अनुकंपा नियुक्ति पर अहम फैसला, यह अधिकार नहीं.. आपात राहत है, सालों बाद नौकरी नहीं

Sanjay Gupta | Jun 24, 2026, 18:10 IST
अनुकंपा नियुक्ति पर हाईकोर्ट इंदौर का अहम फैसला
अनुकंपा नियुक्ति के मामले में इंदौर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। इंदौर नगर निगम में नियुक्ति की मांग को लेकर चल रह केस में यह फैसला हुआ है। इसमें बेंच ने कहा है कि अनुकंपा नियुक्ति को रोजगार पाने का वैकल्पिक माध्यम नहीं बनाया जा सकता।

Indore. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर अहम फैसला दिया है। इसमें कहा गया है कि अनुकंपा नियुक्ति कोई वंशानुगत रोजगार या अधिकार नहीं है, बल्कि मृत कर्मचारी के परिवार को अचानक उत्पन्न आर्थिक संकट से उबारने के लिए दी जाने वाली एक सीमित एवं अपवादात्मक रियायत है। यदि परिवार वर्षों तक स्वयं का भरण-पोषण करता रहा है तो बाद में अनुकंपा नियुक्ति की मांग न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती।



यह है केस

जस्टिस संदीप भट्ट की बेंच ने अरविंद चावरे विरूद्ध नगर निगम केस में सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया और याचिका खारिज की। इस मामले में इंदौर नगर निगम की ओर से अधिवक्ता अमेय बजाज ने सुप्रीम कोर्ट के केस लेते हुए अहम तर्क रखे। याचिकाकर्ता अरविंद चावरे के पिता कमल किशोर चावरे का निधन 30 अप्रैल 2015 को हुआ था। अरविंद ने अनुकंपा नियुक्ति मांगी। लेकिन आपराधिक केस होने और पुलिस क्लियरेंस अथवा चरित्र प्रमाण पत्र नहीं होने से आवेदन खारिज हो गया। इसके बाद वह दो साल तक रुके रहे और फिर साल 2023 में यह याचिका दायर की।





इंदौर नगर निगम ने ये तर्क रखे

नगर निगम की ओर से अधिवक्ता अमेय बजाज ने कोर्ट में अहम बातें रखीं। इसमें कहा गया कि सालों बाद याचिका लगी। यानी आर्थिक संकट नहीं रहा, जबकि यह नियुक्ति तात्कालिक राहत और आर्थिक संकट दूर करने की व्यवस्था है। याचिकाकर्ता पर आपराधिक केस हैं। याचिकाकर्ता के मृत पिता भी नियमित सेवा में नहीं होकर अनुकंपा से ही आए थे।



अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य का उद्देश्य केवल तत्काल आर्थिक संकट का निवारण है, न कि रोजगार उपलब्ध कराना। यदि परिवार वर्षों तक स्वयं को संभाल लेता है तो अनुकंपा नियुक्ति का दावा कमजोर हो जाता है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी स्पष्ट किया है कि यह योजना केवल वास्तविक निर्धनता और तत्काल आवश्यकता वाले मामलों के लिए है।



हाईकोर्ट ने यह दिया आदेश

हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद आदेश दिया कि याचिकाकर्ता पिता की मृत्यु के लगभग 8 वर्ष बाद भी जीवित रहा और अपना जीवनयापन करता रहा। यानी आर्थिक संकट की स्थिति नहीं है। इसे सामान्य भर्ती प्रक्रिया का विकल्प नहीं बनाया जा सकता। अनुकंपा नियुक्ति कोई vested right (निहित अधिकार) नहीं है। इसका उद्देश्य केवल उस परिवार को तत्काल राहत देना है जो कमाने वाले सदस्य की अचानक मृत्यु से आर्थिक संकट में आ गया हो। यदि परिवार लंबे समय तक स्वयं का निर्वाह कर चुका है तो अनुकंपा नियुक्ति का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।



आगे इस फैसले से मिलेगी निगम को राहत

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार इस फैसले से निगम में सालों से चल रहे अनुकंपा मामलों में राहत मिलेगी। साथ ही आपराधिक पृष्ठभूमि एवं चरित्र सत्यापन के महत्व को न्यायिक मान्यता मिली है। अनुकंपा नियुक्ति को “रोजगार का वैकल्पिक स्रोत” बनाने की प्रवृत्ति पर रोक लगी है।



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