खुद को हिंदू बता रचाई शादी, कोर्ट ने मान्य किया विवाह, पत्नी-बच्ची को मिलेगा भरण पोषण
इंदौर में कोरोना काल में मंदिर में धर्म बदलकर एक शख्स द्वारा किए गए विवाह को फैमिली कोर्ट ने खारिज कर दिया था। केवल बच्ची को ही दो हजार रुपए प्रति माह भरण पोषण देने के आदेश हुए। फैमिली कोर्ट ने विवाह को भा अमान्य कर दिया। मामला इंदौर हाईकोर्ट पहुंचा, इसमें अब अहम आदेश हुए हैं।
पत्नी को बाद में पता चला धर्म बदला
अधिवक्ता राजेश जोशी ने याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में बताया कि कोरोना काल में जब विवाह आयोजन प्रतिबंधित थे तब साल 2020 में गब्बर ने खुद को हिन्दू बताकर प्रार्थी मांग में सिंदूर भर के मंदिर में विवाह किया था। बाद में पता चला कि वह अन्य धर्म का होकर बोहरा है। आरोपी ने पत्नी को धमकाया। पत्नी द्वारा बच्ची को पीटने, धमकाने जैसे मामले में उस पर तीन केस दर्ज कराए गए। फैमिली कोर्ट ने विवाह को मान्य नहीं किया। केवल बच्ची को दो हजार रुपए प्रतिमाह भरण पोषण देने के आदेश हुए।
हाईकोर्ट ने यह दिए आदेश
हाईकोर्ट जस्टिस गजेंद्र सिंह ने फैमिली कोर्ट के आदेश को खारिज किया। आदेश में कहा कि धार्मिक पहचान छिपाकर विवाह करने और उनसे पैदा हुई संतान के बाद भी महिला को भरण-पोषण से वंचित करना उसे फिर पीड़ित बनाने के समान है। हाईकोर्ट ने पत्नी को दस हजार और बच्ची को भी दस हजार रुपए प्रति माह भरण पोषण प्रति माह देने के आदेश दिए।
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