बच्ची की जान बचाने 9 करोड़ का इंजेक्शन चाहिए, कोर्ट ने पूछा क्या यह लाड़ली नहीं
INDORE. इंदौर की बेटी अनिका शर्मा करीब साढे़ तीन साल की है। उसे स्मा टाइप टू (स्पाइल मस्कुलर एट्रोफी) नाम की रेयर डिसीज है। इसके लिए नौ करोड़ के इंजेक्शन Zolgensma की जरूरत है। मां सरिता और पिता प्रवीण शर्मा करीब आठ माह से लोगों से मदद मांग रहे हैं। करीब साढ़े करोड़ रुपए जमा हो गए हैं। बाकी राशि के लिए मामला हाईकोर्ट इंदौर में पहुंचा है। इसमें हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान शासन पक्ष से जवाब मांगा।
हाईकोर्ट ने पहले यह दिया था आदेश
हाईकोर्ट में माता पिता की याचिका पर 5 मई को जस्टिस प्रणय वर्मा ने आदेश दिया था। इसमें कहा था कि केंद्र, राज्य, एम्स आपस में बात करके देखे कि किस तरह से बच्ची की अधिक से अधिक मदद हो सकती है। मानवीय आधार पर इसमें मदद के लिए हाईकोर्ट ने सभी पक्षकरों से कहा था।
टालमटोली पर हाईकोर्ट ने उठी लाड़ली बहना की बात
इस मामले में फिर 16 जून को जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की बेंच में सुनवाई हुई। इसमें शासन पक्ष ने बताया कि केंद्र की रेयर डिसीज योजना के तहत राशि दे रहे हैं लेकिन इसमें अधिकतम 50 लाख ही दे सकते हैं। इसे अधिक बढ़ाने के लिए मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इस पर पालक की ओर से अधिवक्ता चंचल गुप्ता ने कहा कि बच्ची की जान खतरे में हैं।
शासन लाड़ली बहना के लिए हर माह सवा करोड़ हितग्राहियों को 1500-1500 रुपए देता है। हर महिला को केवल एक माह की किश्त में मात्र दो रुपए भी कम दिए जाएं तो ढाई करोड़ रुपए हो जाते हैं और बच्ची का इंजेक्शन आ जाएगा। इस पर जस्टिस ने शासन पक्ष से पूछा क्यों क्या यह सरकार के लिए लाड़ली नहीं है। इस पर शासन पक्ष जवाब नहीं दे पाया और पालिसी की बात कही।
हाईकोर्ट फिर 22 जून को सुनेगा
इस मामले में हाईकोर्ट ने एक बार फिर सभी पक्षकारों से अधिक से अधिक मदद करने का रास्ता निकालने के लिए कहा है। इस पर सात दिन बाद 22 जून को सुनवाई होगी।
बच्ची को लिक्विड डाइट पर रखा गया है
वहीं समस्या यह है कि जल्द इलाज जरूरी है, क्योंकि इसमें जो इंजेक्शन लगना है वह 13 किलो से अधिक वजन होने पर असर नहीं करता है। बच्ची का वजन नहीं बढ़े इसके लिए माता-पिता उसे लिक्विड डाइट पर रखे हुए हैं। अभी वजन करीब साढ़े ग्यारह किलो पर पहुंच गया है। हाईकोर्ट में माता-पिता की ओर से अधिवक्ता गुप्ता ने यह भी तर्क रखे कि कम से कम एम्स को डायरेक्शन दिए जाएं कि वह बच्ची का उपचार शुरू करें क्योंकि एक से दो माह आब्जरवेशन में भी रखना जरूरी है। हाईकोर्ट अब 22 जून को सुनवाई करेगा।
क्या है स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी?
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) एक आनुवंशिक (जेनेटिक) बीमारी है जो मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली तंत्रिका कोशिकाओं (मोटर न्यूरॉन्स) को प्रभावित करती है। इससे मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर और सिकुड़ जाती हैं, जिससे उठने-बैठने, चलने, निगलने और सांस लेने में गंभीर परेशानी होती है।
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