एमपी हनी ट्रैप पार्ट टू- श्वेता, रेशू के चालान में खुलासा, 16 डिवाइस में 5 लाख फोटो, 500 घंटे का स्टोरेज

Sanjay Gupta | Sept 01, 2026, 14:55 IST
एमपी हनी ट्रैप पार्ट टू
एमपी में 18 मई को इंदौर में सामने आए हनी ट्रैप पार्ट टू का 600 पेज का चालान पुलिस ने पेश कर दिया है। मुख्य किरदार चिंटू, श्वेता, रेशू और अलका हैं। वहीं पुलिस की गोपनीय कार्रवाई, चालान से पता चलता है कि मामला बेहद गंभीर है और जमकर पर्दादारी है।

इंदौर में शराब कारोबारी और दो बार गोलीकांड करने वाले आरोपी हितेंद्र सिंह उर्फ चिंटू ठाकुर की फरियाद से 18 मई 2026 को MP के इंदौर में ही एमपी हनी ट्रैप पार्ट 2सामने आया। पुलिस ने पूरी कार्रवाई में जिस हद दर्जे की गोपनीयता बरती, उससे साफ है कि मामला इतना सीधा और आसान नहीं है। चालान में भी पूरी कोशिश की गई है कि पूरी पर्दादारी की जाए। यह बात तो लिखी है कि कई रसूखदारों को रेशू ने ठगा और श्वेता की भी हनी ट्रैप पार्ट वन के बाद नई गैंग बन गई, लेकिन इन दोनों पर ही जांच नहीं हुई। ना ही अन्य किसी रसूखदार को इसमें फरियादी बनाया गया।

किस तरह से की गई पूरी पर्दादारी

इस शक की सबसे बड़ी वजह तो पहले चिंटू ठाकुर ही है। चिंटू कह रहा है कि 28 अप्रैल को सुपर कॉरिडोर पर अलका, लखन, जयदीप ने घेरा और मारपीट की और धमकाया। चिंटू जितना बड़ा आरोपी है और इंदौर में दबंगता का नाम है, ऐसे में इनकी इतनी हिम्मत हो कि यह चिंटू को धमका लें, यह गले नहीं उतरता है। उसके साथ खुद ही दो-तीन गाड़ियां साथ में चलती हैं। घटना 28 अप्रैल की रात 11.15 बजे की बताई गई लेकिन एफआईआर होती है 18 मई की दोपहर 2.55 बजे। आखिर 20 दिन बाद केस क्यों दर्ज हुआ। पुलिस के आला अधिकारी एक साथ कई दल बनाते हैं। और आधी रात के बाद दबिश होती है कंट्रोल रूम से उच्च अधिकारी पूरी कार्रवाई पर नजर रखते हैं। वह भी एक ऐसे फरियादी चिंटू ठाकुर के आवेदन पर जो खुद दबंग आरोपी है। पुलिस को एक आरोपी की फरियाद पर इतनी चिंता किसी के गले नहीं उतरती है। साफ जाहिर है कि चिंता चिंटू की नहीं, कुछ अन्य रसूखदारों की थी, जिनकी गोपनीय जानकारी या यूं कहें कि फोटो/वीडियो हनी ट्रैप पार्ट टू की अहम वजह थे। पुलिस की और गोपनीयता देखिए, बंद कमरे में गोपनीय जगह पर आरोपियों से पूछताछ की गई। मुख्य आरोपियों को मीडिया के सामने नहीं लाया गया। वहीं हालत यह रही कि आरोपियों को दो बार तो जिला कोर्ट की जगह जज के बंगले पर पेश कर रिमांड ली गई।

चिंटू ने बाद में लिया श्वेता जैन का नाम

इस शिकायत पर जब 18 मई को एफआईआर हुई तब हनी ट्रैप पार्ट वन की मुख्य किरदार श्वेता विजयजैन भोपाल का नाम नहीं था। वहीं एफआईआर होने के बाद जब पुलिस ने औपचारिक तौर पर चिंटू ठाकुर के बयान लिए तब उसने कहा कि- घटना के दिन (28 अप्रैल) को इन लोगों ने मुझे धमकाते समय श्वेता विजय जैन का नाम लिया था। चिंटू ठाकुर ने कहा कि मेरे द्वारा दिए आवेदन में श्वेता जैन का नाम लिखना भूल गया था। वह भी इस षड़यंत्र में शामिल थी। पुलिस ने 19 मई की रात करीब आठ बजे न्यू मीनाल रेसिडेंसी भोपाल से उसकी भी गिरफ्तारी कर ली और इंदौर ले आई। श्वेता से पूछताछ के बाद इस गिरोह में सागर की रेशू चौधरी (उम्र 36 साल) का नाम आया। पुलिस ने चालान में बताया कि रेशू को 21 मई की दोपहर 1 बजकर 50 मिनट पर शिप्रा पुल के पास बायपास इंदौर से गिरफ्तार किया गया। सागर की रहने वाली रेशू, इंदौर में शिप्रा पुल पर कैसे मिली और गिरफ्तार हुई इसका जिक्र चालान में नहीं है।

5 लाख फोटो, 500 घंटे वीडियो का स्टोरेज

पुलिस ने आरोपियों के पास से 16 इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए हैं। इसमें मोबाइल के साथ पेन ड्राइव, स्पाई कैमरा भी है। यह फॉरेंसिक लैब में जांच के लिए भेजे गए हैं जिसके साथ दो-दो टीबी के स्टोरेज डिवाइस भेजे गए हैं। साइबर जानकारों के अनुसार जांच डिवाइस की मेमोरी और स्टोरेज ज्यादा होने पर इससे ज्यादा के डिवाइस पुलिस भेजती है। लैब इस डिवाइस में ही डेटा लेकर फिर जांच करती है। स्टोरेज डिवाइस से पता चलता है कि आरोपियों से जब्त 16 डिवाइस में 5 लाख से ज्यादा फोटो और 500 घंटे से ज्यादा के वीडियो स्टोरेज जितनी मेमोरी है।

किसी भी रसूखदार के बयान क्यों नहीं

श्वेता जैन ने पुलिस को बताया कि मैंने ही सागर के रेशू को इस काम में शामिल किया था। वह फोटो/वीडियो एडिट करने का काम कर रही थी। इसके पहले भी रेशू एडिट फोटो/वीडियो दिखाकर कई रसूखदारों को ठग चुकी है। रेशू ने अपने बयान में माना कि चिंटू ठाकुर का फोटो एडिट करने के लिए श्वेता ने मुझे दिया था। यह फोटो सागर में रेशू के घर से बरामद की गई। लेकिन पुलिस के चालान में चिंटू के सिवा अन्य किसी पीड़ित रसूखदार का बयान नहीं है। यदि केस को और पुख्ता बनाना था तो पुलिस फिर इन रसूखदारों के बयान और ब्लैकमेलिंग के सबूत लेती,जिससे केस और मजबूत बनता। लेकिन चालान से साफ है कि अन्य किसी के बयान नहीं लिए गए और ना ही फरियादी बनाया गया। पूरी गोपनीयता रखी गई। रेशू के परिजन का भी पुलिस को बयान है कि सागर और भोपाल में यह चर्चा आम रही कि रेशू ने आर्थिक लाभ और राजनीतिक फायदे के लिए ब्लैकमेलिंग की। इसी तरह मास्टरमाइंड श्वेता जैन के परिजन के बयान में है कि- सुना है कि वह देह व्यापार के काम में है और इस काम के द्वारा लोगों को ब्लैकमेल करके अपने काम निकालवाती है। इस तरह काफी पैसा कमाया है।

मोबाइल, पेनड्राइव में बंद वीडियो को लेकर यह आशंका

आरोपियों के पास से जब्त इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से पुलिस को आशंका है कि इसमें कई वीडियो हैं जो अश्लील, यौन प्रकृति के हैं। इसी के चलते पुलिस ने फॉरेंसिक लैब से इन इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की जांच के जो बिंदु तय किए हैं वह यह हैं-


  • क्या इन उपकरणों में अश्लील, यौन प्रकृति की मॉर्फ्ड या डीपफेक फोटो/वीडियो हैं।
  • क्या इसमें ऐसे एप, सॉफ्टवेयर, वेबसाइट हैं जिससे एआई जेनरेटेड, डीपफेक अश्लील फोटो/वीडियो बनाने, एडिट करने का काम किया जा सकता है
  • क्या ये फोटो/वीडियो किसी अन्य के साथ शेयर किए गए या भेजे गए
  • क्या इसमें ऐसे चैट, ऑडियो, वीडियो हैं जिनसे किसी व्यक्ति से वसूली, ब्लैकमेलिंग का प्रयास हो
  • क्या इन आरोपियों द्वारा फोटो/वीडियो साझा करने के लिए या अन्य काम के लिए इंस्टा, टेलीग्राम, फेसबुक आदि का उपयोग किया गया है

श्वेता के नए सदस्य रेशू के साथ और कौन

पुलिस ने अपनी जांच में यह भी लिखा है कि श्वेता जैन द्वारा बीते दस सालों से अन्य सह आरोपियों के साथ मिलकर संगठित रूप से डरा-धमकाकर अवैध वसूली का काम लगातार किया जा रहा है। आरोपी अपने साथियों के साथ संगठन बनाकर पीड़ितों के अश्लील वीडियो व फोटो लेकर उन्हें डरा-धमकाकर ब्लैकमेल करती है। इसमें अन्य साथी सहयोग करते हैं। श्वेता अपने संगठन के जरिए पीड़ितों का चुनाव कर उन्हें अपने षड़यंत्र में फंसाकर अपराध करती है। इस मामले में उस पर पहले भी पलासिया थाने इंदौर में साल 2019 में केस (जिसे हनी ट्रैप वन कहा जाता है) हो चुका है। साथ ही भोपाल सीआईडी में भी केस हुआ था। वहीं जेल से बाहर आने के बाद श्वेता ने फिर से नए सदस्यों का गिरोह तैयार कर उनका सरगना बनकर इसी तरह का संगठित अपराध फिर किया । लेकिन अलका और रेशू के अलावा अन्य सदस्य का नाम नहीं आया। श्वेता का पहले भी नेटवर्क बड़ा था, ऐसे में आशंका है कि और भी सदस्य होंगे, लेकिन इनकी जांच की बात अभी नहीं आई है।

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