गरबा में धक्का देने पर बीजेपी नेता कमल चौहान पर क्यों लगी पॉक्सो, FIR में यह है, वहीं नेता बोले बच्ची की गलती
दरअसल, इंदौर की विधानसभा क्षेत्र क्रमांक दो में मां कनकेश्वरी गरबा का आयोजन हो रहा था। इस दौरान बीजेपी मंडल अध्यक्ष कमल सिंह चौहान पर एक बच्ची को धक्का देने का आरोप लगा था। इसका वीडियो सामने आया तो बीजेपी में भी हलचल मच गई। पार्टी ने चौहान को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है। वहीं, 17 अक्टूबर को उनके खिलाफ बीएनएस की यौन उत्पीड़न से जुड़ी धाराओं के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत भी धाराएं लगाई गई हैं।
पॉक्सो की धारा 7 व 8 लगी है चौहान पर
कमल सिंह चौहान के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा सात और आठ के तहत केस दर्ज किया गया है। अब सवाल है कि ये धाराएं कब लगती हैं? दरअसल, जब कोई व्यक्ति किसी बच्चे को गलत नीयत यानी यौन इरादे (sexual intent) से छूता है तो उस पर धारा सात लग सकती है। इसके लिए सीधे त्वचा से त्वचा का संपर्क होना जरूरी नहीं है। कपड़ों के ऊपर से गलत नीयत से छूना भी इस धारा के दायरे में आ सकता है। वहीं, धारा आठ में इसकी सजा तय की गई है। आरोप साबित होने पर कम से कम तीन साल और अधिकतम पांच साल की जेल हो सकती है। साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
बीएनएस की यौन उत्पीड़न की भी धारा
वहीं, कमल सिंह चौहान के खिलाफ बीएनएस की धारा 74 और 75(2) भी लगाई गई है। अब समझिए कि इन धाराओं का मतलब क्या है। दरअसल, धारा 74 तब लगती है, जब कोई व्यक्ति किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने की नीयत से उसके साथ जबरदस्ती करता है या बल का इस्तेमाल करता है। पहले आईपीसी में इसके लिए धारा 354 थी। किसी महिला को गलत नीयत से पकड़ना, छूना या उसके साथ जबरदस्ती करना इस धारा के दायरे में आ सकता है। इसमें दोष साबित होने पर एक से पांच साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।
वहीं, बीएनएस की धारा 75 यौन उत्पीड़न से जुड़ी है। इसमें गलत नीयत से शारीरिक संपर्क करना, जबरन नजदीक आने की कोशिश करना या अनचाही यौन मांग करना जैसे मामले आते हैं। धारा 75(2) में सजा का प्रावधान है। हालांकि, सजा और जमानत के नियम इस बात पर निर्भर करते हैं कि धारा 75(1) के तहत किस तरह के यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) का आरोप लगाया गया है। फिलहाल चौहान पर आरोप लगे हैं, जिनकी सच्चाई अदालत में तय होगी।
क्यों लगीं ये धाराएं, एफआईआर में यह लिखा है
अब सवाल है कि गरबा आयोजन में धक्का देने के मामले में इतनी गंभीर धाराएं क्यों लगाई गईं? इसकी वजह एफआईआर में दर्ज शिकायत से सामने आती है। एफआईआर के मुताबिक, घटना 15 और 16 अक्टूबर की दरमियानी रात की है। शिकायत 17 साल की नाबालिग लड़की ने दर्ज कराई है।
पीड़िता ने बताया कि उसकी छोटी बहन मां कनकेश्वरी गरबा आयोजन में गरबा कर रही थी। इसी दौरान बहन को प्यास लगी तो उसने पानी पिलाया। इस बीच बहन का पास उसके पास ही रह गया। वह पास लौटाने के लिए बहन को आवाज लगा रही थी। तभी कमल सिंह चौहान वहां पहुंचे और पूछने लगे कि पास क्यों बदल रही हो? लड़की ने बताया कि वह पास नहीं बदल रही है, बल्कि उसकी बहन का पास उसके पास रह गया है।
पीड़िता का आरोप है कि इसके बाद चौहान ने गलत तरीके से उसका हाथ पकड़ा और उसे खींचा। फिर सीने पर हाथ मारते हुए जोर से धक्का दिया। पीड़िता के मुताबिक, चौहान ने यह भी कहा कि यहां हजारों लड़कियां आती हैं और वे क्या करती हैं, मुझे सब मालूम है। लड़की ने शिकायत में कहा कि चौहान का इस तरह छूना उसे अच्छा नहीं लगा। उसने अपने पिता के साथ भी गलत व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया और पुलिस से कार्रवाई की मांग की।
इसलिए लगीं कठोर धाराएं
एफआईआर के मुताबिक, पीड़िता ने आरोप लगाया है कि कमल सिंह चौहान ने उसका हाथ पकड़ा और गलत तरीके से छुआ। लड़की ने शिकायत में यह भी कहा कि उसे चौहान का इस तरह छूना अच्छा नहीं लगा। इन्हीं आरोपों के आधार पर पुलिस ने चौहान के खिलाफ बीएनएस और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है।
इधर कमल चौहान की ऐसी सफाई, जांच हो, फांसी चढ़ा दो
वहीं, इस मामले में कमल सिंह चौहान ने वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि मैं पिछले 10 साल से गरबा आयोजन में सेवा दे रहा हूं। यहां करीब पांच हजार लड़कियां आती हैं, लेकिन आज तक ऐसी कोई घटना नहीं हुई। चौहान ने आरोप लगाया कि बच्ची के पिता शराब पीकर गरबा आयोजन में आ गए थे। मैं उन्हें समझाने गया तो बच्ची बीच में आ गई। उसने मुझसे बहस की और गाली भी दी। मैंने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं मानी। वह खुद भी यहां गरबा नहीं करती है। जब मैंने उसे बाहर निकाला तो यह घटना हो गई।
चौहान ने कहा कि यदि किसी को मेरी बात या व्यवहार बुरा लगा है तो मैं माफी मांगता हूं। बच्ची से भी माफी मांगता हूं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आपके गरबा आयोजन में ऐसा होता तो आप क्या करते? चौहान ने मुख्यमंत्री, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नगर अध्यक्ष से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि मैं दोषी पाया जाता हूं तो मुझे फांसी पर चढ़ा दीजिए।