इंदौर के उद्योगपति हेमंत नीमा...ड्राइवर की हत्या केस से बरी, पूर्व पार्षद, ASI, तहसीलदार पलटे
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- 10 मार्च 2020 को ड्राइवर प्रमोद मतकर की हत्या हुई थी।
- केस में हेमंत नीमा, उनके बेटे पीयूष समेत 12 आरोपी थे।
- 6 साल ट्रायल चला, लेकिन सबूत मजबूत नहीं रहे।
- कई अहम गवाह, जिनमें अधिकारी और डॉक्टर शामिल थे। वे बयान से पलट गए।
- कोर्ट ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया है।
Indore. इंदौर के उद्योगपति हेमंत नीमा और उनके पुत्र पीयूष सहित सभी 12 आरोपी हत्या के मामले से बरी हो गए हैं। इंदौर में 6 साल पहले हुए इस हत्याकांड के अधिकांश अहम गवाह, जिनमें पूर्व पार्षद, अधिकारी और डॉक्टर शामिल थे, वे पक्षद्रोही होकर अपने बयानों से पलट गए।
10 मार्च 2020 को उद्योगपति हेमंत नीमा के ड्राइवर प्रमोद मतकर की हत्या हुई थी। इस केस में नीमा के साथ उनके पुत्र पीयूष सहित 12 आरोपी बने थे। लेकिन अब 6 साल के ट्रायल के बाद जिला कोर्ट महू ने इन सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।
कौन-कौन थे आरोपी
इस केस में जगदीश, रितेश, राहुल, हरीश, हेमंत नीमा का बेटा पीयूष, हेमंत नीमा, सुरेंद्र सिंह, शेखर धाकड़, लोकेश, मोहन सिंह, व्यापक दुबे और कुणाल गोयल आरोपी थे। आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अविनाश सिरपुर और उदयप्रताप सिंह थे।
पुलिस के अनुसार यह घटना हुई
पुलिस में दर्ज केस के अनुसार 10 मार्च 2020 को बाईग्राम तोलिया के पास पुलिया के एक व्यक्ति का शव मिला। यह शव प्रमोद का था। जांच में सामने आया कि वह हेमंत नीमा का ड्राइवर था। इसने उनके पुत्र पीयूष को गलत आदतें लगा दी थीं। जब पीयूष का विवाह हुआ तो उनकी पत्नी ने इसकी जानकारी हेमंत को दी थी।
हत्या कैसे हुई
नीमा ने अपने कर्मचारी जगदीश, लोकेश और सोनू के जरिए प्रमोद को बुलवाया और उसकी पिटाई की। इसके बाद पीयूष, हेमंत, शेखर, मोहन और राहुल ने भी उसके साथ मारपीट की। जब प्रमोद की तबीयत बिगड़ी, तो उसे अस्पताल ले जाया गया। वहां से वापस लाकर उसे फिर बेल्ट, क्रिकेट बैट और डंडों से पीटा गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
लाश छिपाने के उद्देश्य से जगदीश, गोलू और कुणाल शव को कार से ले गए और भेरूघाट के पास बाईग्राम में फेंक दिया। पुलिस ने कार और हेमंत के घर से ब्लड सैंपल बरामद किए हैं, साथ ही मामले से जुड़े कुछ वीडियो और ऑडियो भी पुलिस के हाथ लगे हैं।
पुलिस घटना को साबित नहीं कर पाई
इसके बावजूद पुलिस कोर्ट में घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ नहीं सकी। बरामद ब्लड की मात्रा इतनी कम थी कि ब्लड ग्रुप तक पता नहीं चल सका, जिससे यह साबित नहीं हुआ कि वह मृतक प्रमोद ही था। वीडियो में वॉइस की पुष्टि नहीं हुई। दिल्ली से एक रिपोर्ट भी नहीं आई। वॉइस सैंपल की रिपोर्ट संभावित थी, पुख्ता नहीं।
साथ ही पुलिस यह भी साबित नहीं कर सकी कि आखिरी बार प्रमोद को आरोपी जगदीश के साथ कब देखा गया था। हेमंत को उनकी पत्नी ने पीयूष और प्रमोद के बारे में कब बताया, इस पर भी स्पष्ट बयान नहीं थे।
पूर्व पार्षद, तहसीलदार सभी पलटे
इस मामले में न्यायाधीश भरत कुमार व्यास ने अहम टिप्पणी की है। उन्होंने एसपी इंदौर को पत्र लिखकर पक्षद्रोही हुए सरकारी गवाहों की जांच के निर्देश दिए हैं। कहा गया कि एसपी यह देखें कि गवाह सामान्य रूप से पलटे या किसी लाभ के कारण।
पलटने वालों में एएसआई भागीरथ जाट, नायब तहसीलदार रितेश जोशी, डॉक्टर नीरज गुप्ता, डॉ. संजय वाधवानी और डॉक्टर जिनेंद्र सेठिया शामिल हैं। इनकी जांच की जाए।
पूर्व पार्षद भी हुए पक्षद्रोही
इस मामले में पूर्व पार्षद लोकेंद्र सिंह भी पक्षद्रोही साबित हुए। पुलिस के अनुसार, जब प्रमोद को पीटा गया और उसकी तबीयत बिगड़ी, तब लोकेंद्र ने डॉक्टर को फोन किया था। लेकिन कोर्ट में उन्होंने इस घटना से ही इनकार कर दिया। वहीं डॉक्टर भी अपने बयान से पलट गए।
वाहों के पलटने पर कोर्ट की टिप्पणी
जज ने स्पष्ट लिखा कि लगातार गवाह पक्षद्रोही हो रहे हैं और बयान से पलट रहे हैं, जिससे न्याय में बाधा आ रही है। इससे आरोपियों के हौसले बढ़ते हैं। शासकीय कर्मचारी और डॉक्टर जैसे जिम्मेदार लोगों का इस तरह पलटना संदेह पैदा करता है। इसलिए इसकी जांच जरूरी है।
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