प्रेमी से मिलने जा रही बहन की ऑनर किलिंग, कैमरे की धूल ने खोल दिया राज
समझें क्या है पूरा मामला...
- इंदौर के हीरा नगर इलाके में एक युवती की मौत का मामला नया मोड़ ले चुका है।
- परिवार ने पहले बताया था कि युवती ने जहर खाया था।
- लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत की असली वजह सामने आई है।
- पुलिस ने युवती के भाई और मां को गिरफ्तार कर लिया है।
- पुलिस इसे ऑनर किलिंग का मामला मान रही है।
दरअसल इंदौर के हीरा नगर थाना क्षेत्र में रहने वाली 25 वर्षीय ज्योति अग्रवाल की अप्रैल में मौत हो गई थी। ज्योति हींग कारोबारी दौलतराम अग्रवाल की बेटी थी।
वह खुद ई-कॉमर्स का व्यवसाय चलाती थी। शुरुआत में परिवार ने पुलिस को बताया कि ज्योति ने खुद जहर खा लिया था इस वजह से उसकी मौत हुई थी। अब पुलिस जांच में यह कहानी झूठी निकली है।
क्या था शुरुआती दावा
बता दें कि 2 अप्रैल को ज्योति को घायल हालत में अस्पताल भर्ती कराया गया था। अगले दिन यानी 3 अप्रैल को उसकी मौत हो गई थी।
परिजन ने उस समय बताया था कि ज्योति का किसी लड़के से प्रेम प्रसंग था। वह उससे शादी करना चाहती थी। परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था।
वहीं पुलिस को बताया गया कि विरोध से आहत होकर ज्योति ने खुद को नुकसान पहुंचाया था। उसने मोबाइल तोड़ा और कमरे में जाकर जहर खा लिया। शुरुआती जांच में यही बात मानी गई थी। लेकिन आगे की पड़ताल में कई सवाल खड़े हो गए।
सीसीटीवी में मिली गड़बड़ी
पुलिस टीम जांच के लिए कारोबारी के घर पहुंची थी। इसी दौरान पता चला कि जिस कमरे में जहर खाने की बात कही गई, वहां सीसीटीवी कैमरा लगा है। आमतौर पर बंद कैमरे के डीवीआर पर धूल जमी रहती है। लेकिन इस डीवीआर पर धूल नहीं थी।
जांच में सामने आया कि घटना वाले दिन का वीडियो डीवीआर में मौजूद ही नहीं था। संभावना जताई गई कि डेटा को जानबूझकर फॉर्मेट किया गया।
इसके अलावा परिवार से पूछा गया तो जवाब मिला कि उन्हें कैमरा बंद होने की जानकारी नहीं थी। वहीं जब जहर की पुड़िया के बारे में परिवार से पूछा तो वे अनजान रह गए।
पूछताछ में गहराता गया शक
परिवार के जवाबों में लगातार विरोधाभास सामने आता रहा है। घर में झाड़ू लगने की बात कहकर सबूत मिटाने की कोशिश जताई गई। साथ ही पुलिस को हर सवाल पर नए जवाब मिलते रहे हैं। किसी ने भी मौत की असली वजह साफ नहीं बताई। इसी वजह से पुलिस का शक गहराता चला गया।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हुआ खुलासा
इसके अलावा एसीपी रूबीना मिजवानी ने बताया कि पीएम रिपोर्ट ने पूरा मामला उजागर कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार ज्योति की मौत जहर से नहीं हुई थी। उसके सिर पर गंभीर चोट लगी थी, जिससे उसकी जान गई। शरीर पर कुल 14 चोट के निशान मिले।
वहीं अगर ज्योति ने सच में जहर खाया होता तो उसके अंग नीले पड़ जाते। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। रिपोर्ट में उसके कान के पीछे गंभीर चोट का जिक्र है। इन तथ्यों ने पुलिस की शंका को पुख्ता कर दिया।
जातिगत रिश्ते का विरोध
बताया जा रहा है कि घटना वाले दिन भाई प्रकाश और मां शीतल घर पर ही थे। ज्योति उस दिन अपने प्रेमी से मिलने जाने वाली थी। प्रकाश ने उसे रोकने की कोशिश की। ज्योति और उसके प्रेमी की जाति अलग थी जिससे परिवार नाखुश था।
इसी बात पर दोनों के बीच झगड़ा हुआ और मारपीट शुरू हो गई। आशंका है कि इसी दौरान भाई ने ज्योति का सिर दीवार पर टकराया। इससे उसे गंभीर चोट आई और बाद में उसकी मौत हो गई।
जहर डालकर बदली गई कहानी
पुलिस का मानना है कि जब ज्योति बेहोश हो गई, तब मां और भाई ने उसके मुंह में जहर डाल दिया। मकसद था मौत को मारपीट की बजाय जहर से जोड़ना। यही कहानी परिवार ने अस्पताल में पुलिस को भी बताई थी। जांच में यह पूरी योजना झूठी साबित हुई।
गिरफ्तारी और आगे की जांच
सबूत जुटाने के बाद पुलिस ने भाई प्रकाश और मां शीतल अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है। मां को जेल भेजा गया है, जबकि भाई को रिमांड पर लेकर पूछताछ जारी है। प्रकाश यूपीएससी की तैयारी कर रहा था।
डीवीआर को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया था। रिपोर्ट में सामने आया कि डीवीआर क्षतिग्रस्त होने से उसका डेटा रिकवर नहीं हो सका है। पुलिस अब मामले के अन्य पहलुओं पर भी जांच कर रही है।
ऑनर किलिंग क्या होती है?
ऑनर किलिंग वो हत्या होती है जो परिवार या समुदाय अपनी इज्जत बचाने के नाम पर करता है। ज्यादातर मामलों में वजह होती है अंतरजातीय शादी, अपनी पसंद से शादी, या प्रेम संबंध जो परिवार को स्वीकार नहीं। भारत में इसके लिए कोई अलग कानून नहीं है। इसे हत्या यानी मर्डर की धारा के तहत ही दर्ज और ट्रायल किया जाता है।
अब रजिस्टर्ड ही नहीं होते केस
NCRB हर साल Crime in India रिपोर्ट प्रकाशित करता है, लेकिन इसमें लंबा गैप रहता है। सबसे ताजा प्रकाशित रिपोर्ट 2023 वाली है, जो सितंबर 2025 में रिलीज हुई थी।
दूसरी बड़ी बात कि ऑनर किलिंग एक अलग श्रेणी के तौर पर NCRB की टेबल में स्थायी रूप से है ही नहीं। 2017 में मॉब लिंचिंग की घटनाओं के बाद सरकार ने honour killing और hate crime जैसी कैटेगरी बनाई थी, लेकिन एक साल बाद ही ये टेबल से हटा दी गईं।
सरकार ने संसद में बताया था कि राज्यों से मिला डेटा अविश्वसनीय था। तो सबसे ताजा state-wise आंकड़ा कहां से आता है? गृह मंत्रालय ने 11 मार्च 2025 को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में यह डेटा साझा किया था। यही आज तक का सबसे नया आधिकारिक आंकड़ा है, और यह 2022 तक का है।
NCRB (National Crime Records Bureau) के आधिकारिक डेटा के आधार पर, साल 2020 से 2022 के बीच 'Honour Killing' (ऑनर किलिंग) के मकसद से दर्ज किए गए मर्डर केस का राज्यवार और कुल मामलों का टेबल नीचे दिया गया है:
ऑनर किलिंग मर्डर केस (2020-2022)
| राज्य / क्षेत्र | 2020 | 2021 | 2022 |
| मध्य प्रदेश | 3 | 6 | 5 |
| पंजाब | 4 | 8 | 4 |
| झारखंड | 4 | 8 | 4 |
| हरियाणा | 4 | 4 | 0 |
| तेलंगाना | 2 | 0 | 3 |
| उत्तर प्रदेश | 0 | 2 | 0 |
| बिहार | 2 | 0 | 1 |
| छत्तीसगढ़ | 1 | 0 | 1 |
| केरल | 1 | 0 | 0 |
| आंध्र प्रदेश | 2 | 1 | 0 |
| गोवा | 0 | 1 | 0 |
| कर्नाटक | 0 | 1 | 0 |
| मेघालय | 0 | 1 | 0 |
| देश भर में कुल मामले | 25 | 33 | 18 |
एक बात ध्यान देने वाली है। मध्य प्रदेश तीन साल में सबसे ज्यादा दर्ज मामलों वाले राज्यों में शामिल रहा है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ के आंकड़े इस मामले में बेहद कम या शून्य दिखते हैं, जो जमीनी रिपोर्टिंग से मेल नहीं भी खा सकते हैं।
कई शोधकर्ता और अधिकार समूह मानते हैं कि यह डेटा बुरी तरह under-reported है। पुलिस अक्सर ऑनर किलिंग को सीधे मर्डर के तौर पर दर्ज कर देती है, बिना मोटिव को अलग से टैग किए।
इसलिए असली आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है, यह सिर्फ वो केस हैं जिनमें पुलिस ने खुद मोटिव को honour killing के तौर पर वर्गीकृत किया।
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