थाने में पिटाई, हाईकोर्ट ने लसूडिया पुलिस पर लगाया 10 हजार का अर्थदंड, बॉडी वार्न कैमरे लगाने के भी आदेश
News in Short
- इंदौर हाईकोर्ट ने लसूडिया थाने में मारपीट के मामले में 10 हजार का अर्थदंड लगाया।
- यह राशि याचिकाकर्ता को देने के आदेश दिए गए हैं।
- थाने में मारपीट और रिश्वत लेकर छोड़ने के आरोप लगे थे।
- कोर्ट ने सीसीटीवी और बॉडी वार्न कैमरों पर सख्त टिप्पणी की।
- पांच बड़े थानों में 9 माह में बॉडी वार्न कैमरे लगाने के आदेश दिए गए।
News in Detail
इंदौर पुलिस की वर्दी पर फिर दाग लगा है और फिर वजह बना है क्रीम थाना लसूडिया। थाने में 29 दिसंबर 2025 को हुई मारपीट के मामले में इंदौर हाईकोर्ट ने दस हजार का अर्थदंड लगाया और इसे याचिकाकर्ताओं को देने के आदेश दिए हैं। साथ ही शहर के पांच प्रमुख थानों को नौ माह में बॉडी वार्न कैमरे लगाने के आदेश दिए हैं।
इंदौर का नंबर वन लसूडिया थाना लगातार विवादों के कारण भी नंबर वन रहता है। हाल ही में सोना चोरी के आरोप में एसआई के साथ ही पांच पुलिसकर्मी निलंबित हुए हैं। अब थाने में मारपीट और थाने में पैसे लेकर छोड़ने के आरोप में इंदौर हाईकोर्ट में लगी याचिका में अहम आदेश आया है। इसमें याचिकाकर्ता को 10 हजार मुआवजे के तौर पर देने के आदेश हाईकोर्ट इंदौर ने किए हैं।
यह है मामला
याचिकाकर्ता हर्ष जावरिया ने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसमें आरोप लगाए गए थे कि वह 29 दिसंबर 2025 की रात को बांबे अस्पताल के पास श्रीनाथ रेस्टारेंट गया था। वहां अधिक बिल लेने पर विवाद हुआ। मौके पर पुलिस आई। लसूडिया थाने से कांस्टेबल नागेंद्र व उत्कर्ष आए और मुझे व मेरे दोस्त अनुज नामदेव, आशीष नामदेव व सचिन मालवीय को प्लास्टिक पाइप से मारना शुरू कर दिया। इस घटना को मोबाइल पर रिकॉर्ड किया था। बाद में मोबाइल छीना और थाने ले गए।
थाने में पीटा और रिश्वत लेकर छोड़ा
याचिका में आरोप लगाए गए कि थाने में पीटा गया और मूंछें खींची गईं। एक घंटे तक पीटा गया। अपमानित किया गया। मोबाइल से वीडियो भी डिलीट कर दिए। फिर रिश्वत की वसूली करने के बाद बिना कोई लिखापढ़ी और कार्रवाई के छोड़ा गया।
थाने के सीसीटीवी फुटेज नहीं दिए गए
इस मामले में हाईकोर्ट ने थाने के सीसीटीवी फुटेज मांगे। सीसीटीवी में आया कि सुबह 2.41 से 2.45 बजे ऐसी जगह ले जाया गया, जहां थाने में सीसीटीवी रेंज नहीं है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि वीडियो नहीं है, लेकिन ऑडियो में मारपीट और चीखने की आवाज आ रही है। वहीं शासन पक्ष ने बताया कि जहां इन्हें रखा गया था वहां महिला अधिकारियों के बैठने की जगह थी, इसलिए वहां सीसीटीवी नहीं थे। साथ ही कहा कि थाने में कोई मारपीट नहीं की गई। शासन पक्ष ने कहा कि मोबाइल से भी कोई वीडियो डिलीट नहीं किया गया।
लगता है पुलिस नहीं चाहती बॉडी वार्न कैमरे हों
इस पर जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की बेंच ने कहा कि कोर्ट लगातार आदेश कर रहा है कि थाने में सीसीटीवी होना चाहिए और यह फुटेज सुरक्षित रखे जाना चाहिए। पूर्व में भी पुलिस को बॉडी वार्न कैमरे लगाने और एसओपी बनाने के लिए कहा गया। लेकिन केवल 442 बॉडी वार्न कैमरे इंदौर आए और लसूडिया पुलिस को दो मिले। इनका भी उपयोग ट्रैफिक संबंधी मामलों में होता है। ऐसा लगता है कि पुलिस नहीं चाहती है कि यह कैमरे आएं और मनमर्जी रुके।
पांच थानों में 9 माह में हों बॉडी वार्न कैमरे
हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि शहर के 35 थानों में से अपराध के नजरिए से पांच बड़े थानों के सभी पुलिसकर्मियों को बॉडी वार्न कैमरे दिए जाएं। यह काम नौ माह के भीतर सुनिश्चित किया जाए। इसकी रिपोर्ट अगली सुनवाई में 4 जनवरी 2027 में पेश की जाए। इस आदेश की कॉपी पीएस सामान्य प्रशासन विभाग, सचिव गृह विभाग, डीजीपी और पुलिस कमिश्नर इंदौर को दी जाए, जिससे आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
यह खबरें भी पढ़ें...
इंदौर में 4 साल के मासूम को पुलिस ने नहीं ढूंढा, IAS के ड्राइवर ने रात 1 बजे पहुंचाया था थाने
लॉरेंस गैंग का बदमाश राजपाल रिमांड पर, इंदौर के बड़े रियल एस्टेट कारोबारी, बिजनेसमैन लिस्ट में
पारिवारिक विवाद में उलझा इंदौर का सिंघानिया परिवार, बहू ने लगाए गंभीर आरोप, पति नितेश सिंघानिया गिरफ्तार
इंदौर देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में जमकर प्लेसमेंट, अधिकतम पैकेज 72 लाख, औसत 5.3 लाख मिला