इंदौर हाईकोर्ट में धार भोजशाला पर सुनवाई पूरी, अब फैसले का इंतजार

Sanjay Gupta | May 12, 2026, 17:38 IST
Photograph: (the sootr)
धार भोजशाला को लेकर आखिरकार अंतिम सुनवाई पूरी हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 6 अप्रैल से इस मामले में नियमित दोपहर ढाई बजे से सुनवाई चल रही थी। इसमें 23 दिन पर विविध याचिकाकर्ताओं, पक्षकारों द्वारा तर्क रखे गए। अब आदेश का इंतजार है।

Indore.धार भोजशाला पर मंगलवार 12 मई को सुनवाई पूरी हो गई है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 6 अप्रैल से लगातार सुनवाई चल रही थी। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी ने पूरी सुनवाई की। इसमें शासन पक्ष की ओर से एजी प्रशांत सिंह ने तो वहीं हिंदू पक्ष की ओर से मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन, अधिवक्ता विनय जोशी, पार्थ यादव आदि ने बात रखी। एएसआई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता व एडिशनल सालिसिटर जनरल सुनील जैन थे।



इन अधिवक्ताओं ने भी रखे तर्क

मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद, अजहर वारसी, नूर अहमद थे, तो एक अन्य याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन थी। एक अन्य याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता एके चितले व कार्तिक चितले थे।



हिंदू फ्रंट की ओर से लगी थी याचिका

साल 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट रंजना अग्निहोत्री एवं उनके साथियों द्वारा याचिका दायर हुई थी। इंदौर उच्च न्यायालय में भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय कर हिंदू समाज के पूर्ण आधिपत्य के लिए याचिका क्रमांक 10497/ 2022 लगाई गई थी। इस पर हाईकोर्ट ने आदेश दिए और वहां 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वे हुआ।



फिर सुप्रीम कोर्ट में मामला गया और वहां से हाईकोर्ट को केस की सुनवाई तय समय में करने के लिए कहा गया। इसके बाद सभी याचिकाएं लिंक करके सभी को सुना गया। इसमें जैन समाज ने भी याचिका दायर की ओर कहा कि यह जैन मंदिर है। वहीं मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यह मस्जिद है।



हिंदू पक्ष की ओर से तर्क और मांग

हिंदू समाज की मांग है कि भोजशाला में अनुच्छेद 25 के अनुसार पूजा का अधिकार मिले तथा मुस्लिम समाज को भोजशाला परिसर में किसी भी धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाए। केंद्र सरकार को आदेशित किया जाए कि भोजशाला के लिए एक ट्रस्ट बनाया जाए जिससे कि भोजशाला का संचालन एवं प्रबंध किया जा सके।



ट्रस्ट को यह आदेशित किया जावे कि मां सरस्वती की प्रतिमा की पूजा एवं अर्चना निर्बाध रूप से कराई जाए। भोजशाला परिसर में मुस्लिम समाज द्वारा की जा रही नमाज बंद हो। भारतीय पुरातत्व संरक्षण विभाग(ASI) के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को निरस्त किया जाए एवं हिंदू समाज को नियमित प्रतिदिन पूजा करने का अधिकार मिले। ब्रिटिश म्यूजियम में रखी माँ वाग्देवी की प्रतिमा को पुनः वापस लाया जावे एवं भोजशाला धार में स्थापित किया जाए।



मुस्लिम पक्ष का दावा

वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह मस्जिद है। साल 1935 से यह वक्फ संपत्ति है। यदि मंदिर होता तो मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होती लेकिन इसके कोई प्रमाण नहीं है। कैरेक्टर तय करने का अधिकार सिविल कोर्ट को है। यहां पर वरशिप एक्ट लागू नहीं होता है। वैज्ञानिक सर्वे में कार्बन डेटिंग का उपयोग नहीं हुआ ऐसे में तय नहीं कि यह परमारकालीन निर्माण है। पूरा सर्वे गलत है। यह सिविल वाद है और कायदे से इसकी सुनवाई जिला कोर्ट में होना चाहिए इसलिए याचिका ही मेंटेनेबल नहीं है। जो प्रतिमा वाग्देवी की बताई जा रही है वह इस परिसर में मिली ही नहीं थी।



सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने की मांग

उधर अन्य याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि फैसला कुछ भी हो लेकिन ऐसे दिशा निर्देश दिए जाएं कि यहां पर सौहार्द माहौल बना रहे। बात हिंदू और मुस्लिम की नहीं है, बात संविधान की है और कानून व्यवस्था की है। ऐसे में इस तरह के दिशा निर्देश तय किए जाएं कि फिर कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न नहीं हो।



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