आईएएस आशीष सिंह, हर्षिका सिंह, शिवम वर्मा, एसडीएम प्रदीप सोनी, घनश्याम धनगर को राहत, श्रीराम बिल्डर को मिलेगी जमीन

Sanjay Gupta | Oct 28, 2026, 17:51 IST
इंदौर में 23 साल पुराने जमीन विवाद पर हाईकोर्ट का फैसला
Relief for IAS officers Ashish Singh, Harshika Singh, and Shivam Verma, as well as SDM Pradeep Soni and Ghanshyam Dhangar; Shriram Builders to receive land.
Indore. इंदौर हाईकोर्ट ने एमआर-10 पर स्थित कृष्णबाग की कीमती जमीन के विवाद में फैसला सुनाया है। इस मामले में आईएएस आशीष सिंह, शिवम वर्मा और हर्षिका सिंह को राहत मिली है। इनके साथ एसडीएम प्रदीप सोनी, घनश्याम धनगर और तहसीलदारों को भी राहत दी गई है। श्रीराम बिल्डर ने इन अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का केस लगाया था।

यह विवाद इंदौर के ग्राम खजराना में कृष्णबाग कॉलोनी की 0.720 हेक्टेयर जमीन से जुड़ा है। जमीन का सर्वे नंबर 66/2(क) है। यह मामला साल 2003 से चल रहा था। अब हाईकोर्ट ने इस पर फैसला सुनाया है।



कोर्ट ने मामले में सख्त टिप्पणियां की हैं। कोर्ट ने कहा कि याचिका लगाने वाले अतिक्रमणकारियों ने न्याय प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल किया है। वहीं, जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाने को लेकर श्रीराम बिल्डर ने अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका लगाई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में अवमानना की कार्रवाई की जरूरत नहीं है। इससे तीन आईएएस अधिकारियों समेत अन्य अफसरों को राहत मिली है।



इन सभी IAS अधिकारियों को मिली राहत

श्रीराम बिल्डर ने यह जमीन साल 2003 में खरीदी थी। बाद में इस पर कब्जा कर 72 लोगों ने मकान बना लिए था। इसे लेकर तहसीलदार, एसडीएम और राजस्व बोर्ड तक मामला पहुंचा था। सभी जगह इन लोगों को अतिक्रमणकारी माना गया था।



हाईकोर्ट ने भी 45 दिनों के भीतर जमीन से कब्जे हटाने का आदेश दिया था। इसके बावजूद कब्जे नहीं हटाए गए थे। इस पर श्रीराम बिल्डर ने अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का केस लगा दिया था।



इनमें तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह, नगर निगम आयुक्त हर्षिका सिंह और कलेक्टर शिवम वर्मा शामिल थे। इनके अलावा तत्कालीन एसडीएम प्रदीप सोनी, एसडीएम घनश्याम धनगर, तहसीलदार प्रीति भिसे और तहसीलदार जगदीश रंधावा को भी पक्षकार बनाया गया था।



अब जस्टिस संदीप एन. भट्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अवमानना याचिका का निपटारा कर दिया है। साथ ही किसी भी अधिकारी के खिलाफ कोई आदेश नहीं दिया है। इससे सभी अधिकारियों को राहत मिली है।



हाईकोर्ट ने की तीखी टिप्पणियां

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि श्रीराम बिल्डर ने साल 2003 में यह जमीन खरीदी थी। लेकिन इतने साल बीतने के बाद भी बिल्डर इसका इस्तेमाल नहीं कर पाया है। पहले इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) ने इस जमीन को स्कीम 132 में शामिल किया था। इसके बाद इसे स्कीम 171 में ले लिया गया था। इसी बीच जमीन पर 72 लोगों ने कब्जा भी कर लिया था।



इस मामले में सुप्रीम कोर्ट तक श्रीराम बिल्डर के पक्ष में फैसले आ चुके हैं। जमीन से कब्जे हटाने के आदेश भी दिए गए, लेकिन अब तक कब्जे नहीं हटाए गए है।



हाईकोर्ट ने इस मामले में सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि याचिका लगाने वाले लोग कानूनी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। बिना किसी ठोस आधार के बार-बार केस लगाए जा रहे हैं। इसका मकसद जमीन मालिक को उसकी संपत्ति के कानूनी अधिकारों से दूर रखना है।



30 दिनों में हटाए जाएं अतिक्रमणकारी

हाईकोर्ट ने कहा कि जमीन पर कोई अवैध कब्जा है, तो उसे जल्द से जल्द हटाया जाए। संभव हो तो कोर्ट के आदेश की प्रमाणित कॉपी मिलने के 30 दिनों के भीतर कब्जे हटा दिए जाएं।



कोर्ट ने यह भी कहा कि उसके पुराने आदेश का पालन किया जाए। ग्राम खजराना की इस जमीन से अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई तेज की जाए। इसके बाद जमीन का कब्जा श्रीराम बिल्डर को सौंपने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।



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