इंदौर के ट्रैफिक पर गृह प्रमुख सचिव पेश हों, आवासीय नक्शे में दो पार्किंग पर विचार करे निगम- हाईकोर्ट
इसके अलावा कोर्ट ने नगर निगम से आवासीय भवनों के नक्शों में कम से कम दो पार्किंग की जगह तय करने पर भी जवाब मांगा है।
पुराने आदेशों का पालन नहीं होने पर हाईकोर्ट नाराज
इंदौर के ट्रैफिक को सुधारने के लिए हाईकोर्ट में कई जनहित याचिकाएं चल रही हैं। इनमें सबसे पुरानी याचिका साल 2019 की है। कोर्ट हर सुनवाई में ट्रैफिक सुधारने के निर्देश देता रहा है। अब याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि पहले दिए गए निर्देशों का भी ठीक से पालन नहीं हो रहा है।
इस पर जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने गृह विभाग के प्रमुख सचिव को 30 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने पूछा- ट्रैफिक सुधारने के लिए सरकार ने क्या किया?
हाईकोर्ट ने कहा कि पहले दिए गए आदेशों पर अब तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। शहर के सभी जरूरी Traffic Points पर पुलिसकर्मी भी तैनात नहीं किए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि इंदौर के ट्रैफिक को सुधारने की जिम्मेदारी मौजूदा कर्मचारियों और सीमित संसाधनों पर ही छोड़ दी गई है। यह स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती।
कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में, गृह विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिया जाता है कि वे व्यक्तिगत रूप से इस न्यायालय के समक्ष उपस्थित हों। साथ ही स्पष्ट करें कि शहर की गंभीर ट्रैफिक समस्या को हल करने के लिए राज्य ने क्या कदम उठाए है।
दो पार्किंग की जगह पर विचार करे निगम
हाईकोर्ट ने इंदौर नगर निगम (IMC) से भी जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि क्या नगर निगम ऐसी व्यवस्था करने पर विचार कर रहा है, जिसमें हर आवासीय भवन के निर्माण के नक्शे में कम से कम दो गाड़ियों की पार्किंग की जगह हो। कोर्ट के मुताबिक शहर में पार्किंग की समस्या दूर करने के लिए अभी जो इंतजाम हैं वे पर्याप्त नहीं हैं। नगर निगम के वकील को अगली सुनवाई में बताना होगा कि इस दिशा में क्या उपाय किए गए हैं।
प्रमुख चौराहों पर चार ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य के वकील को निर्देश दिया कि शहर के प्रमुख ट्रैफिक पॉइंट्स पर कम से कम चार ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात किए जाएं। कोर्ट ने यह भी कहा कि नियम तोड़ने वालों पर मौके पर ही जुर्माना लगाया जाए या उनका वाहन जब्त किया जाए। खासकर रॉन्ग साइड से गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए।
2019 में भी दिए थे पुलिसकर्मी तैनात करने के निर्देश
याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बगड़िया ने कोर्ट को पुराने आदेशों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 14 अक्टूबर 2019 को हाईकोर्ट ने प्रमुख ट्रैफिक पॉइंट्स पर कम से कम दो पुलिसकर्मी तैनात करने के निर्देश दिए थे। इसके अलावा अगस्त 2026 में भी ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर आदेश जारी किया गया था। बगड़िया के मुताबिक इन निर्देशों का भी ठीक से पालन नहीं हुआ है।
मोबाइल एप से ई-चालान भरने में भी परेशानी
सुनवाई के दौरान E-Challan भुगतान में आ रही दिक्कतों का मुद्दा भी उठा। वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बगड़िया ने कोर्ट को बताया कि मोबाइल एप से ट्रैफिक चालान भरने में लोगों को परेशानी हो रही है।
एप खुलने में काफी समय लगता है। इसके कारण ऑनलाइन चालान का भुगतान आसानी से नहीं हो पा रहा है। हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों से पूछा है कि नगर निगम के इस मोबाइल एप की तकनीकी खामियां दूर करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
ट्रैफिक सुधार के लिए हाईकोर्ट ने बनाई नई समिति
इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए हाईकोर्ट ने एक नई समिति बनाने का भी आदेश दिया है। इस समिति की अध्यक्षता अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी करेंगे। इसमें अतिरिक्त महाधिवक्ता कार्यालय के एक अन्य अधिवक्ता को भी शामिल किया जाएगा।
समिति लोगों की शिकायतों और सुझावों पर ध्यान देगी। इसके अलावा राहुल सेठी और राज्य सरकार के अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने का काम भी करेगी। इससे ट्रैफिक सुधार से जुड़े मुद्दों पर संबंधित विभागों के बीच समन्वय हो सकेगा।
30 नवंबर को फिर होगी सुनवाई
अब इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था (Indore traffic system) को लेकर अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी। इसमें गृह विभाग के प्रमुख सचिव को खुद कोर्ट में उपस्थित होना होगा। उन्हें बताना होगा कि सरकार ने शहर का ट्रैफिक सुधारने के लिए अब तक क्या किया है। साथ ही नगर निगम को पार्किंग व्यवस्था और ई-चालान एप की समस्याओं को लेकर जानकारी देनी होगी। हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था को सीमित संसाधनों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।
याचिका में यह सभी है
ट्रैफिक की जनहित याचिकाओं में बागड़िया के साथ ही पूर्व पार्षद महेश गर्ग की ओर से अधिवक्ता मनीष यादव व करण बैरागी भी हैं। साथ ही अधिवक्ता अभिनव धनोतकर व अन्य भी जनसमस्याओं पर बात रख रहे हैं।