इंदौर में शोर मापने वाला यंत्र पुलिस ने 1.5 लाख में खरीदा, हाईकोर्ट में वकील ने बता दिया 3000 में मिल रहा
पुलिस ने पेश किया 1.5 लाख का यंत्र
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने अपनी पीठ थपथपाते हुए बताया कि हमने चार यंत्र खरीदे हैं जो शहर की हर दिशा में ध्वनि प्रदूषण को मापेंगे। इसकी कीमत 1.50 लाख रुपए है। इंदौर पुलिस की ओर से खजराना एसीपी आशीष पाठक पेश हुए थे।
वहीं ऑनलाइन वेबसाइट पर दिखा दी कीमत
इस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिनव धानोतकर ने मोबाइल पर ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट खोली। इसमें इन यंत्रों की कीमत बता दी। यह तीन हजार से लेकर बहुत उच्च स्तर का भी 28 हजार तक का आता है। इससे महंगा नहीं है। यह भी उसी तरह काम करता है जैसा कि पुलिस 1.50 लाख के यंत्र को लेकर दावा कर रही है। इस पर हाईकोर्ट की बेंच के जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लाई चौंक गए।
बेंच ने यह किए सवाल
बेंच ने पुलिस से यह भी पूछा कि क्या चार यंत्र से पूरे शहर का शोर मापा जा सकता है? इतने कम यंत्र से क्या होगा? इस पर भी पुलिस की ओर से कोई खास जवाब पेश नहीं किया गया। बेंच ने इस मामले में पहले भी सख्ती की है जिस पर अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। बेंच ने कहा कि आपको क्या रात में आवाजें नहीं आती हैं कि कितना शोर हो रहा है?
धर्मस्थलों पर तेज आवाजें आती हैं
याचिकाकर्ता अमिताभ उपाध्याय और चिन्मय मिश्रा की ओर से अधिवक्ता ने बताया कि शहर के कई हिस्सों में धर्मस्थलों पर लाउडस्पीकर के कारण तेज आवाज आती है। यह रहवासियों के लिए तकलीफ का कारण है। रात दस बजे के बाद इन पर नियंत्रण किया जाए।
केवल विज्ञप्ति जारी करा रहे अधिकारी
वहीं हाईकोर्ट ने अधिकारियों को साइलेंट जोन घोषित करने के लिए कहा था। इस पर अधिकारियों ने सुनवाई से एक दिन पहले शहर में 29 साइलेंट जोन बनाने की विज्ञप्ति जारी की। कोर्ट में पुलिस ने कहा कि हम शोर नियंत्रण पर काम कर रहे हैं। इस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि केवल विज्ञप्ति जारी की जा रही है। पुलिस को नोटिस जारी करना चाहिए कि किस क्षेत्र में कितनी आवाज हो सकती है। साथ ही एक नंबर होना चाहिए जिस पर आम व्यक्ति शिकायत कर सकता है। कोर्ट ने पुलिस से रिस्पांस टाइम भी पूछा है। ऑर्डर अभी औपचारिक रूप से जारी नहीं हुआ है। सुनवाई फिर आगे होगी।