोझ आ चुका है। ऐसे में फायर ब्रिगेड़ में कर्मचारियों का उत्साह भी ठंडा पड़ता जा रहा है और कोई देखने, सुनने वाला नहीं है।