इंदौर हाईकोर्ट ने डीसीपी को बुलाया, जिम्मेदारों से पूछा- कैसे पंडाल बनाकर ब्लाक की गांधीनगर मेन रोड

Sanjay Gupta | Oct 14, 2026, 17:09 IST
इंदौर में ट्रैफिक की बदहाली पर हाईकोर्ट ने डीसीपी से जवाब मांगा है।
इंदौर हाईकोर्ट (Indore High Court) में गांधीनगर मेन रोड ब्लाक करने में सख्ती दिखाई है। हाईकोर्ट में वहीं के रहवासी याचिकाकर्ता आशीष जैन की याचिका पर अब डीसीपी नरेंद्र सिंह रावत को जवाब के लिए बुलाय है। इस मामले में दो दिन से लगातार सुनवाई हो रही थी। अब हाईकोर्ट ने यह केस लगातार तीसरे दिन गुरुवार को भी लिस्ट किया है।
Indore High Court Summons DCP Narendra Singh Rawat Over Alleged Unauthorized Pandal Blocking Gandhi Nagar Main Road, Causing Traffic Disruptions and Inconvenience to Thousands of Residents.

क्या है पूरा विवाद ?

इंदौर में ट्रैफिक की समस्या (Indore Traffic Jam) लगातार लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। सड़कों पर जाम लगने से लोगों को आने-जाने में दिक्कत होती है। इसी तरह का एक मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। गांधी नगर में सड़क पर पंडाल लगाने को लेकर विवाद शुरू हुआ है। आरोप है कि नेताओं ने बिना अनुमति पंडाल लगाकर रास्ता रोक दिया है। इससे इलाके के हजारों लोगों को रोज परेशानी हो रही है।



सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता चर्चित शास्त्री ने अपनी बात रखी और मौके की फोटो भी पेश की। अधिवक्ता ने पंडाल लगाने की अनुमति को लेकर भी सवाल उठाए।



इसके बाद हाईकोर्ट के जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने शासन से जवाब मांगा। बेंच ने पूछा कि क्या पंडाल लगाने की अनुमति ली गई थी। क्या किसी सक्षम प्राधिकारी ने इसे लगाने की मंजूरी दी थी? अदालत ने इस मामले में शासन से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।



इंदौर के गांधी नगर में सड़क पर लगे पंडाल की तस्वीर अदालत में पेश की गई।

किसी से मंजूरी नहीं ली गई

इस पर शासन पक्ष की ओर से अगली सुनवाई में बताया गया कि इसमें किसी से कोई मंजूरी नहीं ली गई है। इस पर बेंच ने पूछ लिया कि फिर यह पंडाल कैसे लग गया और मेन रोड कैसे ब्लाक हो गई।



इस पर हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को तय की है। साथ ही डीसीपी नरेंद्र सिंह रावत (DCP Narendra Singh Rawat) को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है।



याचिकाकर्ता की अनापत्ति काम की नहीं

सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि याचिकाकर्ता रहवासी ने पंडाल लगाने पर अपनी सहमति दे दी है। इस पर याचिकाकर्ता के वकील चर्चित शास्त्री ने आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सहमति देने से बिना मंजूरी लगाया गया पंडाल वैध हो जाता है?



उन्होंने कहा कि 50 बाय 8 फीट के इस पंडाल से हजारों परिवार रोज परेशान हो रहे हैं। इसके बावजूद राजनीतिक दबाव के कारण कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।



पहले ही ट्रैफिक को लेकर हाईकोर्ट लगा चुकी फटकार

इसके पहले ही ट्रैफिक पर लगी विविध जनहित याचिकाओं को लेकर हाईकोर्ट लगातार शासन, प्रशासन, पुलिस को फटकार लगा रहा है। मंगलवार को भी कहा कि, अधिकारियों को छोड़कर बाकी सभी को बदहाल ट्रैफिक दिख रहा है। शहर में लगे 92 ट्रैफिक सिग्नल में से केवल 28 ही इंटेलीजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़े हैं।



वहीं 881 स्वीकृत ट्रैफिक बल के विरूद्ध केवल 660 पुलिसकर्मी हैं और 221 पद रिक्त हैं। निगम के एप पर भी केवल शिकायत दर्ज होती है लेकिन सुनवाई नहीं होती है। वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया, अधिवक्ता मनीष यादव, अधिवक्ता करण बैरागी व अन्य द्वारा इसमें लगातार पक्ष रखे जा रहे हैं।



FAQs:

  1. इस विवाद का मुख्य कारण क्या है?
    यह विवाद आशीष जैन द्वारा दायर की गई याचिका के कारण है, जिसमें कहा गया है कि नेताओं ने बिना अनुमति के पंडाल लगाकर मेन रोड को ब्लाक कर दिया है, जिससे हजारों लोग प्रभावित हो रहे हैं।
  2. पंडाल लगाने के लिए क्या कोई अनुमति ली गई थी?
    नहीं, शासन की ओर से बताया गया कि पंडाल लगाने के लिए किसी सक्षम प्राधिकारी से कोई मंजूरी नहीं ली गई है।
  3. कोर्ट की अगली सुनवाई कब होगी?
    हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को तय की है, जिसमें डीसीपी नरेंद्र सिंह रावत को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया है।
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