इंदौर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : नगर निगम की मनमानी पर लगी लगाम, सड़क चौड़ीकरण का नोटिस निरस्त
Indore. इंदौर में नगर निगम के एक नोटिस को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है। यह मामला नेहरू प्रतिमा (मधुमिलन चौराहा) से छावनी पुल तक सड़क के विस्तार से जुड़ा हुआ था। याचिकाकर्ता ने नगर निगम के नोटिस को कोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने नगर निगम की कार्रवाई को गलत ठहराया और आदेश को निरस्त कर दिया।
निगम ने दिया था नोटिस, हटाने के लिए मकान
इंदौर नगर निगम ने याचिकाकर्ता बसंत रावत को नोटिस जारी किया था। नोटिस में कहा गया था कि उनका मकान सड़क के विस्तार में रुकावट डाल रहा है और इसे हटाने का आदेश दिया गया था। यह नोटिस 26 फरवरी 2026 को नगर निगम के भवन अधिकारी ने जारी किया गया था।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में दी चुनौती
याचिकाकर्ता ने अपने वकील जयेश गुरनानी के माध्यम से हाईकोर्ट में इस नोटिस को चुनौती दी। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उनका मकान नगर निगम से प्राप्त अनुमति और मंजूर नक्शे के हिसाब से बना हुआ था। उन्होंने तर्क दिया कि नगर निगम ने पहले 60 फीट सड़क चौड़ी करने का आदेश दिया था, लेकिन अब 80 फीट का आदेश दिया जा रहा था, जो गलत था।
हाईकोर्ट ने निरस्त किया निगम का नोटिस
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्कों को स्वीकार करते हुए नगर निगम के नोटिस को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि नगर निगम ने याचिकाकर्ता को सुनवाई का उचित अवसर नहीं दिया था, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ था। कोर्ट ने नगर निगम को आदेश दिया कि वह मामले की फिर से सुनवाई करें और एक उचित निर्णय लें।
हाईकोर्ट का अंतिम आदेश और भविष्य की राह
माननीय न्यायालय ने 16 मार्च 2026 को दिए अपने आदेश में निगम के पुराने नोटिस को 'शून्य' घोषित कर दिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता 26 मार्च 2026 को दोपहर 11 से 3 बजे के बीच निगम अधिकारियों के सामने पेश हों। अब निगम को पूरे मामले की नए सिरे से सुनवाई करनी होगी और एक 'रीजन्ड ऑर्डर' (तर्कसंगत आदेश) पारित करना होगा। तब तक के लिए याचिकाकर्ता की संपत्ति पर किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्यवाही पर रोक लगा दी गई है।
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